डाटा फीडिंग के नाम पर अवैध वसूली कर रही एजेंसी

एजेंसी के खिलाफ लामबंद हुए कोटेदार
जिला स्तर पर सुनवाई नहीं होने से कोटेदारों में नाराजगी
शासन में लिखित शिकायत करने जाएंगे कोटेदार

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। जिले में राशन कार्ड से संबंधित डाटा फीडिंग करने वाली एजेंसी कोटेदारों और कार्डधारकों से जबरन 10-15 रुपये प्रति फार्म की वसूली कर रही है। इस संबंध में क्षेत्रीय कार्याल और आपूर्ति कार्यालय में शिकायत की जा चुकी है लेकिन संबंधित एजेंसी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। इसलिए जिले के सभी कोटेदार डाटा फीडिंग करने वाली एजेंसी के खिलाफ लामबंद हो चुके हैं। डाटा फीडिंग की अवैध वसूली करने वाली संस्था के खिलाफ शासन स्तर पर शिकायत करने का निर्णय लिया है।
राजधानी में कार्डधारकों की कुल संख्या नौ लाख 92 है। इसमें एपीएल कार्ड धारकों की संख्या आठ लाख 25 हजार 602, बीपीएल कार्ड धारकों की संख्या 24 हजार 378 और अंत्योदय कार्ड धारकों की संख्या 50 हजार 112 है। आपूर्ति विभाग ने लखनऊ के सभी कार्ड धारकों से संबंधित डाटा आनलाइन फीड करने का काम विक्रम श्रीवास्तव की एजेंसी को दिया है। इस एजेंसी में पिछले डेढ़ महीने से रोजाना राशन कार्ड संबंधी आवेदन पत्र में मौजूद विवरण फीड करवाने वालों से प्रति फार्म 10-15 रुपये की वसूली की जा रही है। एजेंसी के कर्मचारी आपूर्ति विभाग के क्षेत्रीय कार्यालयों में बैठकर डाटा फीडिंग करने के दौरान भी कोटेदारों और कार्डधारकों से अवैध वसूली करते रहते हैं। इस बारे में क्षेत्रीय खाद्य अधिकारियों से शिकायत की जा चुकी है लेकिन सिर्फ आश्वासन मिला अधिकारियों ने अवैध वसूली करने वाली एजेंसी और उसके कर्मचारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। इसलिए लखनऊ के सभी कोटेदार लामबंद हो गये हैं, उन्होंने अवैध वसूली रुकने के बाद ही डाटा फीडिंग करवाने की बात कही है।
आंकड़ों पर गौर करें तो लखनऊ में कोटेदारों की कुल संख्या 1285 है। हर कोटेदार के क्षेत्र में औसतन 800 राशन कार्ड धारक हैं। आपूर्ति विभाग की तरफ से भरवाये गये फार्मों और आनलाइन फीडिंग प्रक्रिया में 60 प्रतिशत कार्ड धारकों के नाम, पता, लिंग, मतदाता पहचान पत्र संख्या और आधार नंबर संबंधी त्रुटियां हैं, जिनको दुरुस्त करवाने और डाटा फीडिंग का काम करवाने वाले लोगों से डाटा फीडिंग करने वाली एजेंसी प्रति फार्म 10-15 रुपये वसूल रही है। यदि एक कोटेदार 500 आवेदन पत्र का डाटा आनलाइन फीड करवाता है, तो उसको औसतन 5000 रुपये खर्च करने पड़ते हैं। यदि वह कार्ड धारकों से डाटा फीडिंग का खर्च मांगता है, तो कार्डधारकों के उल्टे सीधे आरोपों का सामना करना पड़ता है। इसी प्रकार यदि कार्ड धारक डाटा फीडिंग करवाने जाता है, तो उसको भी अवैध वसूली का सामना करना पड़ता है। जबकि डाटा फीडिंग करने वाली संस्था प्रशासन से तो फीडिंग का खर्च लेती ही है, ऊपर से कोटेदारों और कार्डधारकों से भी अवैध वसूली करती है। ऐसे में आम जनता और कोटेदार दोनों खुलेआम लूटे जा रहे हैं। आपूर्ति विभाग के अधिकारी सब कुछ देखकर भी अनदेखा कर रहे हैं। कोटेदार संघ के मदन गोपाल यादव के मुताबिक डाटा फीडिंग का काम करने वाली एजेंसी खुलेआम 10-15 रुपये की अवैध वसूली कर रही है। इसकी जानकारी आपूर्ति विभाग के अधिकारियों को भी है लेकिन वे चुप्पी साधे हुए हैं। ऐसे में कोटेदारों ने एकजुट होकर अवैध वसूली के खिलाफ लड़ाई लडऩे और शासन स्तर तक मामले की शिकायत करने का निर्णय लिया है।

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