डेंगू से 32 मौतों के बाद भी लोहिया अस्पताल नहीं ले रहा सबक

  • बेड खाली होने के बाद भी डेंगू के मरीजों को भर्ती होने के लिए करना पड़ रहा इंतजार

 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
Capture 8लखनऊ। राजधानी में डेंगू के कहर से 32 जानें जा चुकी हैं। इसके बाद भी डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल सबक नहीं ले रहा है। वार्डों में बेड खाली होने के बाद भी इमरजेन्सी में मरीजों को भर्ती होने के लिए घंटों इंतजार करना पड़ रहा। वहीं डॉक्टर मरीजों को पर्चे पर दवा लिखने भर से अपने काम की इतिश्री कर रहे हैं। अस्पताल प्रशासन के ढुलमुल रवैये के चलते मरीजों की जान आफत में है।
इन्दिरा नगर निवासी अली मोहम्मद की पत्नी निगार को पिछले काफी दिनों से बुखार आ रहा था। वह लोहिया अस्पताल के डॉ. एससी.मौर्या अपनी पत्नी का इलाज करा रहे थे। सोमवार को कार्ड जांच के दौरान मरीज में डेंगू की पुष्टिï हुयी। मंगलवार को हालत में सुधार न होने के चलते मरीज को इमरजेन्सी में भर्ती करने के लिए तीन घंटे इंतजार करना पड़ा। मरीज के पति अली मोहम्मद ने बताया कि इमरजेन्सी में मौजूद कर्मचारियों ने बेड खाली न होने के चलते भर्ती होने के लिए इंतजार करने के लिए कहा है।

मरीजों की जान पर आफत

लोहिया अस्पताल में इलाज के लिए आये मरीजों के लिए बुखार आफत बन कर टूट रहा है। हालात यह है कि बुखार पीडि़त मरीजों की भारी संख्या तथा अस्पताल में उचित व्यवस्था न होने के कारण गम्भीर रोग से पीडि़त मरीजों को इलाज के लिए घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। फैजाबाद निवासी संतराम पीलिया रोग से पीडि़त हैं। पिछले दो दिनों से अस्पताल में इलाज कराने के लिए धक्के खा रहे थे। मंगलवार को चिकित्सक ने देखने के बाद खून की जांच के लिए भेजा, लेकिन रजिस्टे्रशन काउंटर पर बुखार से पीडि़त मरीजों की लम्बी लाइन के चलते रजिस्ट्रेशन नहीं करा सके। बाद में थकहार कर वहीं फर्श पर लेट गये। इनके अलावा इन्दिरानगर स्थित इस्माइल गंज निवासी जितेन्द्र साहू सांस के रोग से पीडि़त होने के बाद इलाज के लिए लोहिया अस्पताल पंहुचे थे। ये भी मरीजों की भारी भीड़ के चलते घंटों इलाज का इंतजार करने के बाद थककर जमीन में लेट गये और बाद में बगैर इलाज ही वापस लौट गये।

लोहिया में व्यवस्था चरमराई

अस्पताल की सफाई व्यवस्था का आलम यहां के प्रशासनिक सुस्ती का आईना दिखा रहा है। आलम यह है कि चिकित्सा अधीक्षक डॉ.एमएल.भार्गव के कमरे के पीेछे पानी भरा हुआ है। इसके अलावा दवा वितरण काउंटर के दरवाज के पास ही जलभराव हो रहा है। स्थिति देख कर तो ऐसा प्रतीत होता है कि महीनों से यहां साफ-सफाई ही नहीं की गयी है।

डेंगू ने ली दो और जिंदगियां

राजधानी में डेंगू की गिरफ्त में आने से मंगलवार को भी दो मरीजों की मौत हो गई है। लेकिन चिकित्सा स्वास्थ्य विभाग अभी भी इस बीमारी से होने वाली मौतों को झुठलाने में लगा हुआ है। स्वास्थ्य विभाग लगातार आकड़ों को छुपा रहा है उसकी मंशा क्या है यह किसी के समझ में नहीं आ रहा है। मोहनलालगंज क्षेत्र के पदमीनखेड़ा निवासी 45 वर्षीय सुन्दरा को कई दिनों से बुखार था। उन्हें राजधानी के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां मंगलवार को उनकी मौत हो गई। महिला की मौत के बाद क्षेत्र में इस बीमारी से मरने वाले मरीजों की संख्या 8 के करीब पहुंच गई है। क्षेत्र में अभी भी कई लोग इस बीमारी की चपेट में हैं। वहीं दूसरी ओर इस बीमारी की गिरफ्त में आए बाराबंकी के एक सिपाही जगन्नाथ की मौत हो गई। सिपाही भी कई दिनों से बुखार से पीडि़त था। जांच डेंगू की पुष्टि हुई थी, जिसके बाद एक निजी अस्पताल में इलाज चल रहा था।

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