जिले के आठ ब्लॉक के मनरेगा मजदूरों को मजदूरी का इंतषार

मजदूरी का कुल २४९.४० लाख रुपये का भुगतान लंबित
मनरेगा प्रदेश मुख्यालय के बैंक खाते में धनराशि न होने से बढ़ा संकट
ग्रामीण क्षेत्रों में मनरेगा के तहत होने वाले अनेकों काम पाइप लाइन में

Capture 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। राजधानी के आठ ब्लाकों में मनरेगा के तहत तीन करोड़ रुपये से ज्यादा का भुगतान लंबित है। इसमें 249.40 लाख रुपये मजदूरी और 84.04 लाख रुपये सामग्री का भुगतान लंबित है। वे मजदूरी के लिए ब्लाक स्तर के अधिकारियों से लेकर विकास मुख्यालय तक के अधिकारियों से गुहार लगा चुके हैं लेकिन मजदूरी का भुगतान करने की कोई सूरत नजर नहीं आ रही है। इस संबंध में मनरेगा उपायुक्त लखनऊ ने मजदूरों का लंबित भुगतान करवाने के लिए शासन को पत्र लिखा है लेकिन वहां से कोई सकारात्मक जवाब नहीं आया है।
महात्मा गांधी राष्टï्रीय रोजगार गारंटी (मनरेगा) योजना के तहत ग्रामीण विकास से संबंधित अनेकों काम होते हैं। इसमें मनरेगा जॉब कार्ड बनवाने वाले मजदूरों को 100 दिन तक काम दिया जाता है। इस योजना के तहत काम करने वाले मजदूरों को प्रतिदिन 174 रुपये के हिसाब से भुगतान किया जाता है। यह भुगतान सप्ताह भर के अंदर हर हाल में करना होता है। मजदूरों को निर्धारित मजदूरी का भुगतान सीधे बैंक खातों में किया जाता है। इसका मकसद रोजगार गारंटी योजना का बेहतर एवं पारदर्शी ढंग से क्रियान्वयन करना और काम की तलाश में शहरों की तरफ लोगों के पलायन पर रोक लगाना है। इस योजना का सारा लेखा-जोखा आनलाइन कर दिया गया है। इसके बावजूद मनरेगा के तहत होने वाले काम का समय से भुगतान करने के लिए जिम्मेदार अधिकारी और सरकार गंभीर नहीं है। मनरेगा के तहत केवल लखनऊ के आठ ब्लाकों में 333.44 लाख रुपये मजदूरों की मजदूरी और सामग्री का भुगतान लंबित है। इस संंबंध में शासन को पत्र भेज दिया गया है। इसके बावजूद शासन स्तर से कोई जवाब नहीं आया। जबकि मनरेगा के अधिकारियों पर 31 मार्च तक गांवों में लंबित सभी कामों को हर हाल में पूरा करने का दबाव बनाया जा रहा है।

मिल रहा कोरा आश्वासन
मनरेगा कार्यालय से मिले आंकड़ों पर गौर करें तो मनरेगा योजना के अंतर्गत लखनऊ में निर्धारित लक्ष्य के अनुसार मानव दिवसों का सृजन करवाया गया है। लेकिन मजदूरों को समय से मजदूरी नहीं मिल पा रही है। यह भुगतान कई महीने से लंबित है। इसकी वजह मनरेगा मुख्यालय के बैंक खाते में धनराशि न होना है। बैंक खाते में धनराश्शिन होने के कारण श्रमिकों के भुगतान के लिए एफटीओ जनरेट नहीं हो पा रहा है। इससे नाराज होकर श्रमिकों की तरफ से लगातार ब्लाक मुख्यालय और जिला स्तर पर भुगतान के लिए धरना और प्रदर्शन किया जा रहा है। हर बार ब्लाक और जिला स्तरीय अधिकारी मजदूरों को जल्द मामला सुलझाने का आश्वासन देकर लौटा देते हैं लेकिन होली का त्यौहार नजदीक होने की वजह से मजदूरों की बदहाल हालत पर अधिकारी भी भावुक हो गये हैं। इसलिए हाल ही में शासन को पत्र लिखकर होली के त्यौहार को ध्यान में रखकर मजदूरों का भुगतान कराने की अपील की है। लेकिन शासन स्तर से कोई भी सकारात्मक जवाब नहीं आया है। ऐसे में होली तक भुगतान मुश्किल लग रहा है।

मनरेगा के तहत होने वाले काम
महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में सडक़ों का निर्माण, शौचालय निर्माण, तालाबों की खोदाई, नहरों और नालियों का निर्माण, वृक्षारोपण, स्कूलों का निर्माण समेत अनेकों महत्वपूर्ण काम होते हैं। इसमें स्किल्ड और नान स्किल्ड दोनों तरह के लोगों का जॉब कार्ड बनता है। इसी के आधार पर जॉब कार्ड धारकों को काम दिया जाता है। सरकार की तरफ से जारी शासनादेश के अनुसार जॉब कार्ड बनने के दो सप्ताह के अंदर प्रत्येक जॉब कार्ड धारक को काम दिलवाना आवश्यक है। इसमें कम से कम 100 दिन का रोजगार दिलवाना अनिवार्य है। इसमें महिला जॉब कार्डधारकों की भागीदारी 33 प्रतिशत निर्धारित की गई है। लेकिन बमुश्किल 10-15 प्रतिशत महिला जॉब कार्डधारकों को ही काम दिलवाने का लक्ष्य पूरा हो पाया है। इसकी सबसे बड़ी वजह महिलाओं में जॉब कार्ड बनवाने के प्रति रुचि की कमी और गांवों में महिलाओं के हिसाब से काम नहीं मिल पाना है। जो महिलाओं को मनरेगा के तहत काम दिलवाने के आंकड़ों को पूरा करवाने में सबसे बड़ी अड़चन पैदा कर रहा है।
जिले में कुल आठ ब्लाक हैं। इन सभी ब्लाकों में मनरेगा के तहत काम करने वाले मजदूरों की मजदूरी का लाखों रुपये भुगतान लंबित है। जिले के सभी ब्लाकों में श्रमिकों की 249.40 लाख रुपये मजदूरी और 84.04 लाख रुपये सामग्री का भुगतान मिलाकर कुल 333.34 लाख रुपये का भुगतान लंबित है। स्थिति यह है कि मनरेगा के बैंक खाते में धन भी नहीं है। इस वजह से श्रमिकों के भुगतान का एफटीओ भी जनरेट नहीं हो पा रहा है। इसलिए भुगतान के संबंध में शासन को कई बार पत्र भेजा जा चुका है। वहां से सकारात्मक जवाब आने और उचित कार्रवाई होने के बाद ही मजदूरी का भुगतान हो पाने की उम्मीद है। जिला स्तर पर मजदूरों का भुगतान करने के संबंध में कुछ नहीं किया जा सकता है।
-हवलदार सिंह उपायुक्त मनरेगा, लखनऊ।

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