जेबें भरने तक जीवित रहती हैं योजनायें

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
Captureलखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय में अक्सर कई योजनाओं की तैयारियां बड़े जोर-शोर से शुरू की जाती हैं लेकिन कुछ समय चर्चा में रहने के बाद यह गुम हो जाती हैं। फरवरी 2015 में नियुक्त रजिस्ट्रार देवेन्द्र कुमार ने विश्वविद्यालय में हुई एक बैठक में वेब रेडियो की शुरुआत करने का प्रस्ताव कुलपति एस.बी. निमसे के सामने रखा गया था। इस योजना को शिक्षकों व विद्यार्थियों दोनों के फायदे को मद्देनजर रखते हुए कुलपति ने इसकी अनुमति दी थी।
विश्वविद्यालय में वेब रेडियो शुरू करने का उद्देश्य यह था कि इससे शिक्षकों व छात्रों के बीच कम्युनिकेशन गैप को दूर किया जाए। जिसके लिए देवेन्द्र कुमार ने वेब रेडियो शुरू कराने की योजना का एप्रूवल कुलपति से लिया था। इस वेब रेडियो के जरिये छात्र अपने क्लास से जुड़ी जानकारी व वीडियो स्ट्रीमिंग के जरिये विद्यार्थी अपने लेक्चर को देख व सुन सकते थे। वेब रेडियो के जरिये स्टूडेंट को सरलता से एक क्लिक में अपने विभाग से लेकर लेक्चर व अन्य छोटी सी छोटी जानकारी आसानी से मिल जाती है। वहीं दूसरी ओर शिक्षक से लेकर कर्मचारियों तक सभी के बीच सूचनाओं का प्रसार किया जा सकता था। यह वेब रेडियो एक साथ पूरे विश्वविद्यालय को कम्युनिकेट करने के लिए तैयार किया जाना था। शुरुआत में इस योजना पर तीव्रता से कार्य किया जा रहा था। वेब रेडियो की जिम्मेदारी मास कम्युनिकेशन के प्रो. मुकुल श्रीवास्तव को सांैप कर उन्हें इसका इंचार्ज बनाया गया था। मार्च मे रजिस्ट्रार के हटते ही यह सारी योजना ठण्डे बस्ते मे चली गई। अधिकतर लोग तो इसे पूरी तरह से समझ भी नहीं पाए थे। विश्वविद्यालय मेें ऐसी दर्जनों योजनाएं छात्र हित के नाम पर शुरू कर अपनी जेबें भरने तक ही सीमित रखी जाती है। उसके बाद न किसी को छात्र ही याद रहता है न ही उनकी जरूरतें, सारी की सारी योजनाएं की गुम हो जाती हैं।
जिम्मेदार लोगों से पूछने पर एक ही जवाब मिलता है कि फंड की कमी की वजह से काम रुका हुआ है। जल्द ही इस पर काम किया जाएगा।

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