जीत से बढ़ा रुतबा अखिलेश का कांग्रेस से भी पिछड़ गयी भाजपा

 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
Captureलखनऊ। महराजगंज की फरेंदा सीट पर हुए उप चुनाव ने उत्तर प्रदेश की राजनीतिक फिजां रातोरात बदल करके रख दी है। समाजवादी पार्टी ने जहां यह सीट जीत करके अपनी धमक बरकरार रखी, वहीं कांग्रेस ने दूसरे स्थान पर आकर सबको चौंका दिया। मोदी लहर पर सवार भाजपा के लिए यह खतरे की घंटी है। भाजपा तीसरे स्थान पर रही। सपा उम्मीदवार विनोद मणि त्रिपाठी ने कांग्रेस उम्मीदवार वीरेंद्र चौधरी को नौ हजार से ज्यादा वोटों से शिकस्त दी। यहां से भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार और निवर्तमान विधायक बजरंग बहादुर सिंह को 41 हजार 247 वोट हासिल हुए।
फरेंदा की सीट भाजपा की ही थी। लोकसभा चुनाव के तकरीबन एक साल बाद हुए उपचुनाव में भाजपा प्रत्याशी को तीसरे स्थान पर संतोष करना होगा यह कौन जानता था। इससे पहले चरखारी विधानसभा सीट पर भी भाजपा प्रत्याशी को हार का सामना करना पड़ा। यह सीट उमा भारती ने जीती थी। अब अगर भाजपा उमा भारती जैसी फायर ब्रांड नेता की सीट भी न बचा पाये तो उसके रणनीतिकारों को नये सिरे से सोचना होगा। आम तौर पर उप चुनाव एंटी इनकम्बेंसी फैक्टर पर आधारित होते हैं । अगर यह सच है तो यूपी में दो किस्म के एंटी इनकम्बेंसी फैक्टर इस समय काम कर रहे हैं। मोदी सरकार के खिलाफ एक एंटी इनकम्बेंसी फैक्टर काम कर रहा है और इसे यूपी की जनता ने अपने तरीके से प्रस्तुत भी किया है। सपा की अखिलेश सरकार के खिलाफ लोगों की नाराजगी अभी खुलकर नहीं दिखाई दे रही है। पार्टी को दोनो उप चुनावों में जीत हासिल हुई है और वह विधान परिषद चुनाव की तैयारी में जुट गयी है।
अगर उत्तर प्रदेश की बात करें तो मोदी सरकार यूपी के सहारे खड़ी होकर देश की सत्ता पर काबिज हुयी थी हलांकि यूपी में मोदी की जबरदस्त लहर ने तमाम दिग्गजों धराशायी कर दिया था। चरखारी उपचुनाव में करारी हार का सामना करने के बावजूद बीजेपी इस गुमान में थी महराजगंज में फरेन्दा उपचुनाव में वह दिखा देगी की मोदी लहर अब भी सलामत है लेकिन अफसोस यह गुमान गुमान ही रह गया। इस उपचुनाव में जो नतीजे आये हैं वो बेहद चौकाने वाले हैं। सपा ने पहले नम्बर पर अपनी जीत दर्ज की तो भाजपा तीसरे नम्बर खिसकते हुई नजर आई। अब ये सवाल तो जरूर उठेगा कि शायद छप्पन इंच का सीना सिकुड़ा हुआ नजर आ रहा है।
पिछले उपचुनाव की बात की जाये तो उत्तर प्रदेश 11 विधानसभा में सपा 8 सीटो पर काबिज हुई थी वहीं भाजपा सिर्फ तीन सीटों पर ही जीत सकी। लखनऊ पूर्व, नोएडा, सहारनपर, भाजपा ने जीती। सपा ने ठाकुरद्वारा, बिजनौर , रोहनियां , चरखारी, हमीरपर, सिराथू, निघासन और बलहा पर जीत दर्ज की थी। चरखारी उपचुनाव में भी भाजपा को करारी हार झेलनी पड़ी थी। सपा ने भारी जीत दर्ज की थी।
फरेंदा विधानसभा सीट के उपचुनाव में समाजवादी पार्टी ने विजय हासिल की है। दूसरे नंबर पर कांग्रेस और बीजेपी खिसक कर तीसरे नंबर पर आ गयी। सपा के विनोदमणि त्रिपाठी ने 9261 वोटों से जीत हासिल की है। सपा को कुल 64,878 वोट मिले वहीं कांग्रेस प्रत्याशी वीरेंद्र चौधरी 55,647 वोटों के साथ दूसरे नंबर पर रहे। बीजेपी के बजरंग बहादुर को 41,247 वोट हासिल हुए।
बात अगर कांग्रेस की हो तो जो बातें उसके अस्तित्व के बारे में कही जाती हैं शायद उसका अर्थ बदल चुका है। कांग्रेस अब अपने असली अस्तित्व के करीब नजर आ रही है। फरेन्दा में दूसरे नम्बर पर आने के बाद बीजेपी को ये जरूर समझ लेना चाहिए कि अब चुनौतियाँ छोटी नही रहीं। अब वो मोदी लहर नही रही। अब शायद छप्पन इंच का सीना भी नहीं रहा। भाजपा के हारने की वजह जो भी हो लेकिन एक वजह तो जरूर है इनके कुछ नेताओ के आपत्तिजनक बयान ने जनता की निगाहों में इसकी हैसियत लगातार घटाई है। भाजपा के चोटी के नेताओं ने अगर फैसला नहीं किया और डैमेज कंट्रोल में नाकामयाब रहे तो उसकी मुसीबत बढ़ सकती है।

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