डर जाते हैं लोकायुक्त

आखिर क्या मजबूरी है कि सरकार के ताकतवर मंत्रियों के सामने

 संजय शर्मा
लखनऊ। जिस समय लोकायुक्त एनके मेहरोत्रा ने यूपी के विवादित मंत्री गायत्री प्रजापति को क्लीन चिट दी थी, उसी समय सब समझ गये थे
कि आखिर लोकायुक्त की मजबूरी क्या है।

12 JUNE PAGE-1देश के ताकतवर बेइमान मंत्री और भ्रष्टï नौकरशाह जानते हैं कि लोकायुक्त की कुर्सी सरकार के रहमो करम पर बची हुई है इसलिए उनका कुछ बिगडऩे वाला नहीं है। यहीं कारण है कि लम्बे समय से किसी भी भ्रष्टï मंत्री के खिलाफ लोकायुक्त कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं कर सके हैं। इन ताकतवर लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने में लोकायुक्त श्री मेहरोत्रा को जिस तरह पसीने आ रहे हैं, उससे साफ है कि प्रदेश में मंत्री आराम से भ्रष्टïाचार का साम्राज्य खड़ा कर सकते हैं। कम से कम उन्हें लोकायुक्त से तो कोई खतरा नहीं है।
श्री मेहरोत्रा के पिछले कार्यकाल पर नजर डालें तो उनके व्यक्तित्व के कई पहलू सामने आते हैं जो बताते हैं कि आखिर श्री मेहरोत्रा ने अपनी नौकरी में किन-किन चीजों का ध्यान रखा।
इससे पूर्व हाईकोर्ट के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश जस्टिस मार्कंडेय काटजू ने 8 सिम्बर 2004 के आदेश द्वारा जस्टिस एनके मेहरोत्रा से अपने आदेशों में सुधार, त्रुटि निवारण जैसे सभी अधिकार वापस ले लिये गये थे, जो हाईकोर्ट के सभी जजों को रूटीन में प्राप्त होते हैं।
16 मार्च 2006 को श्री मेहरोत्रा को लोकायुक्त बनाया गया और बसपा सरकार में उनकी रिपोर्ट पर कई मत्रियों को हटाया गया। यह बात सार्वजनिक चर्चा में थी कि जस्टिस मेहरोत्रा बसपा के उन्हीं मत्रियों के खिलाफ तेजी से कार्रवाई कर रहे हैं जिनसे मायावती नाराज थी। बसपा के कई कद्दावर नेता तो निपट गये मगर नसीमुद्दीन जैसे नेता का कुछ नहीं बिगड़ा।
लोकायुक्त का कार्यकाल 6 साल का होता है। अखिलेश सरकार बनने के बाद फैसला करके लोकायुक्त के कार्यकाल 6 से 7 साल कर दिया गया। यहीं नहीं एक अनूठा प्रावधान भी डाल दिया गया कि जब तक नई नियुक्ति न हो जाए पुराने लोकायुक्त पद पर बने रहेंगे। जाहिर है सरकार लोकायुक्त एनके मेहरोत्रा पर अहसान कर रही थी और अब वक्त आ गया था कि जब जस्टिस मेहरोत्रा इस एहसान का बदला उतारते।
लोकायुक्त मेहरोत्रा ने इस एहसान का बदला उतार भी दिया। प्रापर्टी डीलर से मंत्री बने गायत्री प्रजापति की अरबों की सम्पत्ति लोकायुक्त को दिखाई नहीं दी। इसके बाद सपा के नेताओं पर जस्टिस मेहरोत्रा की कृपा बरसती रही। चाहे वह चन्दौसी की विधायक लक्ष्मी गौतम हो या झांसी के विधायक दीप नारायण यादव हो या फिर गायत्री प्रजापति के अलावा महबूब अली या फिर ब्रह्मïाशंकर त्रिपाठी।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर भी प्रदेश में नया लोकायुक्त नहीं बनाया गया। अब राज्यपाल ने राष्टï्रपति और प्रधानमंत्री को इसकी जानकारी दे दी है। अब देखना यह है कि प्रदेश को नया लोकायुक्त मिलेगा अथवा श्री मेहरोत्रा पर ही मेहरबानी कायम रहेगी।

दागदार दामन

– 9 मई 2003 ये वह तारीख है जिस दिन मधुमिता शुक्ला की हत्या हुई।
– 29 अप्रैल 2004 इस हत्याकांड के मुख्य अभियुक्त अमरमणि त्रिपाठी को हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच से जमानत मिली।
-26 सितम्बर 2005 वह तारीख है जब सीबीआई के जमानत रद्द करने के अनुरोध पर सुप्रीम कोर्ट ने न सिर्फ जमानत रद्द की बल्कि हाईकोर्ट की एकल पीट द्वारा जमानत दिये जाने की गम्भीर आलोचना की।
 -जमानत देने वाले न्यायाधीश थे वर्तमान लोकायुक्त एनके मेहरोत्रा। जिस समय जमानत दी गई उस समय अमरमणि त्रिपाठी सपा में शामिल हो चुके थे।

राज्यपाल महोदय ने जो कदम उठाया है वो जायज है क्योंकि इनको ज़बरदस्ती एक्सटेंशन दिया गया। इस लोकायुक्त के बारे में भ्रष्टï बातें भी सुनने को मिली थी।
सत्यदेव त्रिपाठी
( कांग्रेस नेता )

सपा सरकार भ्रष्टाचार के मामले में अव्वल है। लोकायुक्त के नियुक्ति को लेकर जो सरकार की मंशा है उसको प्रदेश की जनता समझ चुकी है!
चंद्र मोहन
( प्रवक्ता बीजेपी )

कॉर्पोरेशन बैंक के मैनेजर के आवास पर सीबीआई टीम का छापा

सहारा शहर स्थित अवध अपार्टमेंट में लखनऊ टीम ने दी दबिश
तीन माह से फरार चल रहा है पवन आर्या, दिल्ली में दर्ज है मुकदमा

 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। कॉर्पोरेशन बैंक के मैनेजर पवन कुमार आर्या के आवास पर सुबह लखनऊ सीबीआई टीम ने छापेमारी की। छापेमारी के दौरान टीम को कोई फर्जी दस्तावेज या वस्तु नहीं मिली। छापेमारी के दौरान अवध अपार्टमेंट में हडक़म्प मच गया।
पवन कुमार आर्या कारर्पोशन बैंक में मैनेजर है। बैंक द्वारा पवन कुमार को अवध अपार्टमेंट में ए-308 नम्बर का आवास आवंटित किया गया था। पवन के खिलाफ बैंक के अधिकारियों ने दिल्ली में धोखाधड़ी सहित कई संगीन मामलों में मुकदमा दर्ज कराया था। इस मामले की जांच दिल्ली सीबीआई टीम कर रही है। शुक्रवार की सुबह लखनऊ सीबीआई की टीम के लगभग आधा दर्जन अधिकारियों ने पवन के आवास पर छापा मारा, लेकिन पवन सपरिवार तीन माह से फरार चल रहे है। मकान के बाहर ताला लगा हुआ देखकर अधिकारियों ने ताला तोडक़र अंदर प्रवेश किया, लेकिन आवास में टीम को कोई फर्जी दस्तावेज नहीं मिली। छापेमारी के दौरान कुछ कागजात मिला लेकिन पवन कुमार आर्या के खिलाफ कोई ठोस साक्ष्य नहीं मिला। आवास में बैंक की एक अलमारी मिली टीम के अधिकारियों ने बताया कि दिल्ली सीबीआई टीम के विवेचक ने पवन के आवास का सर्च वारंट लिया है। दिल्ली से छापेमारी का आदेश प्राप्त हुआ था। छापेमारी के दारान जो कुछ भी बरामद होगा उसकी सूची दिल्ली सीबीआई टीम को दे दी जाएगी।
गार्ड से हुई झड़प
शुक्रवार की सुबह टीम अम्बेसडर कार से अवध अपार्टमेंट पहुंची। टीम के अधिकारी अपार्टमेंट के अंदर कार ले जाने लगे, लेकिन मौके पर मौजूद गार्ड ने कार को अंदर ले जाने से मना कर दिया। मना करने पर अधिकारियेां से गार्ड की झड़प हो गई। काफी देर तक चली झड़प के बाद आखिरकार गार्ड की बात अधिकारियों को माननी पड़ी। कार गेट के बाहर खड़ा कर अधिकारी अंदर गये।

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