दवाओं के खराब होने का बढ़ा खतरा

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
Captureलखनऊ। राजधानी के सिविल अस्पताल में मरीजों के लिए आने वाली दवाइयों के खराब होने का संकट है। कारण अस्पताल में कई दवाइयों के डिब्बे खुले हुए पड़े हैं। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि सरकारी अस्पतालों में सरकार की ओर से दिये जाने वाले बजट का किस प्रकार से दोहन किया जा रहा है। अस्पताल के द्वितीय मंजिल पर पैथालॉजी विभाग में गैलरी में दवाइयों के तमाम डिब्बे रखे हुए हैं। जिसमें से कई डिब्बे खुले पड़े हुए हैं। जिससे दवाइयों के खराब होने का खतरा बढ़ गया है।

मौसम का तापमान लगातार बढ़ रहा है। करीब 43 डिग्री तापमान में दवाइयों पर विपरीत असर पड़ सकता है। जिससे मरीजों को दी जाने वाली दवाइयां रिएक्शन कर सकती हैं। इतने भयंकर तापमान में दवाओं के खराब होने की ओर बिल्कुल ध्यान नहीं दिया जा रहा है। जबकि जानकारों के मुताबिक तापमान ज्यादा होने से दवाइयां खराब हो सकती हैं। इतनी गर्मी ऊपर से खुली दवाइयां निश्चित ही लापरवाही साफ दिख रही है। मरीजों के स्वास्थ्य के साथ लगातार खिलवाड़ किया जा रहा है।
मुख्य औषधि भंडार की गैलरी में रखी दवाइयों के लिए किसी भी प्रकार की कूलिंग नहीं मिल रही है। हैरत की बात ये है कि पंखे तक की व्यवस्था नहीं है। साथ ही द्वितीय तल पर भी इसी प्रकार के हालात हैं। गैलरी में रखी दवाइयां खुली पड़ी हैं इसके बावजूद किसी प्रकार की कूलिंग की व्यवस्था नहीं की गई है।

खासकर इतनी गर्मी में सावधान रहने की जरूरत है। इस मौसम में दवा खराब होने की समस्यायें सबसे ज्यादा बढ़ जाती हैं। इतना ही नहीं अगर दवाओं पर कुछ असर पड़ता है तो मरीजों के लिए बड़ी समस्या खड़ी हो सकती है। ऐसे में अस्पताल प्रशासन की ओर से दवाईयों को लेकर लापरवाही मरीजों के लिए नई मुसीबत खड़ी कर सकती है।
ग खुले पड़े रहते हैं दवाइयों के डिब्बे कोई नहीं देता ध्यान

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