दलालों और ठगों के खिलाफ कार्रवाई करने से बच रहा एलयू प्रशासन

  • एलयू का कर्मचारी बताकर तीन छात्रों से एक लाख की ठगी का मामला उजागर

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय तीन छात्रों ने अपने साथ एक लाख आठ हजार ठगी के मामले में कार्रवाई करने से बच रहा है। जिन छात्रों ने शिकायत की है, विश्वविद्यालय प्रशासन उन्हीं को कटघरे में खड़ा कर रहा है। आलाधिकारियों ने छात्रों की शिकायत मिलने के बाद भी मामले की सच्चाई जानने का प्रयास नहीं किया। वहीं प्रवेश समन्वयक ने इसको बाहरी मामला बताकर पल्ला झाड़ लिया है।
ठगी की शिकार हुए तीन पीडि़त छात्र अविरल , आयुषी सिंह और विक्रम विजय ने इस बात की जानकारी प्रवेश समन्वयक प्रो. अनिल मिश्रा को दी थी। छात्रों ने आरोप लगाया कि वहां बैठे लोगों ने मदद करने की बजाय हमें इतना डरा दिया कि वापस लौटना पड़ा। छात्रों के साथ हुई ठगी से विवि के जिम्मेदारों ने अपना पल्ला झाड़ लिया है। प्रवेश समन्वयक प्रो. अनिल मिश्रा ने इस ठगी को विवि कैम्पस के बाहर का मामला बताकर कार्रवाई करने से इंकार किया है। जबकि विवि के आलाधिकारी इस बात को मान रहे हैं कि फीस रसीद हू-ब-हू विवि में छात्रों को दी गई रसीद की कापी थी। इसके बावजूद मामले की खोजबीन नहीं की जा रही है।

यह था पूरा मामला
विवि में प्रवेश की दूसरी प्रक्रिया को पूरा करने पहुंचे छात्रों ने जब रसीद दिखाई तो उन्हें अपने साथ ठगी होने की जानकारी मिली। छात्रों के साथ ठगी करने वालों ने बाकायदा विश्वविद्यालय के लेटर हेड पर छपी फर्जी फीस की रसीद दी थी,जिसमें तीनों से ठग ने 36-36 हजार रुपए वसूले। प्रकरण के बारे में बताते हुए पीडि़त छात्र अविरल ने बताया कि उसने और उसके साथ आयुषी सिंह और विक्रम विजय नाम के छात्र ने विश्वविद्यालय में स्नातक के बीकॉम में प्रवेश लेना चाहा था। उनके एक और साथी त्वरित सिंह का प्रवेश बीकॉम में काउंसलिंग के जरिए हुआ भी। त्वरित ने ही इन तीनों को खुद को विश्वविद्यालय का कर्मचारी बनाने वाले कथित दलाल अमित चौबे से मिलवाया। इतना ही नहीं जिस छात्र त्वरित का प्रवेश कंफर्म कराने के नाम पर 10 हजार रुपए वसूले गए हैं। विवि से जुड़े सूत्रों के अनुसार तो ठग ने तीन नहीं बल्कि कई छात्रों से लाखों रुपए
ठगे हैं।

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