जिले में सिर्फ 40 फीसद खाद्य दुकानों का पंजीकरण

ऑनलाइन भी करा सकेंगे दुकानदार पंजीकरण सौ फीसद खाद्य कारोबारियों का पंजीकरण टेढ़ी खीर
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
Captureलखनऊ। राजधानी में गुणवत्ता परक खाद्य पदार्थों की उपलब्धता और सौ फीसद खाद्य कारोबारियों की दुकानों का पंजीकरण करवा पाना मुश्किल साबित हो रहा है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की तमाम कोशिशों के बाद सिर्फ 40 फीसद खाद्य कारोबारियों ने अपनी दुकान पंजीकरण कराया है। अपंजीकृत दुकानदारों के खिलाफ अभियान चलाकर चालान काटने की कार्रवाई भी हो रही है, लेकिन दुकानदारों पर इसका कोई असर होता नहीं हो रहा है। ऐसे में शत प्रतिशत दुकानों का पंजीकरण करवाना और लाइसेंस बनवाने की योजना विभाग के लिए टेड़ी खीर साबित हो रही है।
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (फूड सेफ्टी एण्ड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन) ने खाद्य कारोबार करने वाले सभी दुकानदारों से दूकान का पंजीकरण और नियमानुसार लाइसेंस बनवाने को जरूरी बताया है। इस नियम को करीब दो साल से प्रचारित करने का काम भी किया जा रहा है। प्रचार में लाखों रुपये खर्च किये जा चुके हैं। खाद्य कारोबारियों की सुविधा को ध्यान में रखकर एफएसडीए के अधिकारियों ने वार्ड वार पंजीकरण और लाइसेंस बनवाने के लिए कैम्प भी लगवाए। लेकिन खाद्य कारोबार से जुड़े मात्र 40 फीसदी लोगों ने अपनी दुकान का पंजीकरण करवाया। मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी एवं कार्यकारी अधिकारी एसपी सिंह के मुताबिक जिले में खाद्य कारोबार से जुड़े शत प्रतिशत दुकानदारों को पंजीकरण करवाना और नियमानुसार लाइसेंस बनवाना अनिवार्य है। इसमें प्रत्येक कार्य दिवस में कलेक्ट्रेट स्थित एफएसडीए कार्यालय में दुकान का पंजीकरण और लाइसेंस बनवाने का काम आसानी से हो जाता है। इसके अलावा खाद्य कारोबारियों को एफएसडीए की वेबसाइट (एफएसएसएआई.गव.इन) पर अपनी दूकान या प्रतिष्ठान का ऑनलाइन पंजीकरण और लाइसेंस बनवाने की सुविधा भी दी गई है। इसमें खाद्य कारोबारी ऑनलाइन फार्म भर सकता है। जिले में अब तक कुल 12085 खाद्य कारोबारियों ने अपनी दुकान का पंजीकरण करवाया है। जबकि 2808 खाद्य कारोबारियों ने दूकान या प्रतिष्ठान का लाइसेंस बनवाया है।
ग्रामीण क्षेत्रों पर होगी खास नजर
ग्रामीण क्षेत्रों में बिना पंजीकरण के ही अधिकांश दुकानें चलाई जा रही हैं। नगरीय क्षेत्र में बड़ी दुकानों और प्रतिष्ठानों की अनुमानित संख्या 20 हजार से अधिक है। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्र में खाद्य कारोबार से जुड़ी दुकानों की संख्या शहरी क्षेत्र की दुकानों से कम नहीं है। इसलिए खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन ने ग्रामीण क्षेत्र में खाद्य कारोबार करने वालों के खिलाफ व्यापक स्तर पर अभियान चलाने का निर्णय लिया है। इसमें अब तक 40 से अधिक लोगों के खिलाफ बिना लाइसेंस के कारोबार करने संबंधी चालान काटने की कार्रवाई की जा चुकी है। जबकि बिना लाइसेंस के खाद्य कारोबार करने वालों के खिलाफ 5 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाये जाने का प्रावधान है।
गुणवत्तापरक की होगी अनिवार्यता
खाद्य पदार्थ में मिले घटकों का विवरण, उत्पाद की मानक के अनुरूप पैकिंग, पैकेट पर मैन्यूफेक्चरिंग डेट अंकित होना, किस अवधि तक खाद्य पदार्थ का सेवन बेहतर रहेगा, इसका विवरण देना अनिवार्य होता है। इसके अलावा खाद्य पदार्थों को बनाने में व्यवसायिक सिलेंडर का उपयोग और दुकान में मौजूद उत्पाद और बिकने वाले सामान का लेखा-जोखा रखना भी अनिवार्य होता है।

लाइसेंस बनवाने की प्रक्रिया

खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग में पंजीकरण और लाइसेंस बनवाने की प्रक्रिया अत्यंत सरल है। इसमें खाद्य कारोबार करने वालों के लिए अपनी दुकान का पंजीकरण करवाना अनिवार्य है। इसमें होटल, रेस्टोरेंट, फूड कोर्ट, ठेला दुकानदार, खोमचे वालों, सब्जी विक्रेता, प्रोविजन स्टोर, चाऊमीन, पिज्जा, बर्गर पानी बताशे, दाल, चावल, चीनी, रिफाइन्ड, सरसों के तेल, बेकरी की दुकानों, दवा की दुकानों, दवा निर्माता कंपनियों समेत अनेकों खाद्य उत्पादों का कारोबार करने वालों को खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग में दुकान का पंजीकरण करवाना होता है। यदि एक लाख रुपये सालाना से कम का व्यापार होता है, तो पंजीकरण की फीस मात्र 100 रुपये जमा करनी होती है। एक लाख रुपये से अधिक का कारोबार होने की स्थिति में नियमानुसार दुकान और प्रतिष्ठान का पंजीकरण करवाना होता है। इसमें खाद्य सुरक्षा संबंधी समस्त मानकों का पालन करने वाले दुकानदारों का सत्यापन होने के बाद ही पंजीकरण और लाइसेंस को वैधता
मिलती है।

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