जेंडर के मुद्ïदे पर मीडिया को और अधिक जागरूक तथा संवेदनशील होने की जरूरत

  • ब्रेकथू्र और सवांददाता समिति ने मीडिया और जेंडर पर आयोजित की परिचर्चा

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
Captureलखनऊ। मानवाधिकार और महिला मुद्दों पर काम करने वाली संस्था ब्रेकथ्रू और उत्तर प्रदेश राज्य मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति ने ‘मीडिया और जेंडर’ विषय पर एक परिचर्चा का आयोजन किया। कार्यक्रम में विशेष तौर पर मीडिया के विभिन्न माध्यमों में आने वाली महिला व जेंडर से संबंधित खबरों पर वक्ताओं ने अपने विचार रखे।
महिला व जेंडर मुद्दों पर मीडिया की भूमिका, भाषा के प्रयोग और वर्तमान परिवेश में खबरों में महिलाओं की स्थिति जैसे तमाम सवालों का जवाब तलाशती इस परिचर्चा में वरिष्ठ मीडिया कर्मियों ने कहा कि इस दिशा में बदलाव की जरूरत है और इस दिशा में शुरूआत भी शुरू हो गई है। कार्यक्रम की शुरूआत करते हुए ब्रेकथ्रू की स्टेट मैनेजर कृति प्रकाश ने कहा कि ब्रेकथ्रू मीडिया के साथ काफी नजदीकी से काम करता रहा है। हमें लगता है कि मीडिया बदलाव लाने का सबसे बड़ा माध्यम है, इसलिए हमें इस पर विचार करने की जरूरत है । इसी कड़ी में यह एक शुरूआत है, जिसमें हमें उत्तर प्रदेश मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति का सहयोगा मिला है।
इस अवसर पर उत्तर प्रदेश मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति के अध्यक्ष प्रांशु मिश्रा ने कहा कि महिला व जेंडर मुद्दों पर हमें एक रेखा खींचने की जरूरत है, खासतौर से संवेदनशीलता और शब्दों को लेकर। ब्रेकथ्रू के साथ मिलकर इस दिशा में यह कार्यक्रम एक प्रयास है। इस अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार नवीन जोशी ने कहा कि पत्रकारिता एक चुनौतीपूर्ण दौर से गुजर रही है। ऐसे में कई बार हम महिला मुद्दों को लेकर जिस तरह की संवेदनशीलता की उम्मीद मीडिया से करते हैं, वो हमें नही दिखती है। वरिष्ठ पत्रकार नासिर के कहा कि हमें ख़बरों को छापने या दिखाने से पहले जांचने की भी जरूरत है कि खबर के पीछे की सच्चाई क्या है। इन्द्राणी मुखर्जी केस का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि हमें यह देखना होगा कि खबरों से इतर हम लोगों की निजी जिंदगी में न झांके और खबर के लिए जो जरूरी हो वही प्रस्तुत करें।
परिचर्चा में हिन्दुस्तान टाइम्स की रेजीडेंट एडिटर सुनीता एरन ने कहा कि हम अपने स्तर पर प्रयास कर रहे है, लेकिन जरूरत सामूहिक प्रयास की है। हमें गलत बातों के विरोध में खड़ा होना पड़ेगा। जेंडर के मुद्दों को लेकर हमें पाठकों की सोच में भी बदलाव पर और अधिक काम करने की जरूरत है। नवभारत टाइम्स के रेजीडेंट एडिटर सुधीर मिश्रा ने कहा कि हम अपने स्तर पर प्रयास कर रहे है। लखनऊ में हुए कई महिला मुद्दों से जुड़ी घटनाओं पर हमने अभियान भी चलाया और उनको जनता के सामने पूरी ईमानदारी के साथ रखा है। कई मामलों में मीडिया की पहल की वजह से लोगों को न्याय मिला है। उन्होंने कहा कि हम कोशिश करेंगे की भाषा के स्तर पर वो अपने यहां छेडख़ानी जैसे शब्द को सेक्सुअल हैरेसमेंट या यौन उत्पीडऩ से रिप्लेस करेंगें।
एनडीटीवी के रेजीडेंट एडिटर कमाल खान ने कहा कि इलेक्ट्रानिक मीडिया में महिला मुद्दों को लेकर पहले की अपेक्षा काफी संवेदनशीलता आई है और इलेक्ट्रानिक मीडिया में काफी संख्या में महिला पत्रकार है जो किसी भी तरह से पुरूषों से कम नही हैं। वरिष्ठ पत्रकार शरत् प्रधान ने कहा कि हमें शहरों के साथ ही ग्रामीण पत्रकारों को भी जेंडर सेंसेटाइज करने की जरूरत है, क्योंकि कई बार उनके द्वारा भेजी गई खबर सीधे पाठकों तक पहुंच जाती है, जो भाषा के स्तर पर जेंडर के प्रति संवेदनशील नही होती है। इस मौके पर ब्रेकथ्रू के
मैनेजर पीआर एंड कम्यूनिकेशन विनीत त्रिपाठी ने कहा कि इस परिचर्चा के माध्यम से हम यह उम्मीद करते है कि मीडिया जेंडर के मुद्दों पर अपनी भूमिका और भी अधिक जिम्मेदारी से निभाएगा। कार्यक्रम में वरिष्ठ पत्रकार मनीष श्रीवास्तव, संजय शर्मा, मुदित माथुर, मनमोहन राय, विनय तिवारी, रंजीत, अशोक मिश्रा, वर्तुल अवस्थी, अनुराग, नासिरुद्दीन, अरशाना अजमत, आंचल अवस्थी, शुभी चंचल, अर्पित, सना नूूर,शिखा,जुनैद,संतोषी दास, नदीम, अख्तर फातिमा , मनोज, तरुन, प्रमोद, विशाल मिश्रा, प्रसून, असद, स्वाति माथुर, ,ब्रेकथ्रू से अर्चना, मनीष, महेन्द्र, धीरज, सुनील और ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग के छात्र उपस्थित रहे।

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