तड़पता रहा मरीज, डॉक्टर करते रहे रेफर

आखिर में डॉक्टरों ने ठीक होने की बात कहकर भेजा घर

बहराइच का रहने वाला है 8 साल का देशराज, सिर में लगी थी चोट

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
Captureलखनऊ। पिछले 6 दिनों से देशराज के परिवार ने लखनऊ में इलाज के लिए एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल का चक्कर लगाया, पर इलाज के नाम पर रेफर स्लिप पकड़ाई गई। विवेकानंद पॉलीक्लीनिक हो या लोहिया अस्पताल। सबने गंभीर बताकर ट्रामा रेफर कर दिया और ट्रामा ने बच्चे को एडमिट न कर सीटी स्कैन कराकर बैरंग लौटा दिया। कह दिया बच्चा ठीक है, जबकि बच्चे ने छह दिन से कुछ खाया-पीया नहीं है। देशराज छह दिनों से बेहोशी की हालत में है।
शहर के सभी सरकारी अस्पताल मरीजों को बेहतर सुविधा देने का दावा करते हैं पर वास्तविकता इससे परे है। अक्सर मरीजों को टरकाने के मामले सामने आते रहते हैं। गंभीर मरीज भी एडमिट नहीं किए जाते।
बहराइच जिले के गौरिया गांव निवासी 8 वर्षीय देशराज 19 जून को पेड़ से नीचे गिरने से सिर में चोट लगने से बेहोश हो गया था। परिजनों ने उसे बहराइच जिला अस्पताल में भर्ती कराया। दो दिन बाद 21 जून को अस्पताल ने बच्चे को ट्रॉमा रेफर कर दिया, लेकिन बच्चे के परिजनों ने उसे ट्रॉमा न ले जाकर लखनऊ में एक प्राइवेट अस्पताल में भर्ती करा दिया। अगले दिन डॉक्टर ने बच्चे की स्थिति गंभीर बताकर ट्रामा रेफर कर दिया। परिवार वाले ट्रामा न ले जाकर विवेकानंद पॉलीक्लीनिक ले गए। वहां के भी डॉक्टरों ने उसे ट्रॉमा ले जाने के लिए कहा। उसके बाद भी परिजन ट्रॉमा न ले जाकर 25 जून को लोहिया अस्पताल ले गये जहां पर डॉक्टरों ने बच्चे को भर्ती करने से मना कर दिया। काफी देर तक बच्चा अस्पताल के बाहर जमीन में तड़पता रहा लेकिन डॉक्टरों ने एक न सुनी। अस्पताल के बाहर बच्चे को देखने के लिए काफी भीड़ इक_ïी हो गई। उसके बाद मीडिया के दबाव में डॉक्टरों ने बच्चे को इमरजेंसी में भर्ती कर लिया लेकिन ईलाज करने में अक्षमता दिखाई। परिजनों के मुताबिक डॉक्टरों का कहना था कि अस्पताल में न्यूरोसर्जिकल जांच की मशीन नहीं है, इसलिए बच्चे को ट्रॉमा ले जाना पड़ेगा। थक हारकर देशराज को लेकर उसके परिजन देर रात ट्रामा पहुंचे। वहां भी काफी मशक्कत के बाद डाक्टरों ने एक्सरे व अल्ट्रासाउण्ड कराया। जब सीटी स्कैन की बारी आई तो मशीन खराब होने की बात की गई। दो घंटे इंतजार के बाद सीटी स्कैन हुआ। बच्चे के चाचा रामनरेश मौर्या ने बताया कि रिपोर्ट देखने के बाद डाक्टरों ने बच्चे को ले जाने के लिए कहा। डाक्टर बोले कि बच्चा एकदम ठीक है। श्री मौर्या ने कहा कि यदि बच्चा ठीक है तो वह बेहोश क्यों हैं? आखिर सारे अस्पताल के डॉक्टरों ने गंभीर बताकर ट्रामा क्यों रेफर किया? उन्होंने कहा हम लोग इसीलिए ट्रामा सेंटर नहीं ला रहे थे। इसके पहले भी हमारे घर के एक मरीज को लेकर आए थे तो बहुत लापरवाही बरती गई थी जिसकी वजह से उसकी मृत्यु हो गई थी। यहां बहुत लापरवाही बरती जाती है। इस संबंध ट्रामा इंचार्ज डा.एस.एन. शंखवार ने कहा कि मैं छुट्टïी पर हूं। इसके बारे में मुझे कोई जानकारी नहीं है।

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