जेल के भीतर पैसा फेंक तमाशा देख

जेल की चहारदीवारी के बीच होता है खेल

प्रदेश की जेलों का हाल, रुपये के दम पर हर चीज होती है मुहैया
सुरक्षाकर्मी ही पहुंचाते हैं प्रतिबंधित सामान

Capture 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। बाहरी दुनिया में जो चीजें मुहैया नहीं हो पाती हैं वो चीजें प्रदेश के जिला कारागारों के भीतर बंदियों को रुपये के दम पर आसानी से मिल जाती हैं। कई बार जेल के भीतर तलाशी के दौरान शराब, मादक पदार्थ, गुटखा, तम्बाकू, सिम, मोबाइल, चार्जर मिले। कुछ दिनों तक सख्ती रहती है लेकिन उसके बाद फिर वहीं पुराना ढर्रा चलने लगता है।

जिला कारागार में डीआईजी सर्च के दौरान हाई सिक्योरिटी ब्लॉक में बंद बंदियों के पास से रुपये, तम्बाकू और गुटखा मिला। इस पर जेल अधिकारियों के पेंच कसते हुए उनसे स्पष्टïीकरण मांगा गया है। यह तो महज एक मामूली सर्च के दौरान वस्तुएं मिलीं। कुछ अरसे पहले डीएम और एसएसपी के औचक निरीक्षण के दौरान जिला कारागार में मोबाइल, सिम और चार्जर मिला था। इस पर अधिकारियों ने जेल अधिकारियों को ताकीद की थी कि वह बंदियों की अच्छी तरह से तलाशी लेकर बैरक में भेजें।
जेल में मादक पदार्थ, गुटखा, तम्बाकू, मोबाइल आदि बंदी अपने साथ नहीं लाते बल्कि यह सारी चीजें उन्हें जेल में तैनात सुरक्षाकर्मी ही मुहैया कराते हैं। कहा जाता है कि जेल में बस पैसा हो तो सारी दुनिया इन ऊंची चहारदीवारियों में मिल सकती है। आलाधिकारियों को शायद इस बात का अंदाजा नहीं है या फिर वह जानबूझकर आंखे मूंदे रहते हैं।

सुरक्षाकर्मी की जेब गर्म करो और जेल में करो मौज
लखनऊ जेल में रुपयों के दम पर बंदी चाहें तो अपना बैरक और हाता तक बदलवा लेते हैं। हाल में छूटे एक आरोपी ने बताया कि उसे हफ्ते में 12 सौ रुपये देने पड़े थे। उसके बाद से वह ऐश से जेल में घूमता फिरता था। उससे कोर्ई भी काम नहीं करवाया जाता था जबकि दूसरे बंदियों से खूब काम करवाया जाता था। जिन बंदियों से सुरक्षाकर्मी अगर खफा हो जाते तो उसके लिए मुश्किल बढ़ जाती। उसे बात-बात पर परेशान किया जाता, आए दिन पिटाई होती। अगर वही बंदी रुपयों का इंतजाम करके सुरक्षाकर्मी को दे दें तो फिर उसकी भी ऐश हो जाती। जेलों में पैसे के बल पर सारी सुविधाएं उपलब्ध हो जाती हैं। सुरक्षाकर्मियों को पैसे देकर आसानी से बाहर से सामान मंगवाने से लेकर मिलने तक का काम आसानी से हो जाता है। कुछ दिनों पहले ही एक हत्या के खुलासे में यह बात सामने आयी थी कि इसकी योजना जेल में बनी थी। कई अपराधियों के लिए तो जेल सुरक्षा का पनाहगार साबित होती है।

तो डीआईजी जेल को नहीं पता हैं मानक
आईजी के वर्जन ने सवाल खड़े कर दिए हैं। एक तरफ डीआईजी जेल शरद कुलश्रेष्ठï ने जिला कारागार के हाई सिक्योरिटी ब्लॉक में पहुंचकर सर्च ऑपरेशन चलाया। उन्होंने तलाशी के दौरान पूर्व मंत्री अमरमणि त्रिपाठी के बेटे अमनमणि के पास से 30 रुपये और उधम सिंह के पास से 15 रुपये बरामद किए थे। क्या डीआईजी जेल को मानकों के बारे में पता नहीं है या फिर आईजी जेल इस नियम से अंजान हैं।

प्रदेश की जेलों में मिलते रहते हैं मोबाइल, नशीले पदार्थ आदि

प्रदेश की जिला कारागार प्रतापगढ़, नैनी, मुरादाबाद, आगरा, आजमगढ़ में तलाशी के दौरान शराब की बोतले, सैकड़ो की तादाद में सिम, मोबाइल, नशीली पदार्थ, गैस सिलेंडर, चूल्हा, चिमटा तक मिला था। सूत्रों की मानें तो यह सारा सामान बंदी भीतर नहीं ले जा सकते है। क्योंकि बंदी जब बाहर से जेल में दाखिल होता है तो उसके वस्त्र उतारकर तलाशी ली जाती है। अगर तलाशी के वक्त कोई भी प्रतिबंधित वस्तु मिलती है तो उसे जब्त कर लिया जाता है। जेलों के भीतर अपराधियों की हनक किसी से छिपी नहीं है। जो जितना बड़ा अपराधी, जेलों में उसकी उतनी धाक रहती है। उनके आगे सुरक्षाकर्मी नतमस्तक रहते है। उनकी सुविधाओंं का सारा ध्यान रखा जाता है। सूत्रों की मानें तो जेलों से जेलों से अपराधी बड़े-बड़े कार्यों को अंजाम देते है।

मांगा जा रहा स्पष्टीकरण

जेल में बंदियों के पास रुपये मिलना कोई बड़ी बात नहीं है। बंदी मानक के मुताबिक अपने पास 15सौ रुपये रख सकता है। हां गुटखा और तम्बाकू उनके पास कैसे पहुंचा, इसका स्पष्टïीकरण मांगा जा रहा है।
-डीएस चौहान आईजी जेल

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