…तो विवाहित महिलाओं से अवैध संबंध रखने वाले निर्दोष

क्या कहते हैं आईजी
इस संदर्भ में आईजी अमिताभ ठाकुर ने कहा कि यह मुकदमा सिर्फ पति ही दर्ज करा सकता है। इसके अलावा कोई और नहीं दर्ज करा पाएगा। इस मामले में महिला मुल्जिम नहीं बनेगी। सिर्फ पुरुष पर ही अपराध बन सकता है लेकिन इसमें भी कई तरह के पेंच हैं। जो जांच में सामने आते हैं।

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
34rलखनऊ। एक पति अपनी पत्नी को किसी गैर पुरूष के साथ शारीरिक सम्बन्ध बनाते हुए देखता है। स्वाभाविक है कि इस दृश्य के बाद दुनिया का कोई भी ऐसा पति होगा जिसे गुस्सा नहीं आया होगा लेकिन सामने वाले पुरुष के आगे जब वह अपने को असहाय पाता है तो इसकी सूचना स्थानीय पुलिस थाने को देता है। सूचना पर पुलिस आती है और उसे पकडक़र थाने ले जाती है। मामला तहरीर देने पर आता है। पति पुलिस को तहरीर लिखकर देता है। पुलिस मुकदमा भी दर्ज करती है। लेकिन पति उस समय अवाक रह जाता है जब उसे पता चलता है कि उसकी पत्नी के साथ गलत हरकत करने वाला उसके सामने ही मंडरा रहा है। ऐसे में पति के सामने आत्महत्या करने के अलावा और कौन सा चारा हो सकता है।
बता दें कि ठाकुरगंज थाना क्षेत्र के तपसी बाबा मंदिर के पास रामू (काल्पनिक नाम) रमेश चंद्र यादव के मकान में किराए पर रहता था। रामू के साथ उसकी पत्नी और उसकी एक चार वर्ष की बेटी भी रहती है। रामू चाट और बताशे का ठेला लगाकर अपना परिवार चलाता है। रामू के मुताबिक 27 मार्च 2015 को उसके मकान मालिक रमेश चंद्र उसकी पत्नी के साथ अपने कमरे में शारीरिक सम्बन्ध स्थापित कर रहा था। इस दृश्य को रामू ने अपनी आंखों से देखा। जहां रामू और रमेश के बीच झड़प हुई। रमेश मौके पर रामू से माफी मांगने लगा। रामू ने इसकी सूचना ठाकुरगंज पुलिस को दी। मौके पर पहुंची पुलिस रमेश को पकडक़र थाने ले गई। जहां कार्रवाई करने के लिए रामू से पुलिस तहरीर की मांग करने लगी। अनपढ़ होने के कारण रामू अपने भाई से तहरीर लिखवाकर पुलिस को दी। तहरीर में उसने सभी बातों को अंकित करते हुए कार्रवाई की मांग की गई। इसके बाद भी पुलिस ने नहीं उसकी पत्नी की मेडिकल जांच कराई और नहीं साक्ष्यों को एकत्र किया। पुलिस ने इस मामले में सिर्फ आईपीसी की धारा 497 के तहत मुकदमा दर्ज किया। इस धारा पर गौर करें तो इस मामले में रमेश नहीं रामू की पत्नी दोषी है। रामू ने इस मामले में किसी राजपतित अधिकारी से जांच कराने की मांग की है। लेकिन पुलिस के इस रवैए से शायद ही लगता है कि रामू को न्याय मिल जाए।
क्या होती है धारा 497
एक ऐसा नारी विरोधी कानून जिस पर ना ही कभी सुप्रीम कोर्ट का ध्यान गया और ना ही संसद का। इतना ही नहीं जस्टिस जेएस वर्मा कमेटी का भी कभी ध्यान नहीं गया। इस कानूनी धारा के तहत कहा गया है कि यदि कोई दूसरा पुरुष किसी विवाहित महिला के साथ उसके सहमति से शारीरिक संबंध बनाता है, लेकिन उसके पति की सहमति नहीं लेता है तो ऐसे पुरुष (जो उस महिला की सहमति होने के बाद भी उस महिला के पति से सहमति नहीं लेता) को 5 वर्ष तक का जेल होगा। पत्नी को दूसरे पुरुष से संबंध बनाने के लिए पति की सहमति चाहिए, लेकिन जब पति किसी दूसरे महिला के साथ संबंध बनाता है तो उसे अपने पत्नी की सहमति की कोई जरुरत नहीं है। पति के द्वारा बनाया गया नाजायज संबंध कोई अपराध नहीं है। लेकिन पत्नी द्वारा बनाया गया नाजायज संबंध अपराध है। सुप्रीम कोर्ट में एक ऐसे ही मामले पर सुनवाई हुई जब एक पत्नी ने अपने पति का दूसरे महिला के साथ संबंध होने के कारण आत्महत्या कर लिया।

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