दलितों पर अत्याचार बढ़े

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
Captureलखनऊ। सियासत जितनी भी अच्छी हो उसका अंजाम बुरा ही होता है। पार्टियां जाती व धर्म के नाम पर सियासत करके अपने वोट बैंक बटोर कर सत्ता पर काबिज तो हो जाती हैं मगर धर्म और जाति, जिसके नाम पर सत्ता में बैठे है उसे ही भूल जाते हैं। ये तो सियासत का तकाजा है कि सियासत सीखने से पहले राजनेता भूलना सीखता है। सपा यादव और मुसलमान की राजनीति करती है तो वहीं बसपा दलित की। यही वजह है की पिछले दो सालों में दलितों पर अत्याचार की घटनायें बढ़ी हैं।
प्रदेश में दलितों पर अत्याचार बढ़ा है। दलितों के खिलाफ होने वाले उत्पीडऩ के मामले में यूपी नंबर-वन है। ये हम नहीं कह रहें, ये चौकाने वाले आंकड़े एनसीआरबी यानी नेशनल क्राईम रिकॉर्ड ब्यूरों के हैं। इन आंकड़ों ने यूपी के सियासी पारे को बढ़ा दिया है। दलितों के खिलाफ होने वाले अपराधों में बढ़ोतरी के इन आंकड़ो ने सूबे में सियासी दलों को सियासत करने का मौका दे दिया है।
एनसीआरबी के आंकड़े बताते है कि पिछले दो सालों में दलितों के खिलाफ होने वाले अपराधों में लगातार बढ़ोत्तरी हुई है। एनसीआरबी की रिपोर्ट 2013 के मुताबिक दलितों के खिलाफ होने वाले उत्पीडऩ में प्रदेश सबसे आगे है और घटित होने वाले घटनाओं का 18 प्रतिशत सिर्फ उप्र में घटित होता है। जाहिर है देश के सबसे ज्यादा दलित उत्तर-प्रदेश में रहते हैं और इनकी संख्या कुल आबादी का 21 फीसदी है। एससी/एसटी एक्ट के अन्तर्गत पिछले दो साल में 13 हजार से ज्यादा घटनाएं दर्ज हुई हैं परन्तु लगभग आधे मामलों में ही सजा हुई है, सजा के मामलों में प्रतिशत 59 से गिरकर 54 प्रतिशत तक आ गया है। इसी प्रकार जो हजारों मामले दर्ज भी हैं उस पर कोई कार्यवाही नहीं हो रही है जिसका प्रतिशत 74 से बढक़र 87 प्रतिशत हो गया है और उप्र में यह प्रतिशत देश के अन्य प्रदेशों में सर्वाधिक तीसरे स्थान पर है।
यूपी में दलितों को लेकर सियासत कोई नई बात नहीं है यूपी की सियासत में दलित वोट बैंक का अपना वजूद है जिसको लेकर चुनावों की गणित भी बैठाई जाती है। जब चुनावों की गोटियां बिछाने की तैयारी चल रही हो और उसी दरम्यान यह पता चले कि यूपी में दलितों पर अत्याचार बढ़ गया हो तो सियासत लाज़मी है।
बसपा का आरोप है कि जबसे प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार बनी है तबसे प्रदेश में दलितों पर उत्पीडऩ की घटनाएं चरम पर पहुंच गयी हैं।
अब डिग्री और माइग्रेशन ऑनलाइन
लखनऊ। परीक्षा फार्म और प्रवेश पत्र ऑनलाइन करने के बाद अब विश्वविद्यालय ने अब माइग्रेशन और डिग्री भी ऑनलाइन देने की योजना तैयार कर ली है। इसके तहत छात्रों को अपनी डिग्री और माइग्रेशन के लिए विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर आवेदन फार्म भरना होगा।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने माइग्रेशन व डिग्री के लिए आने वाले विद्यार्थियों की घण्टों लम्बी लाइन में खड़े होकर अपनी पारी का इंतजार करने की मशक्कत को खत्म कर दिया है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने सॉफ्टवेयर इंजीनियर के माध्यम से एक वेबसाइट का निर्माण कराया है। इस वेबसाइट पर जाकर विद्यार्थियों को एक फार्म डाउनलोड करना होगा। फार्म में मांगी गयी सभी जानकारियों के चालान नम्बर भी ठीक से भरकर विश्वविद्यालय को फारवर्ड करना होगा। फार्म के सत्यापन के पश्चात विश्वविद्यालय आवेदन कर्ता को एक वन टाइम पासवर्ड जारी करेगा। जिसके बाद आवेदनकर्ता को अपनी डिग्री और माइग्रेशन प्राप्त हो जाएगा। विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि हर साल हजारों फर्जी डिग्रियों का मामला सामने आता है। इससे फर्जी माइग्रेशन और डिग्रियां बनाने वालों पर लगाम लगाया जा सकता है। हर साल हजारों फर्जी डिग्रियों का मामला सामने आता है। इस प्रक्रिया से कितनी डिग्रियां अब तक निकाली गई हैं। इन सभी का डेटा सरलता से मिल जाएगा। सबसे पहले इसकी शुरुआत में ऑनलाइन अभिलेख जारी किया जाएगा।

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