जुनून का सिपाही

ईश्वर इम्तहान भी उन्हीं लोगों का लेता है जिनमें उस को पास करने की कूवत होती है। जिंदगी के अब तक के तमाम इम्तहान में कामयाब होते आ रहे राजेश सिंह का ईश्वर ने वह इम्तहान लिया जिसकी कल्पना से ही शरीर में सिंहरन उठ जाती है। राजेश के युवा बेटे को काल ने उनसे छीन लिया। कोई और होता तो टूट जाता, बिखर जाता लेकिन यह राजेश की हिम्मत और जुनून का ही परिणाम है कि उन्होंने अपने बेटे को हमेशा के लिए जिंदा कर दिया। राजेश ने अपने बेटे के नाम पर कुंवर ग्लोबल नाम से एक ऐसे स्कूल की संरचना की है जहां बच्चों का सम्पूर्ण विकास हो सके। दयाल गु्रप ऑफ कंपनीज के सीईओ राजेश सिंह की जिंदगी में आये तमाम उतार चढ़ावों पर नजर डाल रहे हैं हमारे सवांददाता सौरभ ….

-अगर आप के बारे में बात की जाए तो इसे कैसे देखेंगे?
Captureसाधारण परिवार का एक होनहार बालक। जिसने बचपन से ही आसमान पर चमकते सितारे की तरह खुद को देखा। हमेशा अच्छे नम्बरों से एग्जाम पास किया। लाइफ ने उस वक्त यू टर्न लिया जब मेरे बड़े भाई का एक्सीडेंट हुआ और उनके स्पाइन में चोट लगने के कारण वह हमेशा-हमेशा के लिए हैंडीकैप हो गये। यहां से मैंने अपना विचार बदला और नौकरी करने के बजाय व्यापार करने की ठानी। बिजनेस की दुनिया में बनारस में कोयले के व्यापार से कदम रखा। शुरुआत ट्रक पर चढक़र कोयला बेचनेे से हुयी। अपनी ट्रांसपोर्ट कंपनी खोली। उसके बाद का सफर सभी जानते हैं लेकिन अगर संघर्ष की बात की जाये तो वह बनारस से शुरू हुआ। अक्सर ऐसा भी हुआ है कि शाम को जब घर पहुंचा हूं तो पत्नी ने पहचाना ही नहीं। कड़ी मेहनत और मशक्कत के बाद समाज में अपनी पहचान बना पाने में कामयाब हुआ हूं। मेरे परिवार में एक भाई और दो बहने शुरू से ही लगन थी कि पैसा कमाना है।
-यह बताइये कि पहली कामयाबी कब मिली?
यह ईश्वर का करम है कि जिस क्षेत्र में गया वहा मुझे कामयाबी मिल। जिस प्रोजेक्ट को हाथ लगाया उसमें फायदा हुआ। जब कोयले का काम किया तो उस वक्त एक बड़े व्यापारी का पार्टनर बना। फिर डेवलपर लाइन में आया तो यहां भी बहुत अच्छा किया। मेरी पहली सफलता कोयले के बिजनेस में मिली।
-आप ने फिल्में भी बनाई है?
जी हां दो फिल्में बनायी है, लेकिन कुछ ऐसा हुआ कि लौट कर आना पड़ा। परिवार को टाइम देना प्राथमिकता थी इसलिए फिल्में बनाना छोड़ दी। दो फिल्में फरेब और अनवर बनायी दोनों ही हिट रहीं।
-आप की कंपनी का नाम दयाल गु्रप ऑफ कंपनीज है इसके पीछे क्या कुछ खास कारण है?
देखिये श्री राम दयाल सिंह मेरे पिता जी का नाम है और मैंने जो भी आज तक किया है उनके नाम पर ही किया है। मेरा अपना खुद का मकान भी उनके नाम पर है। न पत्नी, न बच्चे किसी के नाम पर कुछ नहीं रखा। आपने पूछा है कि क्या कुछ खास कारण है? तो खास कारण यह है कि जब यूनिवर्सिटी में पढ़ते थे तो इश्क हो गया और लव मैरिज कर ली। यह बात पिता जी को नागवार गुजरी। इसलिए कुछ दिनों तक मनमुटाव रहा बाद में सब ठीक हो गया। मैं अपने पिता को बहुत प्यार करता हूं। हमेशा यही सोचा कि उनकी इज्जत और शोहरत को बढ़ाऊं। उनके नाम को आगे ले जा सकूं। भगवान का शुक्र है कि ऐसा कर सकने की उसने मुझे शक्ति दी।
-जिंदगी की फिलॉसफी क्या रही है आप की। मतलब जिंदगी को कैसे जीना चाहते हैं, किस नजरिये से देखते हैं?
बात अगर फिलॉसफी की करें तो कुछ वर्ष पूर्व तक जिंदगी के प्रति दूसरा नजरिया था आज दूसरा है। आज की फिलॉसफी यह है कि समाज को कुछ देना है। लोगों के काम आना है। शिक्षा के क्षेत्र में काम करना है। भटकते नौजवानों को रोकना है। सच पूछिये तो मैं युवाओं के लिए कुछ करना चाहता हूं। क्योंकि मैं देख रहा हूं कि आज के युवाओं का जिंदगी के प्रति जो नजरिया है वह ठीक नहीं है।
-ऐसा बदलाव कैसे आया?
बहुत ही दुखद घटना है मेरे बेटे को क्रूर काल ने मुझसे दूर कर दिया। पिछले पांच जून को मेरे बेटे की डेथ हो गयी। जब वह आया था तब भी उसने मेरी जिंदगी को बदला, उसके जन्म के बाद हमने बहुत तरक्की की। जब वह गया तब भी हमारी जिंदगी को बदल कर गया वह हमे चेंज करने के लिए आया था वह हमें आध्यात्म की दुनिया से जोड़ कर चला गया।
-बहुत ही दुखद घटना है, आप ने उनके नाम पर स्कूल खोला है?
जी हां, एक ऐसा स्कूल जहां सामाजिक ज्ञान के साथ आध्यात्मिक ज्ञान भी बच्चों को मिले। शिक्षा का एक ऐसा मंदिर जहंा पढ़ाई की पिन टू प्लेन तर्ज पर व्यवस्था हो। जिस दिन हमने कुंवर ग्लोबल स्कूल का साइनएज लगा देखा उस दिन ऐसा महसूस हुआ कि हम यही करने आये थे। हम स्कूल नहीं बना रहे हैं हम बच्चों के लिए रिसर्च सेंटर बना रहे हैं उसे हमें ऑल इंडिया लेवल पर ले जाना है।
-जब आप सेवा करना चाहते हैं तो राजनीति में क्यों नहीं आते। राजनीति है ही सेवा के लिए आप बेहतर ढंग से सेवा कर सकते हैं?
नहीं राजनीति मेरा सब्जेक्ट नहीं है। मैं जहां हूं, जैसा हूं जिस लेवल पर सेवा कर सकता हूं करूंगा लेकिन राजनीति में नहीं जाऊंगा। मैं एक व्यक्ति की सेवा करूं या 100 लोगों के काम आऊं। सेवा कभी भी पॉवर से नहीं होती, सेवा हमेशा नीयत से होती है। हम लोगों की सेवा करेंगे लेकिन राजनीति में कभी नहीं जाएंगे। राजनीति के लिए हम नहीं बने हैं उसके लिये हम फिट नहीं है।
-आप के संबंध जितने अच्छे राहुल गांधी से हैं उतने ही अच्छे राजनाथ सिंह से, कौन बेहतर है?
मैं यहां आप को करेक्ट करने की कोशिश करूंगा। मेरे संबंध नेता जी से भी हैं और मुख्यमंत्री अखिलेश जी से भी। जहां तक अच्छे बुरे की बात है तो सभी लोग अच्छे हैं। लेकिन जो काबिलियत, जो सलाहियत अखिलेश यादव जी में है उसकी जितनी तारीफ की जाए कम है। युवा होते हुए भी जितने अच्छे और प्रभावी तरीके से यूपी को आगे ले जा रहे हैं उसकी तारीफ होनी चाहिए। उनमें बहुत ज्यादा क्षमता है। वह और आगे जाएंगे ऐसी मुझे उम्मीद है।
-किस नेता से आप के बेहतर संबंध है आप की आइडोलॉजी के कौन ज्यादा करीब हैंै?
समाज में रहते हुए रिश्ता तो बन ही जाता है। जो समाज के लिए अच्छा करें उसके साथ हमारा अच्छा रिश्ता है। लेकिन मैं आप को इतना बताना चाहता हूं कि आने वाले समय में अखिलेश यादव से बड़ा नेता देश में दूसरा कोई नहीं होगा।
-क्या सोचा था कि यहां तक सफर पूरा होगा?
यह मालूम था कि यहां तक पहुंचेंगे। काम करेंगे तो सफलता मिलेगी कई बार ऐसे क्षण आये कि लगा सबकुछ खत्म हो गया। हमारा पॉलिटिकली विरोध हुआ लेकिन कोई कुछ बिगाड़ नहीं सका। उसका सबसे बड़ा कारण यह था कि हमारे अंदर कोई ऐब नहीं था। इसलिए डर की कोई बात नहीं। दिन भर मेहनत करेंगे तो कामयाब होंगे ही। अगर सक्सेज का स्वाद लग जाए तो इससे बड़ी कोई बात नहीं । एक प्रोजेक्ट कामयाब हुआ तो दूसरे प्रोजेक्ट की कामयाबी में व्यक्ति दोगुने उत्साह के साथ जुटता है। मैं कहतां हूं कि आज कामयाबी का नशा अगर युवाओं को लग जाए तो इससे बड़ी इससे बेहतर कोई दूसरी बात हो ही नहीं सकती।
-आप की स्ट्रेंथ क्या है?
मेरी स्ट्रेंथ काम के प्रति मेरी ईमानदारी और जुनून है ।
-और कमजोरी क्या है?
मैं समझता हूं कि इमोशनल हो जाना मेरी कमजोरी है। कभी-कभी मैं कुछ ज्यादा ही इमोशनल हो जाता हूं।
-कोई ऐसा ख्वाब है जो अभी भी अधूरा हो?
युवाओं के प्रति काम करने की इच्छा है जो अभी अधूरी है । युवाओं का सही तरह से सही निर्माण नहीं हो पा रहा है इस दिशा में काम करना बाकी है।

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