तकलीफ से निजात दिलाना ही मकसद

Capture4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। आज डाक्टरों की प्रतिष्ठ पर प्रश्नचिन्ह लग रहा है कि वे पैसे को ज्यादा महत्व देते है लेकिन कुछ डाक्टरों की वजह से सब पर यह नहीं लागू होता। बहुत से ऐसे डाक्टर है जिनका मकसद आज भी मरीज की जिंदगी बचाना है। कराहते मरीज को दर्द से निजात दिलाना है। दिन-रात के अथक प्रयास से जब मरीज को आराम मिलता है तो उनकी थकान दूर हो जाती है। ऐसे ही नहीं लोग उन्हें भगवान कहते है। आज भी जब हमारे किसी अपने को कोई तकलीफ होती है तो हमारी सारी उम्मीदें डाक्टर से ही होती है, जब वो निराश होते है तब हम भगवान को याद करते है। आज वल्र्ड डाक्टर डे है और इस मौके पर शहर के कुछ डाक्टरों से बातचीत कर उनके अनुभव से रूबरू हुए।

आज लोगों का नजरियां डाक्टरों के प्रति बदला है। कुछ डाक्टरों की संवदेना मर गयी है। बाकी आज भी मरीज की सेवा को ही अपना धर्म मानते है। डाक्टर को लालच न कर अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन करना चाहिए। मैं 45 साल से इस पेशे में हूं। भारत में न्यूरों के मरीजों की संख्या जिस रफ्तार से बढ़ रही है उस हिसाब सुविधाएं नहीं है। मिरगी बीमारी है, जिसका इलाज संभव है, मगर हमारे देश में गलत भ्रांतियां हैं। किसी लडक़ी के बारे में पता चल जाए तो उसकी शादी नहीं होती। हम तो दो स्तर पर काम करते है। इलाज तो करते ही है साथ ही लोगों को जागरूक भी करते है कि यह बीमारी लाइलाज नहीं है। सभी डाक्टरों को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी तभी जाकर लोगों का उन पर विश्वास लौटेगा।

प्रो. ए.के. ठक्कर, विभागाध्यक्ष न्यूरो, राममनोहर लोहिया इंस्टीट्यूट
डॉक्टर और मरीज के बीच विश्वास का संबंध होता है। जब तक मरीज डाक्टर पर विश्वास नहीं करेगा उसे खुद में बदलाव नहीं दिखेगा। डाक्टर को धरती का भगवान कहा जाता है लेकिन जिंदगी और मौत उनके हाथ में नही हैं। कई बार ऐसी स्थिति आती है कि डाक्टर भी मजबूर हो जाता है। ऐसी स्थिति में मरीज को भी डाक्टर पर विश्वास दिखाना चाहिए। अक्सर देखने को मिलता है कि मरीज की मौत के बाद डॉक्टरों पर दोषारोपण किया जाता है जोकि गलत है। हां कभी-कभी किसी डाक्टर से लापरवाही हो सकती है, लेकिन यह आरोप सब पर नहीं लगाना चाहिए। आज डॉक्टर्स डे है। सभी डाक्टरों का दायित्व है कि मरीजों की तकलीफ समझे। समय से इलाज करें। लालच न करें।

– डॉ. वेद, डिप्टी सीएमएस, केजीएमयू

डॉक्टरों को समर्पित भाव से अपने कार्य को करना चाहिये। इस पेशे में संवेदनशीलता का होना बहुत जरूरी है। जब मरीज ठीक हो जाता है, तो उसकी ओर से ढेरों दुआयें डॉक्टरों को मिलती हैं। यही उसकी सबसे बड़ी पूंजी है।-डॉ. विजय कुमार, चिकित्सा अधीक्षक

डॉक्टरों को अपने कार्य के प्रति संवेदनशील एवं समर्पित भाव से काम करना चाहिए। चिकित्सा सेवा के कार्य को समाज सेवा के रूप में देखना चाहिये। मरीजों के प्रति सहानुभूति आवश्यक है। डॉक्टर मरीज को ठीक करने का पूरा प्रयास करते हैं। हां कुछ झोलाछाप डॉक्टरों ने इस पवित्र पेशे को बदनाम करने का प्रयास किया है।– डॉ. आरसी अग्रवाल, सीएमएस, लोहिया अस्पताल

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