दादरी में सियासत

यह सही है कि प्रदेश में गोमांश प्रतिबंधित है लेकिन उस कानून में यह कहां लिखा है कि ऐसा कोई मामला पकड़ में आए तो हिंदू आरोपी को मौके पर जान से मार दें। इस भयावह घटना से स्पष्टï है कि यह सब एक पल में नहीं हुआ है। इतना वहशीपन और गुस्सा क्या सिर्फ इस अफवाह पर सवार हो गया होगा कि अख़लाक ने गाय का मांस खाया है।

sanjay sharma editor5एक बार फिर हिंदू-मुस्लिम आमने-सामने हैं। देश में साम्प्रदायिक तनाव फैलाने की कोशिश की जा रही है। इतिहास गवाह है कि देश में जब-जब कोई साम्प्रदायिक घटना हुई तो नेताओं ने उसे और बड़ी घटना बनाने का हर सम्भव प्रयास किया है। साम्प्रदायिकता की आग में राजनैतिक पार्टियों ने घी डालकर अपनी रोटी सेंकने की कोशिश की है। इस बार दादरी में हुई अख़लाक की हत्या के बाद हमारे देश के नेता अपने फायदे के लिए इस मामले को लेकर ‘आग में घी डालने’ जैसा कार्य करते नजर आ रहे हैं। जिस तरह दादरी के बिसाहड़ा गांव में अफवाह उड़ाई गई और अख़लाक नाम के आदमी की हत्या कर दी गई वह समझ से परे है। इस घटना से पूरा देश स्तब्ध है।
एक अफवाह के आधार पर अख़लाक के घर में घुसकर तोड़-फोड़ की गई और उसे दौड़ा-दौड़ा कर मारा गया। किसी ने यह जरूरत नहीं समझी कि पहले घर में देख लिया जाए कि गोमांस है या नहीं। सबसे बड़ी बात कानून ने किसी को भी गोमांश खाने वाले की हत्या करने का अधिकार नहीं दिया है। यह सही है कि प्रदेश में गोमांश प्रतिबंधित है लेकिन उस कानून में यह कहां लिखा है कि ऐसा कोई मामला पकड़ में आए तो आरोपी को मौके पर जान से मार दें। इस भयावह घटना से स्पष्टï है कि यह सब एक पल में नहीं हुआ है। जिस तरीके से इस घटना को अंजाम दिया गया है उससे स्पष्टï है कि भीड़ में शामिल लोगों में बहुत नफरत भरी हुई थी। इतना वहशीपन और गुस्सा क्या सिर्फ इस अफवाह पर सवार हो गया होगा कि अख़लाक ने गाय का मांस खाया है।
सबसे बड़ी विडंबना है कि इस गांव में साम्प्रदायिक घटनाओं का कोई इतिहास नहीं रहा है, फिर अचानक यहां इतनी भयावह घटना को कैसे अंजाम दिया गया। इस गांव में हिंदू लोगों की संख्या ज्यादा है, और तो और अख़लाक का घर हिंदू राजपूतों के घरों से घिरा हुआ है। इससे स्पष्टï है कि इन लोगों के बेहतर संबंध रहे होंगे तभी यह लोग यहां आराम से रह रहे हैं। फिर अचानक ऐसा क्या हो गया कि एक अफवाह पर अ$खलाक और उनके बेटे को घर से खींचकर मारा गया। ईंट से सिर कुचल दिया गया। कितने सालों से यह परिवार इस गांव में रह रहा है। निश्चित ही इस परिवार के रहन-सहन के बारे में लोग जानते होंगे। जिस परिवार के साथ यह घटना हुई है वह परिवार पढ़ा-लिखा है। इस घटना में अख़लाक का बेटा तो बच गया है लेकिन उसकी हालत आज भी गंभीर बनी हुई है।
देश का दुर्भाग्य है कि इस बार भी सोशल मीडिया में इससे संबंधित खबरों को बढ़ा-चढ़ा कर पेश किया गया। सोशल मीडिया पर गाय कटने की वीडियो से लेकर बछिया गायब होने तक की खबरें आने लगीं। रही सही कसर नेताओं के बयान ने पूरी कर दी।अब हालत यह है कि पीडि़त परिवार से मिलने के लिए नेताओं की होड़ लगी है। सब अपना-अपना वोट बैंक बढ़ाने के चक्कर में बयानबाजी कर रहे हैं। नेताओं की मंशा दादरी में शांति नहीं बल्कि सियासत की है, जिसका मकसद वोट हासिल करना है।

 

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