ड्रैक समीकरण और अरबों ग्रहों पर जीवन की संभावना

 बालेन्दु शर्मा दाधीच
डॉ. फ्रेंक ड्रैक के बहुचर्चित समीकरण के आधार पर देखा जाए तो हमारी आकाशगंगा में ही कम से कम दस हजार ग्रहों पर जीवन के अनुकूल परिस्थितियां मौजूद हैं। उधर हबल अंतरिक्षीय दूरबीन के अन्वेषण के आधार पर निष्कर्ष निकाला गया है कि ब्रह्मांड में करीब 125 अरब आकाशगंगाएं हैं। एक अनुमान के अनुसार, इन आकाशगंगाओं में मौजूद सूर्यों में से दस प्रतिशत के पास भी अपने सौरमंडल विद्यमान हों तो अंतरिक्ष में कम से कम 6.25 गुणा 10 घात 18 सौरमंडल मौजूद होंगे। और अगर इन सौरमंडलों के कुल ग्रहों के एक अरबवें हिस्से पर भी जीवन संभव हुआ तो अंतरिक्ष में 6.25 अरब ग्रहों पर चलते-फिरते प्राणी मौजूद होने चाहिए!

तो फिर हमारा क्या होगा?
स्वाभाविक है, इतने सारे ग्रहों के समूह में बुद्धिमान, सक्षम, सबल, वैज्ञानिक क्षमताओं वाले प्राणियों की मौजूदगी से युक्त ग्रहों की संख्या भी अच्छी खासी होगी। प्रसिद्ध वैज्ञानिक स्टीफन हाकिंग का संकेत साफ है कि यदि हमसे उन्नत प्रजाति वाले प्राणी धरती पर आते हैं तो वे धरती पर तबाही भी मचा सकते हैं। वे हमसे उसी तरह से पेश आ सकते हैं जैसे हम पशु-पक्षियों और अन्य प्राणियों के साथ पेश आते हैं, उन्हें मारने में भी संकोच नहीं करते। बहुत से वैज्ञानिक इस बात से असहमत हैं। वे मानते हैं कि यदि किसी ग्रह पर कोई सभ्यता इतने आधुनिक स्तर तक विकसित हो चुकी है तो वह विध्वंसक किस्म की नहीं हो सकती। स्थायित्व के मौजूदा बिंदु तक पहुंचने के लिए उसने संघर्ष का लंबा इतिहास झेला होगा और अब वह काफी हद तक लोकतांत्रिक और उदार हो चुकी होगी।

25 हजार साल में पहुंचेगा संदेश!
सामान्य परिस्थितियों में विभिन्न सौरमंडलों के बीच हजारों प्रकाशवर्षों की दूरी तय करना आसान नहीं है। फिर बहुत बड़े समूह में, अपने सारे संसाधनों और हथियारों के साथ हमारे ग्रह पर आना और उस पर आधिपत्य जमा लेना भी अव्यावहारिक प्रतीत होता है। यदि किसी ग्रह के प्राणी धरती की ओर कूच करते हैं तो वे ऐसा तभी कर सकते हैं जब उन्होंने हजारों साल पहले ही हमारे ग्रह को संसाधनों का अनुमान लगा लिया हो। यदि आज की धरती उन्हें लुभाती है तो फिर यहां तक पहुंचने में उन्हें भविष्य में हजारों, या लाखों वर्ष लगेंगे।
इस संदर्भ में सर्च फॉर एक्स्ट्रा टेरेस्ट्रियल इन्टेलीजेंस (सेटी) नामक संगठन का उदाहरण देना समीचीन होगा जो पांच दशकों से अंतरिक्ष में संकेत भेजने और अन्य ग्रहों के संभावित प्राणियों के रेडियो संकेत रिसीव करने की कोशिश में जुटा है। उसकी ओर से सन 1974 में भेजा गया प्रसिद्ध ‘आरेसिबो मैसेज’ हमसे लगभग 25 हजार प्रकाश वर्ष की दूरी पर स्थित एम 13 सितारा समूह को लक्ष्य बनाकर भेजा गया था जो 25 हजार वर्ष बाद ही वहां पहुंच सकेगा। यदि इसका उत्तर भी आया तो उसमें और 25 हजार वर्ष लगेंगे। अलबत्ता, यदि कोई एलियन्स प्रकाश की गति से भी कई गुना तेज गति से यात्रा करने में सक्षम हो तो कुछ कहा नहीं जा सकता।

कितने सभ्य और उदार होंगे एलियन्स?
एलियन्स से सभ्य और उदार होने की उम्मीद भी सवालों के घेरे में है। ‘नेचर’ पत्रिका ने अक्तूबर 2006 में लिखा था- यह धारणा बनाने का कोई आधार नहीं है कि अंतरिक्ष में मौजूद सभी परामानवीय सभ्यताएं निष्क्रिय ही होंगी। और उनमें से किसी एक निष्क्रिय सभ्यता के साथ भी इंसानी संपर्क होता है तो वह विध्वंसक न हो, यह जरूरी नहीं। सेटी के नक्षत्रभौतिकीविद् पॉल डेविस ने भी तो कुछ कुछ ऐसा ही कहा है। यदि कोई एलियन्स बुद्धिमान और ज्ञानी हैं, तो वे शांतिपूर्ण भी होंगे, यह जरूरी नहीं। हम जिस अंदाज में सोचते हैं, उसी तरह की अपेक्षा एलियन्स से नहीं कर सकते। आखिरकार वे एलियन हैं। जिसे हम शांतिपूर्ण मानते हैं, वह उनकी दृष्टि में हिंसक हो सकता है। हम इंसानी विचारों को उनके दिमाग में नहीं डाल सकते। उनके बारे में किसी भी तरह का अनुमान लगाना बहुत खतरनाक हो सकता है।
कार्ल सैगन अन्य ग्रहों पर जीवन को बैक्टीरिया के रूप में देखते हैं। कुछ अन्य वैज्ञानिक मानते हैं कि परग्रहीय प्राणी रेंग कर चलने वाले हो सकते हैं। लेकिन इस अनंत ब्रह्मांड में हमारे जैसे या हमसे बेहतर प्राणियों के अस्तित्व की संभावना (या आशंका) भी उतनी ही मजबूत है। हमारे अपने सौर मंडल में शुक्र, मंगल, बृहस्पति और शनि के चंद्रमाओं (यूरोपा, टाइटन आदि) पर जीवन की थोड़ी-बहुत संभावना जाहिर की जाती रही है। नासा भी कह चुका है कि मंगल की सतह का अन्वेषण करने वाले रोवर्स- अपोर्च्यूनिटी और स्पिरटि ने वहां सल्फेट खनिजों का पता लगाया है जो उस ग्रह पर जल की मौजूदगी की ओर संकेत करता है। लेख का अंत एक और प्रतिप्रश्न से- अगर हम एलियन्स का ध्यान खींचना बंद कर दें तो क्या स्थिति बदल जाएगी? यदि वे विज्ञान और तकनीक की दृष्टि से बहुत आगे जा चुके हैं तो क्या वे पहले ही हमें खोज नहीं चुके होंगे? आखिरकार किसी भी ग्रह से कोई संदेश या संकेत न मिलने के बावजूद हम इंसान भी तो उन्हें ढूंढ निकालने पर आमादा हैं!

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