जिम्मेदारों की लापरवाही से आफत में सरकारी अस्पताल के मरीजों की जान

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
captureलखनऊ। राजधानी का स्वास्थ्य महकमा लापरवाही की मिसाल कायम कर रहा है। यहां के सरकारी अस्पतालों में मरीजों को इलाज मिल पाना टेढ़ी खीर साबित हो रहा है। अधिकारियों की उदासीनता मरीजों की जान पर आफत बनकर टूट रही है। सरकारी अस्पतालों में तैनात चिकित्सकीय स्टाफ इतना कामचोर हो चुका है कि इसकी कीमत लोगों को अपनी जान देकर चुकानी पड़ रही है। हालात यह है कि चिकित्सक तथा पैरामेडिकल स्टाफ विभागीय मंत्री तथा अधिकारियों के आदेश को मुंह चिढ़ा रहे हैं। चिकित्सकीय स्टाफ की कारगुजारियों का ही नतीजा है कि आये दिन मरीज के इलाज में लापरवाही के कारण मौतें होने और बिना इलाज लोगों के लौटने की घटनाएं बढ़ रही हैं। यदि सितम्बर माह में सरकारी अस्पतालों में मरीज के इलाज में लापरवाही और हंगामें की घटनाओं का जिक्र किया जाये, तो चिकित्सा व्यवस्था की हकीकत सामने आ जायेगी।

गलत इंजेक्शन से मौत

हजरतगंज स्थित सिविल अस्पताल में बुखार के मरीज को गलत इंजेक्शन देने का आरोप भी लगाया गया है। आरोप है कि बुखार के मरीज सुनील कुमार वैश्य के पुत्र निमिश को इमरजेंसी में चिकित्सक ने गलत इंजेक्शन लगा दिया। इंजेक्शन लगाने के बाद मरीज का शरीर ठंडा पड़ गया, जिससे उसकी मौत हो गई। मौत के बाद परिवारवालों ने लापरवाही का आरोप लगाकर जमकर हंगामा किया। चिकित्सकों ने हंगामे की सूचना पुलिस को दी। बाद में पुलिस ने हस्तक्षेप कर लोगों को शांत कराया। सिविल अस्पताल में गलत इंजेक् शन से मौत का यह कोई पहला मामला नहीं है इससे पहले भी रायबरेली रोड निवासी संतोष राय के 8 वर्षीय पुत्र वात्सल्य की मौत भी गलत इंजेक्शन लगाने से हो चुकी है, जिसकी जांच अस्पताल प्रशासन तीन महीने से कर आरोपी चिकित्सक तथा नर्स को बचाने में लगा है।

पैसे लेकर भी नहीं किया इलाज

राजधानी के बीकेटी स्थित राम सागर मिश्र अस्पताल में प्रसूता ज्योति की मौत के बाद परिजनों ने जमकर हंगामा किया और नर्स पर रिश्वत लेने का आरोप लगाया। प्राप्त जानकारी के मुताबिक अस्पताल में प्रसूता ज्योति का ऑपरेशन किया गया था। उसके बाद तबीयत बिगडऩे लगी और आखिरकार मरीज की मौत हो गई। गौरतलब है कि चिकित्सक द्वारा लापरवाही की यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी 100 बेड के इस अस्पताल में कई बार स्वास्थ्यकर्मियों और चिकित्सक के लापरवाही की बात सामने आ चुकी है। इन पर कार्रवाई होना तो दूर की बात है, उल्टा आरोपी चिकित्सक और नर्स मरीज के परिजनों को धमकी देने पर आमादा है।

मंत्री के आदेश ताक पर

कैबिनेट मंत्री मंत्री रविदास मेहरोत्रा पिछले कई महीने से लगातार राजधानी के सरकारी अस्पतालों का औचक निरीक्षण कर रहे हैं। इस दौरान मरीजों के इलाज में बिल्कुल भी लापरवाही न होने का चिकित्सकीय स्टाफ को निर्देश देते रहते हैं। जिन अस्पतालों में गड़बडिय़ां मिलती हैं, उन अस्पतालों के जिम्मेदार अधिकारियों को फटकार भी लगाते हैं। उसके बाद भी इन अस्पतालों के हालात जस के तस बने हुए हैं।

महिला की मौत पर हंगामा

बलरामपुर अस्पताल में नसीमा नामक महिला की मौत पर परिजनों ने हंगामा कर दिया था। परिजनों ने चिकित्सकों पर इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया था। नसीमा की मौत के बाद गुस्साए परिजनों ने चिकित्सकों से अभद्रता करते हुए जमकर हंंगामा काटा। सूचना पाकर मौके पर पहुंची पुलिस ने परिजनों को समझा बुझाकर मामला शान्त कराया। अस्पताल के सीएमएम ने बताया कि मरीज गंभीर अवस्था में आयी थी,जिससे उसकी मौत हो गई। अस्पताल के सीएमएस डॉ. राजीव लोचन ने बताया कि मरीज को हार्ट अटैक आया था। चिकित्सक मरीज का इलाज कर ही रहे थे कि उसकी मौत हो गई। उन्होंने बताया कि अस्पताल डेंगू के मरीजों से भरा हुआ है। बावजूद इसके चिकित्सक सभी मरीजों का इलाज कर रहे हैं। परिजनों को ऐसी स्थिति में धैर्य से काम लेना चाहिए। फिलहाल मामला शान्त हो गया है। लेकिन थानाध्यक्ष वजीरगंज ने बताया कि अस्पताल प्रशासन की तरफ से परिजनों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करा दिया गया है।

नहीं मिला इलाज

लोकबन्धु अस्पताल में नर्स की कारगुजारी से मरीज सबिता शुक्ला की जान पर बन आयी। अस्पताल के जनरल वार्ड में भर्ती महिला को 12 घंटे बाद मीडिया के हस्तक्षेप के बाद इलाज मिल पाया। लोकबन्धु अस्पताल में यह नर्सों की संवेदनहीनता का यह कोई पहला मामला नहीं था। इससे पहले भी मरीजों के इलाज में लापरवाही की बातें सामने आ चुकी है। इस मामले में लापरवाही बरतने वाली नर्स पर अभी भी कोई कार्रवाई नहीं हुई है।

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