ट्रामा सेन्टर में गार्ड भी करते हैं मरीजों का इलाज

शिकायत मिलने पर हर बार मानव संसाधनों की कमी का रोना रोता है केजीएमयू प्रशासन

captureवीरेंद्र पाण्डेय
लखनऊ। राजधानी में केजीएमयू स्थित ट्रामा सेन्टर में चिकित्सकों व पैरामेडिकल स्टाफ की कमी बता कर गार्डों से मरीजों का इलाज कराया जा रहा है। हालात यह है कि गम्भीर मरीजों के इलाज के नाम पर खुलेआम खिलवाड़ हो रहा है।
बीते गुरूवार को ट्रामा सेन्टर स्थित न्यूरो सर्जरी विभाग में भर्ती मरीज के गले में नली डालकर फेफड़े तक सांस पहुंचाने वाली नली की सफाई की जा रही थी और यह काम कोई विशेषज्ञ डॉक्टर या कोई पैरामेडिकल स्टाफ नहीं बल्कि ट्रामा की सुरक्षा में तैनात एक सुरक्षा कर्मी कर रहा था। वहीं विशेषज्ञों की मानें तो सांस नली में ट्यूब डालने का काम तो हमेशा विशेषज्ञ ही करते है,लेकिन उसकी सफाई का काम केवल प्रशिक्षित पैरामेडिकल स्टाफ द्वारा किया जाना चाहिए। यह मामला तो बानगी मात्र है। नीलमथा निवासी अवधेश तिवारी के मुताबिक पिछले एक हप्ते तक उनकी भतीजी ट्रामा सेन्टर के न्यूरो सर्जरी वार्ड में भर्ती थी। इस दौरान वार्ड में तैनात गार्ड पैरामेडिकल स्टाफ का काम करने के साथ ही प्रशासनिक काम करते हुए देखे गये। यदि किसी मरीज को बेड नहीं मिला या फिर उसको कई बार बाहर आना जाना होता है, तो गार्ड को सुविधा शुल्क देकर मरीज और तीमारदार अपना काम आसानी से करा सकते हैं। अवधेश बताते हैं कि गले में पाइप डालने से लेकर ग्लूकोज तथा इंजेक् शन लगाने तक का काम भी ये गार्ड बड़े आसानी से कर देते हैं।

एक्सपर्ट ही डालते हैं श्वांस नली में ट्ïयूब
श्वांस नली में ट्यूब डालने का काम तो विशेषज्ञ ही करते हैं,उसकी साफ-सफाई की ट्रेनिंग परिजनों को दी जाती है। जिससे उनकी घर पर भी केयर की जा सके । क्योंकि न्यूरो का मरीज कई सप्ताह तक विस्तर पर ही रहता है। लेकिन ट्रामा में इस तरह का कार्य भी प्रशिक्षित पैरामेडिकल स्टाफ द्वारा ही किया जाता है। इस काम को बिना प्रशिक्षण के करना खतरनाक है।
डॉ.हैदर अब्बास,ट्रामा-1 प्रभारी, केजीएमयू

Pin It