तो क्या विकास के नहीं, गाय और कैराना जैसे मुद्दों पर चुनाव लड़ेगी भाजपा

  • यूपी का चुनाव हिन्दुत्व के फार्मूले पर लडऩे की तैयारी
  • कैराना के बहाने यूपी भर में उन्माद फैलाने की योजना तैयार
  • खुफिया विभाग ने दी रिपोर्ट आने वाले दिनों में धार्मिक उन्माद फैलाने
    की योजना

16 June PAGE- (1)14पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। भारतीय जनता पार्टी ने जिस दिन केशव प्रसाद मौर्या को प्रदेश अध्यक्ष बनाया था, उसी दिन तय हो गया था कि भाजपा आने वाले दिनों में क्या रणनीति अपनाने वाली है। कुछ महीनों में ही कैराना जैसे मुद्दे उठाकर भाजपा ने इसके संकेत भी दे दिए। दरअसल भाजपा नेतृत्व को यह समझ आ गया था कि यूपी में विकास के नाम पर चुनाव नहीं लड़ा जा सकता क्योंकि मोदी सरकार के दो साल के कार्यकाल में ऐसा कुछ उल्लेखनीय नहीं हुआ, जिसे विकास की नई गाथा बनाकर लोगों के सामने रखा जा सके। लिहाजा तय हुआ कि भाजपा यूपी में फिर एक बार हिन्दुत्व के मुद्दे को धार दे, जिससे साम्प्रदायिक धु्रवीकरण का उसको फायदा मिल सके।
कुछ दिन पहले ही जब फांरेसिक लैबोरेटरी से यह रिपोर्ट आई कि दादरी के अखलाक के घर में मिला मीट बीफ ही था, तो सोशल मीडिया के जरिए एक बार फिर माहौल गर्म करने की कोशिश की गई। इस खेल के पुराने खिलाड़ी सांसद योगी आदित्यनाथ ने तो आनन-फानन में बड़ा बयान भी जारी करके उन लोगों से माफी मांगने की अपील की, जो अखलाक के मामले में अखलाक के परिवार के समर्थन में थे।
मगर जब सोशल मीडिया पर चलने लगा कि किसी के घर में मीट रखे होने से उसकी हत्या का अधिकार किसी को नहीं है तो यह मामला परवान नहीं चढ़ सका। इसके बाद पश्चिमी उत्तर प्रदेश को गर्म करने की रणनीति पर विचार शुरू हुआ। भाजपा सांसद हुकुम सिंह ने कैराना के कुछ लोगों की बाकायदा सूची जारी कर दी और कहा कि यह वह हिन्दू परिवार है जो मुस्लिमों के आंतक के कारण कैराना छोड़ गए।
इस सूची से देश में भी हंगामा मच गया। एनडीटीवी और एवीपी चैनलों ने जब इसकी कैराना जाकर पड़ताल की और शासन ने इस सूची की जांच की तो पाया कि इस सूची के अधिकांश नाम गलत हैं। कुछ लोग कई साल पहले ही रोजी-रोटी की तलाश में गए तो कई लोग सालों पहले मर चुके हैं।
मजे की बात यह रही कि पलायन करने वालों में कई लोग मुस्लिम भी हैं, जो अच्छे व्यवसाय की तलाश में हिन्दुओं की भांति दिल्ली अथवा अन्य स्थानों पर चले गए। विपक्ष ने आरोप लगाया कि हुकुम सिंह को दो साल सांसद बने हो गए मगर इस बीच उन्होंने एक बार भी कैराना के मामले को न तो संसद में उठाया और न ही कभी इस मामले में सरकार को कोई खत लिखा।
हुकुम सिंह की सूची गलत निकलने के बाद हो रही किरकिरी से बचने के लिए एक बार फिर भाजपा ने कल अपना प्रतिनिधिमंडल कैराना भेजा तो बदले में आज विपक्ष भी अपना एक प्रतिनिधिमंडल कैराना भेज रहा है, जिससे सच्चाई सामने आ सके।
इस बीच खुफिया विभाग की रिपोर्ट ने सरकार की नींद उड़ा दी है। खुफिया विभाग ने रिपोर्ट दी है पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुछ जिलों में साम्प्रदायिक उन्माद भडक़ाने की साजिश रची जा रही है, जिसका फायदा चुनाव में उठाया जा सके, जाहिर है कि चुनााव से पहले एक बार फिर यूपी में साम्प्रदायिक हिंसा का तांडव देखने को मिल सकता है।

भाजपा सबका साथ और सबका विकास योजना पर काम करती है। हम 2002 से अब तक कई चुनाव लड़ चुके हैं। अगर हमें इस तरह की घिनौनी राजनीति करनी होती तो पहले ही कर चुके
होते। आईपी सिंह
प्रवक्ता भाजपा

भाजपा जानती है कि यूपी में उसका कोई आधार नहीं बचा और लोगों ने देख लिया कि किस तरह अब भाजपा अपनी हार तय मानकर प्रदेश में साम्प्रदायिकता का घिनौना खेल खेलना चाह रही है। प्रदेश की जनता इस बार भाजपा को सबक सिखा देगी।
ब्रजेश पाठक
पूर्व सांसद, बसपा
भाजपा के पास मोदी जी के नाम अलावा और कुछ नहीं है और पूरा देश देख चुका है कि मोदी जी के पास सिवाय बातों के और कुछ नहीं है यह लोग हिन्दू और मुस्लिम के बीच तनाव पैदा करके अपनी घिनौनी राजनीति करना चाहते हैं।
वैभव माहेश्वरी
प्रवक्ता, आम आदमी पार्टी

Pin It