तिहाड़ जेल की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल!

तिहाड़ जेल देश की राजधानी की प्रमुख जेल तो है ही यहां कई खतरनाक अपराधियों से लेकर कई वीआईपी कैदी भी बंद रहते हैं। देश की अतिसुरक्षित जेलों में इस तरह की घटनाओं से जेल की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खुल गई है। अब तो गाहे-बगाहे तिहाड़ की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़ा हो जाता है।

sanjay sharma editor5एशिया की सबसे सुरक्षित तिहाड़ जेल एक बार फिर चर्चा में है। तिहाड़ अपनी सुरक्षा कारणों से जाना जाता है लेकिन तिहाड़ जेल की सुरक्षा व्यवस्था पर फिर सवाल खड़ा हो गया है। तिहाड़ में एक बार फिर गैंगवार की घटना हुई। इस गैंगवार में दो कैदियों की मौत हो गई जबकि चार कैदी घायल हो गए। इस गैंगवार में तिहाड़ जेल के आठ कर्मचारी भी घायल हुए हैं। अजीब विडंबना है कि देश की सबसे सुरक्षित मानी जाने वाली जेल में गैंगवार की घटना हुई। इस घटना के बाद से तिहाड़ की सुरक्षा सवालों के घेरे में आ गई है।
तिहाड़ जेल देश की राजधानी की प्रमुख जेल तो है ही यहां कई खतरनाक अपराधियों से लेकर कई वीआईपी कैदी भी बंद रहते हैं। देश की अतिसुरक्षित जेल में इस तरह की घटना से जेल की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खुल गई है। अब तो गाहे-बगाहे तिहाड़ की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़ा हो ही जाता है। अगस्त माह में एक कैदी ने आत्महत्या कर ली थी तो वहीं जुलाई माह में तिहाड़ जेल से दो कैदी फरार हो गए थे। इन दोनों कैदियों द्वारा जेल की तीन दीवारों को फांदने से यह साफ हो जाता है कि इस जेल में सुरक्षाकर्मी ठीक ढंग से निगरानी नहीं कर रहे थे। अगर ऐसा होता तो ये आसानी से पकड़े जाते। ताजा हुई गैंगवार की घटना से साफ पता चलता है कि ऐसे मामलों के पीछे जेल के अंदर छिड़ी वर्चस्व की जंग एक बड़ी वजह है। जेल के अंदर हार्डकोर क्रिमिनल्स के बीच वर्चस्व की लड़ाई के चलते ऐसी वारदातों को अंजाम दिया जाता है। ऐसे में जेल प्रशासन की जिम्मेदारी होती है कि वह इन सब पर प्रतिबंध लगाए। तिहाड़ जेल में कैदियों के भागने की भी कई घटनाएं हो चुकी हैं। यहां से काफी सनसनीखेज ढंग से कुख्यात अपराधी चाल्र्स शोभराज भाग चुका है। सन 1986 में अपने जन्मदिन के बहाने उसने नशीली दवा मिली मिठाई सुरक्षाकर्मियों को खिलाई और भाग निकला। पूर्व डकैत और सांसद फूलन देवी का हत्यारा शेर सिंह राणा भी तिहाड़ से भाग गया था। गैंगवार की भी कई घटनाएं हो चुकी हैं। कैदियों में आपसी मारपीट और कैदियों द्वारा साथी कैदी की हत्या की तो अनगिनत वारदातें हो चुकी हैं, लेकिन हर बार जेल प्रशासन जांच की बात कहकर शांत बैठ जाता है।
तिहाड़ जेल अपने अनुशासन और नियम के लिए जानी जाती रही है। लेकिन लगातार हो रही घटनाओं से यही लगता है कि तिहाड़ जेल की व्यवस्था भी अन्य जेलों की ही तरह है। तिहाड़ जेल की क्षमता 6200 कैदियों की है जबकि इसमें फिलहाल 14 हजार से ज्यादा कैदी हैं। 212 एकड़ में बनी इस जेल में कैदियों की निगरानी के लिए 550 सीसीटीवी कैमरे लगे हैं, जो संख्या के लिहाज से काफी कम हैं। सरकार को चाक-चौबंद सुरक्षा के लिए इसे बढ़ाना चाहिए और ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए कि इस तरह की घटना की पुनरावृत्ति न हो।

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