दलितों के नाम पर राजनीति

दादरी कांड हुआ तो वहां भी सभी राजनीतिक पार्टियों के बड़े-बड़े चेहरे पहुंचे और एक-दूसरे को इसके लिए जिम्मेदार ठहराने और हितैषी दिखाने की कोशिश की। दादरी कांड के बाद दलितों पर हो रहे अत्याचार के मामलों को लेकर राजनीतिक पार्टियां सामने आ गईं।

sanjay sharma editor5देश में दलितों के उत्थान के लिए भले ही कितने कानून बन गए हों लेकिन देश में दलितों के साथ अत्याचार बंद नहीं हुए हैं। दलितों को समाज की मुख्यधारा से जोडऩे के लिए कितनी भी कोशिश कर ली जाए लेकिन दूर-दराज के गांवों में आज भी उनकी दशा ठीक नहीं है। और सबसे बड़ी विडंबना यह है कि इन्हीं लोगों को मुद्दा बनाकर राजनीतिक पार्टियां अपनी रोटी सेंक रही हैं। हमारे नेता अपने फायदे के लिए हाथ आया कोई भी मौका नहीं छोड़ते। कहीं कुछ अच्छा होता है तो उसका श्रेय लेने के लिए नेताओं में होड़ मच जाती है और जब कहीं कुछ बुरा होता है तो वहां एक-दूसरे पर दोषारोपण करने और खुद को उन पीडि़तों का रहनुमा दिखाने की कोशिश करते हैं। इधर एक महीने के भीतर देश में जिस तरीके से राजनीतिक पार्टियों का खेल चल रहा है वह किसी से छिपा नहीं है।
दादरी कांड हुआ तो वहां भी सभी राजनीतिक पार्टियों के बड़े-बड़े चेहरे पहुंचे और एक-दूसरे को इसके लिए जिम्मेदार ठहराने और हितैषी दिखाने की कोशिश की। दादरी कांड के बाद दलितों पर हो रहे अत्याचार के मामलों को लेकर राजनीतिक पार्टियां सामने आ गईं। सभी राजनीतिक पार्टियां खुद को दलितों की हितैषी दिखाने की कोशिश में घडिय़ाली आंसू बहाने से पीछे नहीं हटीं। देश के कई हिस्सों से दलितों के खिलाफ अत्याचार की खबरें आती ही रहती हैं। हरियाणा के फरीदाबाद के सनपेड़ गांव के दो दलित बच्चों की आग लगने से मौत हो गई थी। इस घटना पर जमकर राजनीति हुई थी, लेकिन सीबीआई और एफएसएल की टीम ने मुआयना किया तो उन्होंने कहा कि आग घर के अंदर से लगी थी, बाहर से नहीं लगी थी। राजनीतिक पार्टियों में दलितों के नाम पर राजनीतिक लाभ के लिए होड़ मच गई थी। यदि यह कहा जाए कि कांग्रेस की तरह अब बीजेपी सरकार भी दलितों पर हो रहे अत्याचारों को रोकने में नाकामयाब हो रही है तो गलत नहीं होगा।
कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी जब गांव में गए थे तो उनका क्रोध सबने देखा। राहुल गांधी ने ऐसी हरकत की जैसे कांग्रेस के शासनकाल में कभी दलितों पर अत्याचार नहीं हुए हों। यह बड़ी सच्चाई है कि जिस पार्टी के शासनकाल में घटनाएं होती हैं तो वह राजनीति न करने की वकालत करती है लेकिन जब दूसरी पार्टी की सरकार आती है तो वही जमकर सरकार को घेरती हैं। पिछले कुछ सालों में देश में दलितों पर अत्याचार बढ़े हैं। सन 2009 से 2013 के बीच देश में करीब 173000 अपराध दलितों के खिलाफ हुए हैं। सरकार कोई भी रही हो, दलितों पर अत्याचार रोकने में सभी नाकामयाब रही हैं। सन 2014 में करीब 47000 अपराध दलितों के खिलाफ सामने आए हैं।

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