त्यौहारों के सीजन में संक्रमण का खतरा

त्यौहारों के सीजन में संक्रमण का खतरा

sanjay sharma

सवाल यह है कि त्यौहारों के सीजन में कोरोना संक्रमण की तेज रफ्तार का खतरा क्यों मंडरा रहा है? क्या बाजारों में लगने वाली भीड़ हालात को बिगाड़ सकती है? क्या कोरोना को लेकर लोग अभी भी लापरवाही बरत रहे हैं? सरकार के सख्त निर्देशों के बावजूद कोरोना की गाइडलाइंस का सख्ती से पालन क्यों नहीं किया जा रहा है? दुकानदार और ग्राहक लापरवाही क्यों बरत रहे हैं?

चीन के वुहान शहर से निकले कोरोना वायरस ने पूरी दुनिया में कोहराम मचा रखा है। भारत में भी वायरस का संक्रमण बढ़ता जा रहा है। देश में अब तब करीब 76 लाख लोग इसकी चपेट में आ चुके हैं जबकि एक लाख 15 हजार से अधिक की मौत हो चुकी है। हालांकि पिछले कुछ दिनों से संक्रमण के केसों में कमी आई है बावजूद इसके इसका खतरा अभी बरकरार है। त्यौहारी सीजन में जरा सी लापरवाही इस खतरे को काफी बढ़ सकती है। यह सामुदायिक विस्फोट वाली स्थिति में पहुंच सकता है। सवाल यह है कि त्यौहारों के सीजन में कोरोना संक्रमण की तेज रफ्तार का खतरा क्यों मंडरा रहा है? क्या बाजारों में लगने वाली भीड़ हालात को बिगाड़ सकती है? क्या कोरोना को लेकर लोग अभी भी लापरवाही बरत रहे हैं? सरकार के सख्त निर्देशों के बावजूद कोरोना की गाइडलाइंस का सख्ती से पालन क्यों नहीं किया जा रहा है? दुकानदार और ग्राहक लापरवाही क्यों बरत रहे हैं? क्या लोगों में कोरोना का भय खत्म हो गया है या यह महामारी से उपजी थकान का परिणाम है? क्या देश की स्वास्थ्य सेवाएं अधिक संक्रमण या कोरोना की दूसरी लहर का झटका झेल सकने में सक्षम हैं?
भारत में अक्टूबर-नवंबर में नवरात्रि से लेकर दीपावली तक के त्यौहार बनाए जाते हैं। इन त्यौहारों के दौरान लोग जमकर खरीदारी करते हैं। नवरात्रि पर पंडाल सजते हैं और यहां लोगों की अच्छी-खासी भीड़ उमड़ती है। हालांकि राज्य सरकारों ने त्यौहारों को मनाने के लिए जरूरी गाइडलांइस जारी किए हैं और इनका पालन अनिवार्य किया है। बावजूद इसके हालात बेहतर नहीं दिख रहे हैं। बाजार में भीड़ उमड़ रही है। लोग सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं कर रहे हैं। पचास फीसदी से अधिक लोग सार्वजनिक स्थलों पर मास्क का प्रयोग नहीं कर रहे हैं। सेनेटाइजर आदि का उपयोग भी काफी कम किया जा रहा है। हैरानी की बात यह है कि जब देश में कोरोना के गिनती के केस थे तब लोगों में बीमारी को लेकर डर था और वे तमाम एहतियात बरत रहे थे लेकिन जैसे-जैसे केस बढ़ रहे हैं लोग लापरवाह होते जा रहे हैं। इसका बड़ा कारण मनोवैज्ञानिक है। मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि लंबे वक्त तक रहने वाली महामारी से लोग थकान महसूस करने लगते हैं और वे फिर लापरवाही बरतने लगते हैं। हालांकि यह स्थितियां ठीक नहीं हैं। सरकार को चाहिए कि जब तक वैक्सीन नहीं आ जाती है तक तक वह कोरोना गाइडलाइंस का सख्ती से पालन कराए अन्यथा त्यौहारी सीजन में संक्रमण तेज रफ्तार से बढ़ सकता है। इससे सामुदायिक संक्रमण का खतरा उत्पन्न हो सकता है। यह स्थिति देश के लिए अच्छी नहीं होगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *