तीसरी आंख करेगी जेलों की निगरानी

जेलों में सीसीटीवी कैमरा लगने से निश्चित ही जेलों में सुधार होगा। सीसीटीवी कैमरा लगा होने से कम से कम जेलों और पुलिस थानों पर तैनात कर्मचारी काम में हीलाहवाली नहीं बरतेंगे। उनमें यह डर रहेगा कि वह जो कर रहे हैं सब रिकार्ड हो रहा है। पुलिस की लापरवाही की वजह से ही थाने से लेकर जेलों तक में बड़े-बड़े कांड हो जाते हैं।

हिराsanjay sharma editor5सत में कैदियों की मौत को गंभीरता से लेते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार और सभी राज्य सरकारों को देशभर की जेलों में सीसीटीवी कैमरे लगाने का निर्देश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने साथ ही पुलिस थानों में भी सीसीटीवी लगाने का निर्देश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने यह निर्देश एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। न्यायाधीश न्यायमूर्ति टी.एस. ठाकुर और न्यायमूर्ति आर. बानुमति की पीठ ने अपने आदेश में कहा कि देश की सभी जेलों में सीसीटीवी कैमरे एक साल के भीतर लगाए जाएं। जेलों में सीसीटीवी कैमरे लगने से निश्चित ही जेलों में सुधार होगा।
सीसीटीवी कैमरा लगा होने से कम से कम जेलों और पुलिस थानों पर तैनात कर्मचारी काम में हीलाहवाली नहीं बरतेंगे। उनमें यह डर रहेगा कि वह जो कर रहे हैं सब रिकार्ड हो रहा है। पुलिस की लापरवाही की वजह से ही थाने से लेकर जेलों में बड़े-बड़े कांड हो जाते हैं। थानों में मजलूमों की सुनवाई नहीं होती। उन्हें थाने से भगा दिया जाता है। लोगों के साथ पुलिस का सहयोगात्मक रवैया भी नहीं रहता। कैमरा लगने से इस बात की उम्मीद की जा सकती है कि जनता के प्रति पुलिस की अकड़ थोड़ी कम होगी और धन उगाही पर लगाम लगेगी। उनकी गतिविधियों पर नजर रखी जा सकेगी।
देश में जेलों की दुर्दशा किसी से छिपी नहीं है। देश की कुछ ही जेलें हैं जो हाइटेक हैं। बाकी जेलों की अव्यवस्था आलम अक्सर सुनने को मिलता है। जेलों में कर्मचारी दोहरी नीति अपनाते हैं। जो खूंखार अपराधी होते हैं उनकी सेवा में पूरा जेल प्रशासन लगा होता है और जो छोटे-मोटे अपराध में बंद होते हैं उनका शोषण किया जाता है। बड़े अपराधियों को उनकी मांग के हिसाब से सुविधाएं मुहैया करायी जाती हैं। खुलेआम लोग उनसे मिलने आते हैं। जेलों से ही बड़े-बड़े कारनामों को अंजाम दिया जाता है और जेल प्रशासन मूकदर्शक बना रहता है। बड़े-बड़े अपराधियों की साठगांठ का नतीजा ही है कि जेलों से ही उनका व्यवसाय संचालित हो रहा है। ऐसे में सीसीटीवी कैमरा बेहतर विकल्प हो सकता है। इससे कुछ तो सुधार होगा ही।
जेलों में कैदियों की आपस में मारपीट और कैदियों को दी जाने वाली सुविधाओं पर भी समय-समय पर प्रश्न उठता रहा है। इस मामले पर हो-हल्ला मचने के बाद भी कोई सुधार नहीं था। सीसीटीवी कैमरा लगने से निश्चित ही इस दिशा में सुधार की गुंजाइश बनती है। जेलों में साफ-सफाई, कैदियों की निगरानी, रसोई की साफ-सफाई व भोजन की गुणवत्ता की निगरानी आसानी से हो सकेगी।

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