…तो स्वास्थ्य भवन में लगाई गई थी आग

  • एसटीएफ ने अपनी अंतरिम जांच रिपोर्ट में जताया शक
  • 14 बाबुओं और 6 डॉक्टरों पर होगी कार्रवाई

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। स्वास्थ्य भवन में आग लगी नहीं लगाई गई थी। एसटीएफ ने अपनी अंतरिम जांच रिपोर्ट में यह ख्ुालासा किया है। एसटीएफ की ओर से इस साजिश को रचने में 6 डॉक्टर और 14 बाबुओं पर भी शक जताया है। एसटीएफ को इन लोगों के बारे में पुख्ता सुबूत मिले हैं। स्वास्थ्य मंत्री अहमद हसन ने कहा है कि स्वास्थ्य भवन में आग लगी नही लगाई गई थी। जिन लोगों ने इस घटना को अंजाम दिया है, उनको निलंबित करके मुकदमा दर्ज किया जायेगा और साजिश करने वाले लोगों को गिरफ्तार करके कार्रवाई की जायेगी।

स्वास्थ्य भवन अग्निकांड में एसटीएफ ने सात कर्मचारियों पर आग लगाने का शक जताया है। शासन को भेजी अंतरिम जांच रिपोर्ट में एसटीएफ ने शॉर्ट सर्किट से आग लगने की आशंका को सिरे से नकार दिया है। जांच एजेंसी ने कहा कि आग लगने से आधे घंटे पहले तक संबंधित कमरे में सात कर्मचारी मौजूद थे। इन पर शक जताते हुए केस दर्ज करने की सिफ रिश की है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि रविवार होने के बावजूद सात कर्मचारी स्वास्थ्य भवन आए थे। ये सभी शाम करीब साढ़े सात बजे तक वहां रहे। उनके जाने के कुछ देर बाद ही आग लगी। जिस वक्त आग लगी, स्वास्थ्य भवन की बिजली की मेन लाइन बंद थी। जेनरेटर भी बंद था। शॉर्ट सर्किट से आग लगी होती तो बिजली के तार बाहर तक जलते, पर आग का असर सिर्फ दो बड़े कमरों तक ही रहा।
प्रमुख सचिव ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग ने स्मोक डिटेक्टर व फायर सेफ्टी सिस्टम की जांच करवाकर हाल ही में सार्टिफिकेट भी लिया गया था। था। यह सार्टिफिकेट किस कंपनी से लिया गया था, इसकी भी जांच करवाई जाएगी।

आग बुझाने वाले संयंत्र भी एक्सपायर्ड हो गए थे। इसमें जो भी दोषी हैं उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा स्वास्थ्य भवन में बायोमैट्रिक सिस्टम लगाने का भी सुझाव आया है। उन्होंने बताया कि पूरे परिसर में सीसीटीवी कैमरे लगाने के साथ ही पूरी वायरिंग बदलने का सुझाव भी आया है। इसे भी जल्दी ही दुरुस्त किया जाएगा। उन्होंने बताया कि जांच में से शराब की बोतलें व सिगरेट के टोटे भी मिले हैं। ये कहां से आए, इसकी छानबीन कराई जा रही है।

अभी दोषी लोगों के नामों का खुलासा नहीं
प्रमुख सचिव स्वास्थ्य ने बताया कि अभी एसटीएफ ने दोषी लोगों के नाम नहीं दिए हैं। कई मामले की फोरेंसिक जांच की रिपोर्ट नहीं आई है। उसकी रिपोर्ट आने के बाद स्थिति और साफ होगी। रिपोर्ट में कहा गया है कि जिन दो कमरों में आग लगी उनमें स्वास्थ्य भवन के तीन सेक्शन हैं। सेक्शन 11, डी-1 और डी-2 में रिकार्ड रखे हैं। सेक्शन 11 में कर्मचारियों की प्रतिपूर्ति (रीइम्बसज़्मेंट) के चार-पांच लाख मामलों की फाइल थी। सेक्शन डी-1 में कर्मचारियों के इस्टैब्लिशमेंट के मामले और डी-2 में फार्मासिस्टोंकी प्रोन्नति के मामले देखे जाते हैं। 14 जून 2015 की शाम रविवार होने के बावजूद काम कर रहे कर्मियों के जाने के कुछ देर बाद ही आग लगी। कमरों की पड़ताल के बाद यहां सिगरेट के टोटे के साथ बीयर की खाली बोतलें मिलीं। एसटीएफ ने कहा कि जांच में यह साफ हो गया कि शॉर्ट सर्किट से आग नहीं लगी। ऐसे में आग लगने के दो ही कारण बचते हैं-साजिशन या लापरवाही। पर आग जिस जगह लगी, वहां संवेदनशील रिकॉर्ड मौजूद थे, जो भर्तियों व प्रोन्नति से संबंधित थे। ऐसे में साजिशन आग लगाए जाने की संभावना ज्यादा है। इसी वजह से एसटीएफ ने मौके पर मौजूद रहे सातों स्वास्थ्य कर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराए जाने की सिफ रिश की है।

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