दाउद को लेकर विवाद

भारत के साथ पाकिस्तान का संबंध शुरुआत से ही दुर्भाग्यपूर्ण रहा है। उसे कोई न कोई बहाना चाहिए। एक ओर वह क्रिकेट डिप्लोमैसी की चालें चलता है तो दूसरी तरफ उसके इलेक्ट्रानिक चैनल भारतीय खबरिया चैनलों के साथ साझा कार्यक्रम पेश करने लगे हैं। पाकिस्तानी कलाकार लगातार बालीवुड में दस्तक दे रहे हैं। उन्हें भारत में पर्याप्त समर्थन हासिल हो रहा है।

 

SANJAY SHARMA - EDITOR

संजय शर्मा – संपादक

मोस्ट वांटेड अपराधी दाउद इब्राहीम को लेकर इस समय जबर्दस्त विवाद मचा हुआ है। गृह राज्यमंत्री के एक बयान ने मोदी सरकार की किरकिरी करवा दी है। केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह को इस प्रकरण में संसद में नये सिरे से बयान देने की जरूरत पड़ गयी है। इसने भारत सरकार की कूटनीतिक पहल को कमजोर कर दिया है। पाकिस्तान ने भारत सरकार द्वारा भेजे गये डोजियर के औचित्य पर सवाल उठाने खड़े कर दिये हैं। अगर केंद्र सरकार को ही नहीं पता कि दाउद इब्राहीम कहां है तो वह क्या दबाव बनायेगी। भारत और पाकिस्तान के संबंध हमेशा तल्ख रहे हैं।
मुम्बई में हुआ आतंकी हमला हो या फि र मुम्बई दंगे दाउद इब्राहीम की संलिप्तता का सवाल हमेशा उठता रहा है। सभी जानते हैं कि दाउद इब्राहीम पाकिस्तान में छिपा हुआ है। अब तक अमेरिका या फिर यूरोप का कोई अन्य ताकतवर देश होता वह पाकिस्तान में छिपे दाउद को खोज निकालता और उसके ठिकानों को नष्ट कर देता। आखिरकार अल कायदा के प्रमुख ओसामा बिन लादेन के खिलाफ अमेरिका ने क्या किया था। भारत के साथ पाकिस्तान का संबंध शुरुआत से ही दुर्भाग्यपूर्ण रहा है। उसे कोई न कोई बहाना चाहिए। एक ओर वह क्रिकेट डिप्लोमैसी की चालें चलता है तो दूसरी तरफ उसके इलेक्ट्रानिक चैनल भारतीय खबरिया चैनलों के साथ साझा कार्यक्रम पेश करने लगे हैं। पाकिस्तानी कलाकार लगातार बालीवुड में दस्तक दे रहे हैं। उन्हें भारत में पर्याप्त समर्थन हासिल हो रहा है। दोनों देशों के बीच आर्थिक व व्यापारिक सहयोग के कई बिंदुओं पर पहल हुई है। पाकिस्तान के साथ भारत के संबंध अगर नहीं सुधर पा रहे हैं तो उसमें दाउद भी एक प्रमुख मोहरा रहा है। दाउद इब्राहीम को जिस प्रकार एक मायावी और रहस्यमय आभामंडल प्रदान कर दिया गया है उसके पीछे पाकिस्तान के हुक्मरानों की शह रही है। अब अगर संयुक्त राष्ट्र सहित तमाम संगठन पाकिस्तान पर दाउद इब्राहीम के प्रत्यर्पण के लिए दबाव नहीं डाल सके तो इसमें कहीं न कहीं हमारे कमजोर प्रयास ही जिम्मेदार माने जा सकते हैं। भाजपा और मोदी इस मुद्दे पर पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकारों को लगातार कटघरे में खड़ा करते रहे हैं। मोदी ने अपने शपथ ग्रहण में दक्षेस देशों के शासनाध्यक्षों को बुला करके पहल की थी। मोदी सरकार अपनी तेजी दिखाने के बावजूद दाउद इब्राहीम सहित तमाम बड़े मसलों पर पाकिस्तान के सामने कोई कठोर संदेश नहीं प्रस्तुत कर पा रही है। ऐसे में उसके गृह राज्य मंत्री का ढुलमुल बयान और दुर्भाग्यपूर्ण माना जा सकता है। चूंकि यह बयान संसद में दिया गया है इस लिए और संवेदनशील माना जा रहा है।

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