तंजील हत्याकांड: क्या सीएम की डांट का इंतजार कर रहे थे यूपी पुलिस के आला अफसर

एक होनहार अफसर सरेआम मार दिया गया, मगर यूपी के आला अफसरों के मुंह से नहीं निकला एक भी शब्द विदेश गए सीएम ने फटकारा तो डीजीपी ने संभाली खुद कमान, घटना के चौथे दिन पहुंच रहे हैं एडीजी , कानून व्यवस्थाचार दिन बाद भी खाली हाथ है पुलिस, क्या यूपी में सक्रिय हो रहे हैं आतंकी, पठानकोट हमले की जांच को आई टीम के साथ सक्रिय थे तंजील अहमद, तो क्या टीम में शामिल आईएसआई अफसर की आंख में खटक गए तंजील अहमद, भाजपा ने राज्यपाल से कहा कि तंजील की हत्या के बाद सक्रिय होने की जगह सार्वजनिक स्थान पर डीजीपी के बराबर में बैठकर बीयर पी रहे थे पुलिस के आला अफसर, आला अफसरों के खुलेआम बीयर पीने की घटना का राज्यपाल ने लिया संज्ञान, मुख्य सचिव से मांगी रिपोर्ट

SDA14पीएम न्यूज़ नेटवर्क

लखनऊ। एनआईए के एक होनहार अफसर की मौत ने जहां पूरे देश की खुफिया एजेंसी को सकते में डाल दिया वहीं यूपी के आला अफसरों को लगता है कि इस अफसर की मौत से कोई खास फर्क नहीं पड़ा। जिस समय पूरे देश की मीडिया में तंजील की मौत को लेकर हंगामा मचा हुआ था और देश भर की खुफिया एजेंसी इसकी पड़ताल में जुट गई थी, उस समय यूपी के काबिल पुलिस अफसर बीयर और क्रिकेट मैच में व्यस्त थे। विदेश गए मुख्यमंत्री को जब इसकी जानकारी हुई तो उन्होंने डीजीपी जावीद अहमद से अपनी कड़ी नाराजगी व्यक्त की और उसके बाद पुलिस महकमें में हडक़ंप मचा। आज एडीजी कानून व्यवस्था दलजीत चौधरी बिजनौर पहुंच रहे हैं जहां वह इस हत्याकांड के सिरे को जानने की कोशिश करेंगे। सवाल यह है कि क्या यूपी पुलिस को सीएम की डांट का ही इंतजार था। उधर इस हत्याकांड के बाद यह साफ हो गया है कि यूपी में आतंकी अपना नेटवर्क तैयार करने की नापाक कोशिशें करने में जुट गए हैं।
खुफिया एजेंसी इस हत्याकांड में खासतौर से पाकिस्तान समर्थित आतंकी गुटों के शामिल होने की संभावना पर भी काम कर रही है। पिछले दिनों पठानकोट हमले की जांच को जो दल भारत आया था। तंजील अहमद खासतौर से उस ग्रुप के साथ सक्रिय थे। उर्दू और अंग्रेजी का खासा ज्ञान रखने वाले तंजील ने इस ग्रुप के सामने भी कई ऐसी बातें रखी जिससे साबित होता था कि इस आतंकी हमले में पाकिस्तान का हाथ है। इस जांच दल में आईएसआई का एक तेज तर्रार अफसर ले. कर्नल तनवीर अहमद भी शामिल था। खुफिया एजेंसी इस बात की भी पड़ताल कर रही हैं कि कहीं तनवीर अहमद ने भी यह इशारा तो नहीं किया कि तंजील को रास्ते से हटाया जाए।
एनआईए इस बात की भी पड़ताल कर रही है कि उसके और कौन-कौन से अफसर निशाने पर हैं। तंजील अहमद अपनी भांजी की शादी से लौट रहे थे तभी उन्हें निशाना बनाया गया। इस शादी में एनआईए के दो और अफसरों को भी शामिल होना था। जाहिर है अगर यह अफसर यहां आए होते तो इस बात की संभावना थी कि वह तंजील के साथ होते। खुफिया एजेंसी इस बात की भी जांच में जुटी हैं कि तंजील के साथ कहीं कुछ और अफसरों को मारने की साजिश तो नहीं थी।

इस हत्याकांड ने एक बार फिर सभी खुफिया एजेंसियों को नए सिरे से रणनीति बनाने पर मजबूर कर दिया है। खुफिया एजेंसी सघनता से इस बात की पड़ताल कर रही हैं कि जिस तरह के हथियारों का इस हत्याकांड में इस्तेमाल हुआ वह किन-किन लोगों या आतंकियों के पास हो सकते हैं, जाहिर है तंजील की मौत के रहस्य से जब तक पर्दा नहीं उठेगा तब तक खुफिया एजेंसियों की नींद हराम रहेगी।

क्या यूपी बन रहा है आतंकियों का नया ठिकाना
बिजनौर में जिस तरह एनआईए के अफसर को मार दिया गया उसके बाद एक बात पुख्ता होती जा रही है कि उत्तर प्रदेश में आतंकी धीरे-धीरे अपनी जडं़े मजबूत करते जा रहे हैं। बिजनौर में पहले भी धमाका करके सिमी के आतंकी फरार हो चुके हैं। इन आतंकियों ने बिजनौर में कई दिन रहकर अपने कुछ सूत्र बढ़ाए थे और कोशिश की थी कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में आतंकियों की पनाह के लिए कुछ और ठिकाने बन सके। बिजनौर के निवासी होने के कारण तंजील इस नेटवर्क को तोडऩे में खासे सक्रिय थे। पिछले दिनों जब यह रिपोर्ट आई थी कि आईएसआईएस देश में अपनी जड़े जमाना चाहता है तो उस रिपोर्ट पर भी तंजील ने काम किया था। इससे पहले आजमगढ़ भी खुफिया एजेंसियों के रडार पर रहा है। कुछ दिन पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपना बनारस दौरा भी खुफियां विभाग की उस रिपोर्ट के बाद निरस्त कर दिया था, जिसमें कहा गया था कि आतंकी पीएम पर हमला करने के लिए बनारस पहुंच गए हैं।

कैंट स्थित पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग का दफ्तर नशे का अड्डा बन गया है। दफ्तर के अंदर और बाहर खुलेआम लोग गांजा और सुल्फा पी रहे हैं। नशे में धुत यह लोग रास्ता चलते लोगों पर भी छींटाकशी करते रहते हैं, मगर पुलिस को यह सब दिखाई नहीं देता -फोटो सुमित कुमार

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