डीएम साहब! आप भी देखिये ऐसे होता है आपदा प्रबंधन

आपदा प्रबंधन विभाग में तैनात बड़े बाबू दिन भर खेलते हैं ताश

Captureविभाग में लंबित फाइलों की संख्या 150 से अधिक

प्रभात तिवारी
लखनऊ। जिलाधिकारी राजशेखर भले ही लंबित फाइलों का गुणवत्ता परक निस्तारण करवाने और कर्मचारियों को ईमानदारी पूर्वक काम करने का निर्देश देते रहते हों लेकिन कलेक्ट्रेट में बैठने वाले कुछ कर्मचारी अपनी मर्जी के मालिक हैं। इनका मन सरकारी कामकाज में बिल्कुल भी नहीं लगता। वे सारा दिन कार्यालय में बैठकर कम्प्यूटर पर ताश की पत्तियां खेलते रहते हैं। अपने इसी शौक के कारण आजकल आपदा प्रबंधन विभाग में तैनात बड़े बाबू अयोध्या प्रसाद वर्मा भी चर्चा में हैं। देर सबेर आफिस पहुंचने के तुरंत बाद कम्प्यूटर पर गेम खेलना उनका शगल बन चुका है। इस कारण कार्यालय में लंबित फाइलों की संख्या लगातार बढ़ रही है। आलम ये है कि लंबित फाइलों के संबध में लगातार शासन से रिमाइंडर भेजा जा रहा है। इसके बावजूद बड़े बाबू के कान पर जूं नहीं रेंग रही है।
जिलाधिकारी कार्यालय स्थित कक्ष संख्या 53 में आपदा प्रबंधन विभाग का जोनल कार्यालय है। यहां गरीबों और किसानों के हित से जुड़ी दर्जनों फाइलें रोजाना आती रहती हैं। इतना ही नहीं विभाग में सूखाग्रस्त क्षेत्रों, बाढग़्रस्त क्षेत्रों और ओलावृष्टि से प्रभावित क्षेत्रों की रिपोर्ट तैयार की जाती है। इसके साथ ही भूकंप और अन्य दैवीय आपदा में होने वाले नुकसान का लेखा-जोखा भी तैयार होता है। जिले की पांचों तहसीलों से शासन के निर्देशानुसार रिपोर्ट मंगवाना और उनको क्रमानुसार तैयार कर शासन को भेजने का काम होता है। इसलिए कार्यालय में हमेशा वरिष्ठ और योग्य बाबू की तैनाती की जाती है। लेकिन अगस्त में आपदा प्रबंधन विभाग में बड़े बाबू का कार्यभार ग्रहण करने वाले एपी वर्मा वरिष्ठ तो हैं, लेकिन काम के प्रति गंभीरता और शायद काम करने की इच्छा शक्ति बिल्कुल भी नहीं है। इसी वजह से ऑफिस टाइम में खुलेआम ताश खेलना और शिकायतकर्ताओं की समस्या खुद सुनने की बजाय अपने अधीनस्थ के पास भेजने की आदत पड़ चुकी है। इनको विभाग में होने वाले किसी भी काम-काज और उससे संबंधित आं$$कड़े की जानकारी नहीं है। ओलावृष्टि में बांटी गई धनराशि हो या क्षेत्र में आर्थिक तंगी के कारण मरने वाले किसान से संबंधित रिपोर्ट किसी की भी जानकारी नहीं है।
आपदा प्रबंधन पर सालाना करोड़ों रुपये का खर्च

सरकार आपदा प्रभावित क्षेत्रों व उनमें रखने वाले लोगों को आर्थिक क्षति दिलाने और आपदा से बचाव पर सालाना करोड़ो रुपये की धनराशि खर्च करती है। इस धनराशि का लेखा-जोखा आपदा प्रबंधन विभाग के बाबू को ही तैयार करना होता है। इसमें आपदा से बचाव के उपकरणों की खरीद, आपदा से निपटने का प्रशिक्षण और आपदा के दौरान होने वाले नुकसान की क्षतिपूर्ति का सारा आंकड़ा भी शासन को भेजना होता है लेकिन महत्वपूर्ण स्थान पर बैठने के बावजूद ताश का शौकीन बाबू लापरवाही बरत रहा है। विभागीय अधिकारियों की मानें तो सत्ता में ऊपर तक पहुंच होने की वजह से बाबू को किसी भी अधिकारी की डांट फटकार और चेतावनी का असर नहीं पड़ता है।

अधीनस्थों के भरोसे हो रहा काम

आपदा प्रबंधन विभाग में तैनात बाबू का सारा काम अधीनस्थों के भरोसे होता है। जिले की पांचों तहसीलों और उनको सरकार की तरफ से आवंटित धनराशि का मामला हो या उपकरणों की खरीद से संबंधित आंकड़ा सब कुछ अधीनस्थ कर्मचारियों से तैयार करवाया जाता है। हाल ही में मुख्य सचिव की वीडियो कांफ्रेंसिंग के दौरान मांगे गये आंकड़ों की फाइल तैयार करवाने में आपदा प्रबंधन विभाग के जोनल प्रभारी और अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व ने पूर्व में कार्यालय में तैनात बाबू सतानन्द मिश्रा का सहयोग लिया था। तब जाकर फाइलें कंप्लीट हो पाईं। इसी प्रकार विभाग से जुड़े अन्य छोटे बड़े मामलों में भी पूर्व में तैनात बड़े बाबू और अधीनस्थ कर्मचारी का सहयोग लेना मजबूरी बन गई है।

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