जीवन में पूर्णता का अनुभव है योग-डा. दीपक

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
Captureलखनऊ। आधुनिक युग की जीवन शैली में बहुत सी विसंगतियों के कारण हम जीवन के वास्तविक उद्देश्यों को भूल गये हैं। यही कारण है कि आज जिस अव्यवस्था के कारण हमने अपने चारों ओर शारीरिक एवं मानसिक रोगों का घेरा बना लिया है, उसी अव्यवस्था को हम भ्रमवश अपने जीवन का अभिन्न अंग मानने लगे हैं। तरह-तरह की सुख सुविधायें जुटाने का प्रयत्न हमें जीवन को पूर्णता में जीने के आनंद से दूर ले जा रहा हैं। आज हमें आवश्यकता है, जीवन को समझने की और इसे पूर्णता में जीने की, जिसके लिये हमारे सामने एक सक्षम और सशक्त माध्यम के रूप में उभर कर आया है-योग।
योग हमारी प्राचीन विद्याओं की बहुमूल्य निधि है जिसके द्वारा हम अपने व्यक्तित्व को परिष्कृत, परिमारजित कर संपूर्णता की ओर ले जाते हैं। इसके द्वार हम शरीर ही नहीं अपितु मन पर भी नियंत्रण करने का विज्ञान जान पाते हैं। तनाव प्रबंधंन से लेकर जीवन प्रबंधंन के महत्वपूर्ण पक्षों पर योग के बड़े-बड़े सफल प्रयोग किये जा रहे हैं। ऐसे समय में हमें आवश्यकता है योग को अपने जीवन का अभिन्न हिस्सा मान कर प्रयोग-धर्मिता के पक्ष को आत्मसात करने की।
21 जून, जो कि संयुक्त राष्टï्र संघ की ओर से विश्व योग दिवस घोषित हो चुका है, से ही हम संकल्प ले सकते हैं कि योग के कतिपय अभ्यासों को अपने दैनिक क्रम का हिस्सा बनाने का। नित्य प्रात: उठ कर शौच आदि क्रियाओं से निवृत होकर सर्वप्रथम सूर्य को अपनी योगाभ्यास तपश्चर्या का साक्षी मानकर खुले स्थान में उसी के समक्ष सूर्य नमस्कार का यथासम्भव अभ्यास करें। तत्पश्चात ताड़ासन, तिर्यक ताड़ासन, कटि चक्रासन, पश्चिमोत्तानासन, उत्तानपादासन, हलासन, भुजंगासन आदि का क्रम से अभ्यास कर के थोड़ी देर शिथिल-शरीर कर शवासन में लेट जायें। इसके उपरांत कपाल भाती, अनुलोम विलोम प्राणायाम, शीतली, उज्जायी एवं भ्रामरी प्राणायाम कर कुछ क्षण के लिये शांत मन से ध्यान करें। इतना अभ्यास नित्य करने से शरीर रोग मुक्त और मन सारी मानसिक व्याधियों से मुक्त रहेगा और आप जीवन की पूर्णता को अनुभव कर सकेंगे।

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