दबंग खाकी व अपराधियों से निपटना कप्तान की चुनौती

  • अपराधियों की नकेल कसने में माहिर हैं राजेश कुमार पांडेय
  • कई चुनौतियों के साथ पुलिस का इकबाल भी करना होगा कायम

Capture4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। नए कप्तान राजेश कुमार पांडेय के लिए राजधानी में कई चुनौतियां हैं। अपराध और अपराधी तो हैं ही लेकिन सबसे बड़ी चुनौती होगी अपने ही विभाग में दबंग खाकी और दबंग अपराधियों से निपटने की। हालत यह है कि राजधानी के कई थानों में जहां खाकी की दबंगई दिखी वहीं पुलिस का अमानवीय चेहरा भी सामने आया। यह सब कुछ होता रहा है दबंग अपराधियों की शह पर। वर्तमान में खाकी दबंगों के पक्ष में है। राजधानी की तंग गलियां हो या फिर राजभवन, हर जगह अपराधी अपराध करके फरार हो गये हैं, और पुलिस मूकदर्शक बनकर देखती रही है।

राजधानी में कदम-कदम पर जालसाजों का मकडज़ाल, टप्पेबाजी, हत्या और लूट की घटनाओं के साथ ही एसएसपी राजेश कुमार पांडेय को यातायात की चुनौतियों से भी निपटना पड़ेगा। विगत डेढ़ माह में हुए अपराधों का पर्दाफाश सहित हसनगंज में ट्रिपल मर्डर, मडिय़ावं में सेक्स संचालिका मां-बेटी की हत्या सहित कई मामले श्री पांडेय के लिए चुनौती होंगे। सबसे बड़ी बात तो यह है कि राजधानी में उन लोगों से भी निपटना होगा जो सरकार में रहते हुए सरकार की छवि को भी खराब करने से बाज नहीं आते हैं। फिलहाल डेढ़ माह से खाली चल रही एसएसपी की कुर्सी पर राजेश कुमार पांडेय की नियुक्ति होने से राजधानी को कप्तान मिल गया है।

श्री पांडेय लखनऊ जनपद में कई पदों पर रहे हैं। एएसपी ट्रॉसगोमती, एएसपी पूर्वी सहित लखनऊ के बारे में उनको पहले से भी बहुत सारीजानकारियां हैं। ऐसा माना जा रहा है कि उनके आने से अपराधियों के हौंसले जहां पस्त होंगे वहीं पुलिस का इकबाल भी बचाने में श्री पांडेय कामयाब होंगे। पुलिस का इकबाल बचाने के लिये श्री पांडेय कटिबद्ध रहे हैं। अपराध की दुनिया में 90 के दशक में श्रीप्रकाश शुक्ला का एनकाउंटर हो या दुनियाराम का एनकाउंटर, बब्लू श्रीवास्तव के साथियों पर नकेल कसना हो या फिर अपराधियों के अंदर पुलिस का डर कायम करना हो इन सभी परिस्थितियों से निपटने में श्री पांडेय माहिर रहे हैं। कुल मिलाकर यदि यह कहा जाये कि राजेश पांडेय के नाम से बड़े-बड़े अपराधी भी एक पल के लिए कांप जाते हैं तो यह गलत नहीं होगा।

मुखबिर बनाने में माहिर हैं पांडेय
राजेश कुमार पांडेय की पहली विशेषता यह है कि वह मुखबिर बनाने में माहिर हैं। मृदुभाषी श्री पांडेय की पहली प्राथमिकता होती है कि वह आम लोगों से जुड़ सकें। राजधानी में रहते हुए उन्होंने अपने बहुत सारे मुखबिर पैदा किये। कैसरबाग, नाका, अमीनाबाद सहित कई थाना क्षेत्रों में बसने वाले खटिक समाज के लोगों के ऊपर कोई आंच नहीं आने देते हैं। माना जाता है कि इसी समाज के बहुत सारे लोग ऐसे हैं जो श्री पांडेय से सीधे तौर पर जुडक़र मुखबिर का काम करते हैं।

सरकार ने जैसे ही राजधानी के एसएसपी पद पर राजेश कुमार पांडेय को तैनाती दी वैसे ही कई थानाध्यक्षों और सीओ के चेहरों पर परेशानियों की लकीरें दिखने लगी हैं क्योंकि उनको भी अपनी कुर्सी जाने का डर सता रहा है। अभी विगत तीन माह पूर्व तत्कालीन एसएसपी यशस्वी यादव ने कई थानाध्यक्षों और सीओ का स्थानान्तरण किया था, लेकिन श्री यादव के जाते ही कार्यवाहक डीआईजी रेंज लखनऊ आरके चतुर्वेदी ने भी कई थानाध्यक्षों और क्षेत्राधिकारियों का स्थानान्तरण कर दिया। आशंका जताई जा रही है कि श्री पांडये भी स्थानान्तरण करेंगे। ऐसे में कई क्षेत्राधिकारियों और थानाध्यक्षों के ऊपर गाज गिर सकती है।

महिलाओं की सुरक्षा भी अहम चुनौती
राजधानी ही क्या पूरे प्रदेश में महिलाओं की नहीं सुनी जा रही है। कहीं थाने से भगाया जा रहा है तो कहीं तहरीर बदलवा कर मुकदमा दर्ज किया जा रहा है। ऐसे में यह भी नए कप्तान के लिए बड़ी चुनौती है।

लखनऊ। एलयू में वैरीफिकेशन के लिए आये सैकड़ों फर्जी अंकपत्रों के फर्जीवाड़े की जांच विश्वविद्यालय ने एसटीएफ को सौंप दिया है। बीपीएड अनुदेशक भर्ती के लिए लखीमपुर इलाहाबाद आदि कई क्षेत्रों से वैरीफिकेशन के लिए आये अंकपत्रों को फर्जी पाने के बाद इसकी जड़ तक जाने के लिए पहले तो विवि ने अपनी ओर से पूरी कोशिश की लेकिन मामले कि गम्भीरता को देखते हुए कुलपति ने इसकी जांच एसटीएफ को सौप दी है।

बीपीएड अनुदेशक भर्ती के लिए लखीमपुर खीरी से मार्कशीट के वैरीफिकेशन में 47 मार्कशीट को फर्जी पायी गयी थी। यह मार्कशीट लविवि के नाम से बनी थी। इस खुलासे के बाद फर्जीवाड़े की जांच शुरू कर दी गयी, जिसमें सैकड़ों मार्कशीट फर्जी मिलीं। इस फर्जीवाड़े की जड़ तक जाने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन ने एक कमेटी गठित की लेकिन उससे भी किसी प्रकार का परिणाम हाथ नहीं लगा। कुलपति ने जब इस मामले में कमेटी से जवाब मांगा तो प्रो. आर. आर. लॉयन ने इस मामले की जांच में असमर्थता जतायी। मामले की गम्भीरता और विवि की साख को धूमिल होते देख मामले को एसटीएफ को सौंप दिया गया है। कुलपति एस.बी.निम्से का कहना है कि अब इस मामले में विश्वविद्यालय कमेटी कोई जांच नहीं करेगी। अब जो भी जांच होगी वह एसटीएफ करेगी और दोषी पाये जाने वाले व्यक्ति पर कोई कार्रवाई की जाएगी। भविष्य में कभी कोई इस प्रकार की हरकरत करने की कोशिश न कर सके।

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