तड़प-तड़प कर मर गयी पत्रकार की मां

  • पत्रकार की मां के हत्यारों को बचाने में जुटे एसपी अब्दुल हमीद
  • बाराबंकी में रोज वसूली के लिए थानों पर बैठाये जाते हैं बेकसूर लोग
  • तबादला होने के बाद रोक दिया गया था अब्दुल हमीद को बाराबंकी में
  • अवैध खनन और मादक पदार्थों से करोड़ो रुपये वसूली रही है बाराबंकी पुलिस
  • कौन बचा रहा बाराबंकी के बदनाम पुलिस अधीक्षक को

 T14पीएम न्यूज़ नेटवर्क

यही सलूक तो दारोगा के साथ
जिस तरह पत्रकार के पिता को बेवजह थाने पर बैठाया गया और कहा कि उसके साले के तलाश के कारण उसे बिठाया गया ऐसा ही सलूक दारोगा के परिवार के साथ किया जाना चाहिये। उन्होंने कहा कि जब तक बाराबंकी का एसपी नहीं हटेगा तब तक मजिस्ट्रेटी जांच के कोई मायने नहीं है।
-लक्ष्मीकांत बाजपेयी, भाजपा अध्यक्ष

कड़ी कार्यवाई की जायेगी
सीएम ने आज बाराबंकी प्रकरण में बेहद गुस्से में नजर आए। उन्होंने बाराबंकी की घटना की मजिस्ट्रेटी जांच के
आदेश दे दिये। सीएम ने कहा
कि यह घटना बेहद दुखद है, जिन पुलिसकर्मियों ने अपराध किया है उनके खिलाफ कड़ी कार्यवाहीं होगी।
-अखिलेश यादव, मुख्यमंत्री, उ.प्र.

घूसखोरो के साथ खड़े एसपी

एसपी अब्दुल हमीद से पत्रकार की मां गुहार करती रही कि उसके पति को पुलिस ने बेवजह पकड़ रखा है मगर उन्होंने कुछ नहीं किया। पहले भी फर्जी राज्यमंत्री इकबाल से बड़ी रकम लेने के आरोप एसपी पर लगते रहे हैं। एक बार तबादला होने के बाद अपनी जुगाड़ पर अब्दुल हमीद फिर बाराबंकी रूक गये।

लखनऊ। आखिर पत्रकार संतोष द्विवेदी की मां तड़प-तड़प कर मर गयी। जिन हत्यारों ने यह काम किया था, उन्हें बचाने की कोशिशे बाराबंकी के एसपी पुरजेार तरीके से कर रहे हैं। इस दिल दहलाने वाले कांड की पूरे देश में निंदा हो रही है। सीएम अखिलेश यादव ने घटना के मजिस्ट्रेटी जांच के आदेश दे दिये हैं, मगर विपक्ष इससे संतुष्टï नहीं है। वह एसपी को हटाने और दोषी पुलिसकर्मियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग कर रहा है।
बलात्कार करने में नाकाम बाराबंकी थाना कोठी के थानाध्यक्ष राय सिंह यादव और दारोगा अखिलेश राय ने पत्रकार संतोष द्विवेदी की मां नीतू द्विवेदी को पेट्रेाल छिडक़कर जला दिया था। जिसकी आज सुबह मौत हो गयी। नीतू द्विवेदी अपने पति राम नारायण को थाने से छुड़ाने गयी थी। पुलिस ने उसको छोडऩे के एवज में एक लाख रुपये मांगे जब नीतू ने इतने रुपये देने में असमर्थता जतायी तो पुलिस वाले उसके साथ बलात्कार करने की कोशिश में जुट गये।
नीतू द्विवेदी ने थानाध्यक्ष के कमरे से भागने की कोशिश की तो पुलिसकर्मियों ने उस पर पेट्रोल डालकर आग लगा दी। बेहद झुलसी हुई हालत में नीतू द्विवेदी ने डीएम के सामने बताया कि किस तरह पुलिस वालों ने उसको जला दिया। गंभीर हालत में इस महिला को लखनऊ लाया गया, जहां उसने आज सुबह दम तोड़ दिया।
बाराबंकी के एसपी ने मात्र इन पुलिसकर्मियों को निलबिंत किया। अभी तक उनकी गिरफ्तारी के को कोई ठोस प्रयास नहीं किये, बल्कि एसपी यह कहते हुए नजर आये कि यह महिला थाने के सामने जली है। जाहिर है जब जिले का सबसे बड़ा अफसर ऐसे बयान देगा तो पुलिसकर्मियों को भला गिरफ्तार कौन करेगा। आम आदमी पार्टी के प्रवक्ता वैभव माहेशवरी ने इस घटना की तीखी आलोचना करते हुए कहा है कि यह घटना पूरे सिस्टम के हालात बया करती है। उन्होंने कहा कि तत्काल इस मामले की न्यायिक जांच होने चाहिये और दोषी पुलिसकर्मियों की गिरफ्तारी के साथ एसपी को तत्काल बाराबंकी से हटाया जाना चाहिये।
उल्लेखनीय है बाराबंकी सपा के महासचिव अरविन्द सिंह का गोप का जिला है बाराबंकी में इसी तरह की घटना से उनकी भी बदनामी हो रही है। लोग जानना चाहते हैं कि एक बार तबादला होने के बाद एसपी को किन परिस्थिति में तबादला रद्द किया गया।

रिश्वत न मिलने पर दारोगा यशवंत सिंह ने बर्बाद कर दिया बेकसूर नौजवान को

बाराबंकी के राम सनेही घाट का प्रभाकर सहारा में एजेंट का काम करता था। सहारा कंपनी के काम कम होने से पहले ही उसने सबका रुपया वापस कर दिया था। एक दिन राम सेनही घाट के थानाध्यक्ष राजीव कुमार ने उसे बुलाया और कहा कि बहुत शिकायतें हैं तीस हजार रुपये दो वर्ना बंद कर दूंगा। रुपये देने पर उसकी कार सहित उसको बंद कर दिया गया। कई दिन तक उसके परिजन दौड़ते रहे और मानवधिकार आयोग से लेकर प्रमुख सचिव गृह से इसकी शिकायत की गयी। मौजूदा आईजी कानून व्यवस्था ने एसपी बाराबंकी को खुद फोन किया तब पांच दिन के बाद उसको छोड़ा गया। इसके बाद मानवधिकार की जांच में उस पर दबाव बनाया गया कि लिखकर दे दो कि कोई घूस नहीं ली गयी। उसने मना कर दिया। इसके बाद दारोग यशवंत सिंह ने लवलेश वर्मा नामक व्यक्ति को थाने बुलाकर उससे तहरीर ली कि प्रभाकर ने उससे तीस हजार रुपये लिये हैं इसके बाद न सिर्फ मुकदमा दर्ज किया बल्कि गांव में पोस्टर लगाने के साथ-साथ कुर्की के आदेश भी ले लिये। जबकि लवलेश वर्मा ने लिखकर दे दिया कि उसका प्रभाकर से कोई विवाद नहीं है। तो दारोगा यशवंत ने लवलेश को भी कुछ घंटे थाने में बंद कर दिया कि समझौते कैसे कर रहे हो। प्रभाकर और उसका परिवार अब पुलिस उत्पीडऩ से परेशान होकर आत्मदाह की धमकी की बात कर रहा है।

Pin It