ट्रामा सेंटर: डॉक्टर से गार्ड तक धमकाते हैं तीमारदारों को

इलाज कराने पहुंचे लोगों के साथ बदसलूकी आम 

शिकायत के बाद भी पुलिस नहीं करती कार्रवाई

 वीरेंद्र पांडेय
captureलखनऊ। राजधानी स्थित केजीएमयू के ट्रामा सेंटर में मरीजों तथा उनके परिजनों से बदसलूकी जारी है। गेट पर खड़े गार्ड से लेकर रेजीडेंट डॉक्टर तक अक्सर उनसे मारपीट पर आमादा रहते हैं। ऐसा ही एक मामला हाल में प्रकाश में आया है। ट्रामा सेंटर में तैनात गार्ड ने एक तीमारदार को न केवल परिसर से बाहर भगा दिया बल्कि धमकी दी कि दोबारा नजर आया तो टांग तोड़ दूंगा। हंगामे के बाद पहुंची पुलिस ने तीमारदार को ही डांट कर चुप करा दिया।
सुल्तानपुर स्थित निहालगढ़ निवासी अफाक अहमद अपने भतीजे का पिछले कुछ दिनों से ट्रामा सेंटर में इलाज करा रहे हैं। बीते बुधवार को अफाक ट्रामा सेंटर के चौथे तल पर भर्ती अपने भतीजे के लिए दवा लेने जा रहे थे। ट्रामा सेंटर की फार्मेसी पर दवा नहीं मिली। वे फार्मेसी के सामने खड़े ही थे कि एक गार्ड ने डाक्टर के राउंड पर आने की बात कह कर हटने को कहा। इस पर अफाक ने बताया कि बाहर से दवा मंगानी है। इसके लिए एक आदमी को बुलाया है अभी चला जाऊंगा। इस पर गार्ड भडक़ गया और अफाक का कालर पकड़ कर ट्रामा सेन्टर के बाहर कर दिया। जिस पर अफाक के परिजन भी भडक़ गये और उन्होंने हंगामा शुरू कर दिया। हंगामे की सूचना पाकर मौके पर पहुंची पुलिस ने परिजनों को डांट-डपट कर चुप करा दिया। वहीं ट्रामा पीआरओ ने परिजनों को धमकाते हुए कहा कि इलाज कराओ नेतागीरी न करो । अगर नहीं मानोगे तो डॉक्टर हड़ताल कर देंगे, फिर करा लेना इलाज। जानकारों की माने केजीएमयू प्रशासन के ढुलमुल रवैये के चलते तीमारदारों से आये दिन गार्ड, कर्मचारी तथा डॉक्टर अभद्रता करते हैं।
ट्रामा सेंटर में संविदाकर्मियों से लेकर डॉक्टर तथा गार्ड सब तीमारदारों पर रौब गांठते हैं। हाल में नाका थाने पर तैनात सिपाही मनीष जिसकी पत्नी क्वीनमेरी अस्पताल में भर्ती थी। खून की जांच कराने ट्रामा सेन्टर आये थे। वहां पर काउंटर नम्बर-4 पर मौजूद कर्मचारी मोबाइल गेम खेल रहा था। सिपाही की गलती सिर्फ इतनी थी कि उसने कर्मचारी को पर्चे पर नंबर देने को कह दिया। बस कर्मचारी भडक़ गया और गालियां देते हुए पर्चे को फेंक दिया।
कार्रवाई का डर नहीं
यहां के संविदाकर्मी से लेकर गार्ड तथा रेजीडेंट डॉक्टरों को कार्रवाई का डर नहीं है। संविदाकर्मी तथा गार्ड सब ऊं ची पहुंच के चलते नौकरी कर रहे हैं। जिसके कारण उन पर कार्रवाई नहीं होती है। वहीं दूसरी तरफ डॉक्टर बात-बात पर हड़ताल की धमकी देते हैं। जिससे परिजन से लेकर मरीज तक सकते में आ जाते हंै।

जब रेजीडेंट डॉक्टरों ने दी जान से मारने की धमकी

दस दिन पहले फैजाबाद की रूदौली निवासी लक्खा देवी (70) का इलाज करा रहे परिजनों को रेजीडेंट डाक्टरों ने जान से मारने की धमकी दी। इस पर कुलपति ने कार्रवाई का भरोसा दिया था। पीडि़त ने उपचिकित्सा अधीक्षक को आरोपी डाक्टरों की फोटो भी दिखाई थी। लेकिन कार्रवाई के नाम पर नतीजा सिफर रहा है। गौरतलब है कि लक्खा देवी का इलाज के नाम पर जूूनियर डॉक्टर सिर्फ खानापूर्ति करते रहे। सिर्फ प्लास्टर बांधने के लिए मरीज और उसके परिजनों को दिन के तीन बजे से लेकर रात के 12 बजे तक ऑपरेशन थियेटर के सामने खड़ा रखा। जब परिजनों ने मरीज की समस्या के बारे में उप चिकित्सा अधीक्षक डॉ. वेद को बताया तो उन्होंने तत्काल मरीज का इलाज शुरू कराया। लेकिन इस पर नाराज जूनियर डाक्टरों ने परिजनों को जमकर गालियां दी तथा जान से मारने की धमकी भी दी थी।

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