जीएसटी के खिलाफ व्यापार संगठनों में नाराजगी

  • जनता को विश्वास नहीं, जीएसटी लागू होने से कम होगी महंगाई

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
Captureलखनऊ। केन्द्र सरकार लोकसभा और राज्यसभा में जीएसटी बिल पास करवाकर भले ही खुश हो रही हो लेकिन बिल को लेकर व्यापारी और आम नागरिक खुश नहीं हैं। व्यापारियों का कहना है कि सरकार एक देश एक बिल की बात कर रही है लेकिन हर सामान पर 18 प्रतिशत कर लगाने से चीजों की कीमतों में बढ़ोत्तरी होगी। इससे महंगाई घटने की बजाय और बढ़ेगी। इसके साथ ही व्यापारियों पर सजा का प्रावधान भी गलत है। वहीं आम जनता का कहना है कि सरकार महंगाई कम करने के चाहे जितने कानून बना ले, बिल पास करवा ले, उसका लाभ जनता को मिलने वाला नहीं है। जिस तरह वैट लगाने से पहले महंगाई कम करने का दावा किया जाता था, उसी तरह जीएसटी लागू करने से पहले भी बड़े-बड़े वादे किए जा रहे हैं। जबकि हकीकत में वैट की तरह ही सारा जेब जनता की जेब पर पड़ेगा। इससे महंगाई कंट्रोल नहीं होगी।
व्यापारियों में नाराजगी
लखनऊ व्यापार मण्डल के वरिष्ठï महामंत्री अमरनाथ मिश्रा ने बताया कि जीएसटी लागू होंने से हमें कोई एतराज नहीं है। सरकार इसको खुशी-खुशी लागू करे लेकिन हम खुदरा व्यापारियों पर थोपे जा रहे प्राविधानों के खिलाफ हैं। खुदरा व्यापारी अपने स्तर पर धन लगा कर व्यापार करते हैं, सरकार की तरफ से उसको कोई लाभ नहीं मिलता है। वह सरकार को हर तरह के टैक्सों का भुगतान करता है। लेकिन 1974 के क्रिमिनल अध्यादेश का उपयोग जीएसटी में किया जा रहा है, जिसमें व्यापारियों के खिलाफ सजा का प्रविधान है। उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था में खुदरा व्यापारी रीढ़ की हड्डी का काम करते हैं। उनके ऊपर अपराधिक अध्यादेश थोप कर केन्द्र सरकार प्रदेश के रीढ़ की हड्डी को तोडऩा चाहती है। उन्होंने बताया कि व्यापारी महीने में यदि चार बार रिटर्न ही भरेगा, तो वो व्यापार से जुड़े अन्य काम कब करेगा। रिटर्न भरने के लिए एक व्यापारी को कम से कम महीने में 20 हजार रुपये चार्टर्ड एकाउंटेंट को फीस देनी होती है। यह फीस व्यापारी कहां से लायेगा। इस बिल के प्रविधान बिल्कुल भी व्यावहारिक नहीं है।
आखिल भारतीय उद्योग व्यापार मण्डल के राष्टï्रीय अध्यक्ष संदीप बंसल ने कहा है कि केन्द्र सरकार द्वारा जीएसटी बिल पास कराने को ही व्यापारियों की आवाज नहीं समझा जाना चाहिए। इस बिल में व्यापारियों को सबसे बड़ी आपत्ति 18 प्रतिशत टैक्स दर से है। इस दर से महंगाई और बढ़ेगी। वहीं दूसरी सबसे बड़ी आपत्ति व्यापारियों के खिलाफ सजा का प्रविधान है। जो किसी भी कीमत पर स्वीकार्य योग्य नहीं है। उन्होंने बताया कि एक तरफ जहां ये बिल तिहरी कर प्रणाली को बढ़ावा दे रहा है। वहीं इस बिल में व्यापारियों पर जुर्माने का प्रविधान भी है। इसलिए केन्द्र सरकार को बिल के मौजूदा प्रारुप पर फिर से विचार करना चाहिए।
लखनऊ व्यापार एसोसिएशन के महासचिव राजेश सोनी ने कहा है कि व्यापारियों पर पहले से ही टैक्स का इतना भार है, उस पर केन्द्र सरकार ने जीएसटी लाकर व्यापारियों की कमरतोड़ दी है। जीएसटी लागू होने से व्यापारियों पर अतिरिक्त दबाव पडऩा तय है। जीएसटी का पूरा व्यापारी संवर्ग विरोध कर रहा है। उसके बाद भी यदि व्यापारियों पर जीएसटी जबरन लादने की कोशिश की गयी तो हमारा संगठन इसका पुरजोर विरोध करेगा।

जनता की खरी-खरी

शरद शुक्ला
जीएसटी बिल से के न्द्र सरकार को लाभ जरूर मिलेगा लेकिन राज्य सरकार को लाभ नहीं मिलेगा। जहां तक इस बिल के लागू होने की बात की जा रही है, तो मुझे नहीं लगता की ये बिल अप्रैल 2017 तक लागू हो पाएगा।
शिवानी शर्मा
जीएसटी लागू होने से वस्तुओं और सेवाओं पर अलग-अलग लगने वाले सभी कर एक ही कर में सम्मलित हो जाएंगे। इससे पूरे देश में वस्तुओं और सेवाओं की कीमतें लगभग एक हो जाएंगी।
पिंकी सिन्हा
जीएसटी बिल लागू होने से कर की वसूली करने में पारदर्शिता आएगी। पब्लिक को अलग-अलग तरह के टैक्स देने से राहत मिलेगी। जनता से किसी भी सामान की खरीदारी पर देश भर में एक ही टैक्स लिया जाएगा। इससे पारदर्शिता भी आयेगी।
राजन उपाध्याय
मुझे नहीं लगता कि सरकार महंगाई रोकने को लेकर गंभीर है। यदि सरकार को आम जनता की फिक्र होती तो सबसे पहले खाद्य सामग्रियों की कीमतों को नियंत्रित करती। इसके बाद जीएसटी लागू करने और टैक्स की दर घटाने का सपना देखती। जीएसटी को लागू करवाना एक लंबी प्रक्रिया है लेकिन आम जनता वर्तमान में महंगाई से परेशान है।

विनय कुमार
सरकार चाहे जितने बिल पास करा ले। देश में महंगाई रोकने के कितने भी कानून क्यों न बना ले। उसका लाभ जनता को मिलने वाला नहीं है। सरकार जो भी टैक्स वसूलती है, वो जनता की जेब से जाता है। बिजनेसमैन का मुनाफा बिल्कुल भी प्रभावित नहीं होता है।

Pin It