ठंडा हुआ वकीलों का जोश, प्रशासन के हक में फैसला

अधिवक्ताओं के प्रदर्शन को शांतिपूर्ण कहने वालों को न्यायालय का तमाचा

गोलीबारी, हंगामा और तोडफ़ोड़ करने वाले वकीलों की तलाश में जुटा प्रशासन
अधिवक्ता संगठनों से हाईकोर्ट की विशेष बेंच ने मांगी रिपोर्ट

 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता में गठित सात जजों की पीठ ने अधिवक्ताओं पर लाठी चार्ज और तोडफ़ोड़ के मामले को गंभीरता से लिया है। हाईकोर्ट चौराहे पर खुलेआम पिस्टल लहराने वाले वकील विशाल दीक्षित को किसी भी कोर्ट में घुसने पर रोक लगा दी गई है। इसके साथ ही अधिवक्ताओं की तीनों एसोसिएशन से पूरे मामले से संबंधित रिपोर्ट मांगी गई है।
हाईकोर्ट चौराहा, स्वास्थ्य भवन और मण्डलायुक्त कार्यालय तक तांडव मचाने वाले वकीलों की तलाश में पुलिस और प्रशासन के अधिकारी जुट गये हैं। डीएम और एसएसपी के निर्देशन में चौराहों पर लगे सीसीटीवी कैमरों की मदद से तोडफ़ोड़ करने वालों की पहचान की जा रही है। इसके अलावा घटना से जुड़ी वीडियो और फोटो लेने वाले लोगों सेे भी पुलिस और प्रशासन का सहयोग करने की अपील की जा रही है, जिसमें लोगों के पास मौजूद वीडियो और फोटोज लेकर कलेक्ट किया जा रहा है। इसका मकसद चार घंटे तक तांडव मचाने, गाडिय़ों में तोड़-फोड़ करने और आग लगाने वालों की पहचान करना है। उन लोगों के खिलाफ अधिक से अधिक सबूत जुटाना है।
हाईकोर्ट की विशेष बेंच के फैसले ने वकीलों के हंगामे पर राजनीति करने वाली पार्टियों और नेताओं के मुंह पर करारा तमाचा मारा है। विशेष बेंच ने स्पष्ट कर दिया कि दोषी जो भी होगा, उसको बख्शा नहीं जायेगा। इसीलिए अधिवक्ताओं के प्रदर्शन को शांतिपूर्ण कहने वालों और उनके ऊपर लाठी चार्ज किये जाने की निन्दा करने वाली भाजपा महानगर ईकाई ने भी चुप्पी साध ली है। गौरतलब हो कि बीजेपी की महानगर ईकाई ने स्वास्थ भवन के अंदर और बाहर अधिवक्ताओं पर बर्बरता पूर्वक लाठी चार्ज की घोर निन्दा की थी। महानगर अध्यक्ष मुकेश शर्मा ने प्रेस नोट जारी कर कहा था कि नाका के दुर्विजयगंज निवासी अधिवक्ता श्रवण कुमार वर्मा की हत्या के विरोध में साथी अधिवक्ताओं द्वारा मुआवजे एवं हत्यारों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर स्वास्थ भवन चौराहे पर शान्तिपूर्वक प्रदर्शन किया जा रहा था पर पुलिस प्रशासन ने उन पर बर्बरतापूर्वक लॉठी चार्ज कर दिया। जिसकी भारतीय जनता पार्टी कड़े शब्दों में निन्दा करती है। पार्टी के पदाधिकारियों ने अधिवक्ताओं पर हुये बर्बरता पूर्वक लॉठी चार्ज की जांच कराकर दोषी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ भी कठोर कार्यवाही की मांग की थी। इसी प्रकार कांग्रेस की तरफ से भी उत्तर प्रदेश कंाग्रेस कमेटी विधि एवं मानवाधिकार विभाग के संयोजक वेद प्रकाश त्रिपाठी ने अधिवक्ता की मृत्यु पर गहरा शोक प्रकट किया था। इसके साथ ही आये दिन अधिवक्ताओं पर हो रहे हमलों पर गहरी चिन्ता व्यक्त की थी लेकिन अधिवक्ताओं के तांडव, गाडिय़ों में तोडफ़ोड़ और लोगों को दौड़ा-दौड़ा कर पीटने की घटना के बाद पार्टी की तरफ से किसी ने भी निन्दा प्रस्ताव जारी नहीं किया। दरअसल अधिवक्ताओं के तांडव की वीडियो और फोटो सामने आने के बाद सबने चुप्पी साध ली है। अधिवक्ताओं का वोट हासिल करने के मकसद से राजनीति करने वालों के मुंह पर ताले लग गये हैं।

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