डायटम टेस्ट : डूब कर मरने वालों का पुलिस नहीं कराती डॉयटम टेस्ट

  • थाना प्रभारी और विवेचकों को भी नहीं पता क्या होता है डॉयटम टेस्ट
  • पानी में डूबने से होती है मौत की पुष्टि

 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। राजधानी में पुलिस डूब कर मरने वालों का डॉयटम टेस्ट नहीं कराती या यह कहें कि पुलिस के आला अधिकारियों को इसकी जानकारी नहीं है। आए दिन डूब कर मरने वालों की खबरें आती हैं। इनकी मौत पर पुलिस पोस्टमॉर्टम के लिए शवों को भेजने के बाद जांच की बात कह कर अपना पीछा छुड़ा लेती है, लेकिन उनकी मौत पानी में डूबने के कारण से होती है या अन्य किसी कारण से, इसकी जानकारी परिजनों को नहीं मिल पाती है और न ही पुलिस जानकारी करने के लिए कोई कदम बढ़ाती है। कभी-कभी कुछ मामलों का पुलिस पर्दाफाश करती है लेकिन वह पर्दाफाश परिजनों के लगाए गए आरोपों के कारण संदेह में आए व्यक्ति को पकडक़र मामले की इतिश्री कर लेती है। जबकि हकीकत यह है कि पानी में डूब कर मरने वालों का यदि पुलिस डॉयटम टेस्ट कराने लगे तो हकीकत सामने आ जाएगी कि व्यक्ति की मौत पानी में डूबने के कारण हुई है या फिर किसी ने उसकी हत्या कर शव को पानी में फेंका है।

क्या होता है डॉयटम टेस्ट
चिकित्सकों के मुताबिक सभी तालाब, झील, नहरों के पानी में एक डॉयटम नाम का पदार्थ पाया जाता है। यदि पानी में किसी व्यक्ति की डूब कर मौत होती है तो वह व्यक्ति सांस नहीं ले पाता है। इसके कारण गले और अन्य रास्तों के माध्यम से शरीर के अंदर पानी प्रवेश करता है। जहां थोड़ी देर बाद व्यक्ति का ब्लड सर्कुलेशन बंद हो जाता है और उसकी मौत हो जाती है। इस प्रतिक्रिया में मृतक के शरीर में डॉयटम पाया जाता है। जबकि किसी की हत्या कर शव को पानी में फेंका जाता है तो उसके अंदर डॉयटम नहीं पाया जाता है।

केस नम्बर एक
छह सितम्बर 2014- बंथरा थाना क्षेत्र के हरौनी गांव निवासी प्रवीण सिंह के बाबा का श्राद्ध था। परिवार के सभी लोग श्राद्ध कराने के कामकाज में लगे हुए थे इसी दौरान प्रवीण का इकलौता 13 वर्षीय बेटा सचिन अपने चचेरे हम उम्र भाई यश के साथ घर से बाहर घूमने चला गया। काफी देर तक जब दोनों बालक घर वापस नही लौटे तो परिजनों ने उनकी तलाश की। जहां गांव के बाहर स्थित झाड़ेश्वर मंदिर के पीछे सई नदी पर पहुंचे तो देखा कि नदी के किनारे यश व सचिन के कपड़े व चप्पलें रखी हुई हैं। जबकि वह दोनों वहां दिखाई नहीं दे रहे है। ग्रामीणों ने सई नदी में दोनों बालकों की तलाश शुरू की तो दोनों के शव पानी से बरामद हुए थे। परिजनों ने हत्या की आशंका जताई थी लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।

केस नम्बर दो
नौ अक्टूबर 2014- चिनहट पुलिस को बुधवार देर शाम सूचना मिली थी कि एक युवक कठौता झील में डूब गया है। मौके पर पहुंचने पर पुलिस को सूचनाकर्ता संतोष ने बताया था कि कुछ युवक कठौता झील के किनारे खड़े होकर कस्बा स्थित छोहारिया माता मंदिर निवासी अरुण वर्मा के डूबने की बात कर रहे थे। पुलिस ने जब अरुण के परिजनों से उसका पता लगाया तो पता चला कि अरुण बुधवार दोपहर से ही गायब है। और उसका मोबाइल बंद है। झील किनारे अरुण की चप्पले पड़ी हुयी थीं। परिजनों द्वारा चप्पलों की शिनाख्त करने पर पुलिस ने गोताखोरों की मदद से देर रात उसको झील में ढ़ूढती रही थी। दूसरे दिन अरुण का शव बरामद हो गया। परिजनों ने हत्या की आशंका जताई थी लेकिन नतीजा सिफर

केस नम्बर तीन
15 जुलाई 2014-चिनहट के कठौता झील में विनम्र खंड एक निवासी विजय बाल्मीकि पुत्र राकेश बाल्मीकि का शव मिला। परिजनों ने हत्या की आशंका जताई थी लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।

केस नम्बर पांच
छह मई 2014- चिनहट के इंदिरानहर में दो छात्र स्नान के लिए गए हुए थे। जहां दोनों की डूबने से मौत की खबर सामने आई। दोनों की शिनाख्त 18 वर्षीय आकाश सागर पुत्र दीपचंद्र सागर और 18 वर्षीय नवीन चंद्र राय पुत्र गुलाब चंद्र राय के रूप में हुई। दोनों मैनेजमेंट के छात्र बताए जा रहे थे।

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