दर्द से तड़पता रहा मासूम, नहीं मिला इलाज

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। केजीएमयू के ट्रामा सेंटर में डॉक्टरों की संवेदनहीनता एक बार फिर देखने को मिली। 8 दिन का मासूम दर्द से तड़पता रहा लेकिन डॉक्टरों का दिल नहीं पसीजा। मासूम के परिजन जब उसे लेकर ट्रामा की इमरजेंसी पहुंचे तो डॉक्टरों ने इलाज करने से मना कर दिया और उनके परिजनों को ओपीडी में दिखाने के लिए कहा। जबकि 2 बजे के बाद ओपीडी में कोई डॉक्टर नहीं बैठता है। बेचारे गांव के रहने वाले बच्चे के परिजन घंटों केजीएमयू में भटकेते रहे लकनि उन्हें इलाज नहीं मिल सका।
फैजाबाद के गुलरिहा गांव के रहने वाले रामकेश के नाती को जन्म के बाद से ही पीठ में फोड़ा निकला है। रामकेश ने फैजाबाद के जिला अस्पताल में दिखाया तो डॉक्टरों ने बच्चे को केजीएमयू ले जाने के लिए कहा। आज करीब 3 बजे रामकेश बच्चे को लकर केजीएमयू के ट्रामा पहुंचे, जहां पर डॉक्टरों ने इलाज करने से मना कर दिया और अगले दिन ओपीडी में दिखाने को कहा। रामकेयश के बहुत कहने पर डॉक्टरों ने बच्चे को प्राथमिक इलाज भी मुहैया नहीं कराया।

डीडीओ ने किया ग्राम विकास अधिकारी को निलंबित

लखनऊ। जिला विकास अधिकारी प्रदीप कुमार सिंह ने मोहनलालगंज ब्लाक के ग्राम विकास अधिकारी पंकज कुमार वर्मा को निलंबित कर दिया। उनके ऊपर 52 शौचालयों का पैसा निकालकर गबन करने का आरोप साबित हुआ है। इस आदेश को तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है।
इस संबंध में जिला विकास अधिकारी ने बताया कि मोहनलालगंज ब्लाक के अन्तर्गत समेसी गांव में 425 बीपीएल परिवारों को शौचालय अनुदान का लाभार्थी चुना गया था। इसके लिए 19 लाख 29 हजार 500 रुपया निकाला गया लेकिन उक्त धनराशि को शौचालय निर्माण में लगाने की बजाय अधिकारी खुद ही हड़प कर गये। जबकि कागजों में शौचालय के लाभार्थियों की सूची के आगे निर्माण का काम पूरा होना अंकित किया गया है। यह मामला उप लोकायुक्त मनरेगा की जांच में सामने आया है, जिसमें वर्ष 2011-12 में शौचालय निर्माण के लाभार्थियों से संबंधित आंकड़ों का ऑडिट किया गया, तो मालूम हुआ कि बहुत से शौचालयों के निर्माण का पैसा गबन कर लिया गया है। इसमें समेसी गांव के 52 शौचालयों के निर्माण का पैसा गबन करने वाले ग्राम विकास अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की गई है।

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