जिंदगी पर भारी वाहनों की रफ्तार

हर साल सडक़ हादसे और इस दौरान होने वाली मौतों के आंकड़े भयावह होते जा रहे हैं। राजधानी लखनऊ भी इससे अछूती नहीं है। सिर्फ लखनऊ में प्रतिदिन 5-6 सडक़ दुर्घटनाएं होती हैं। दुर्घटना होने की सबसे बड़ी वजह ड्राइवर की लापरवाही होती है।

sanjay sharma editor5किसी भी देश के विकास का प्रतीक सडक़ें होती हैं। देश में सडक़ों के अभाव और अच्छी सडक़ न होने की वजह से हर साल अरबों रुपए का ईंधन बर्बाद होता है। सडक़ों ने विकास को गति प्रदान की है तो हाइवे कल्चर में अब सब कुछ समाता जा रहा है। देश में जिस रफ्तार से सडक़ों और हाईवे की संख्या तेजी से बढ़ रही है उसी रफ्तार से इन सडक़ों और हाईवे पर भागती दौड़ती अंधाधुंध गाडिय़ां हादसों को भी न्यौता दे रही हैं। जो हम सबके लिए चिंता का विषय है। देश की जनसंख्या के बढऩे के साथ ही सडक़ों पर वाहनों की संख्या भी दिन प्रतिदिन बढ़ रही है। सभी को जल्दी पहुंचने की होड़ रहती है। जिसका परिणाम दुर्घटना के रूप में सामने आ रहा है।
सडक़ों पर सरपट दौड़ती गाडिय़ों की रफ्तार इंसानी जिंदगी पर भारी पड़ रही है। यूएन और डब्ल्यूएचओ समेत एनसीआरबी भी भारत को ऐसे देशों में शुमार करता है जहां पिछले कुछ सालों में सडक़ दुर्घटनायें साल दर साल तेजी से बढ़ी हैं। भारत में तेजी से बढ़ रहे सडक़ हादसों का आंकड़ा गंभीर चिंता का सबब बनता जा रहा है। एक सर्वे के मुताबिक चीन के बाद भारत में सडक़ हादसों में जान गंवाने वाले लोगों का आंकड़ा सबसे ज्यादा है। देश में सडक़ हादसों में रोजाना लगभग 170 लोगों की मौत हो जाती है। सडक़ हादसों से देश को सालाना 550 अरब रुपये का नुकसान होता है।
हर साल सडक़ हादसे और इस दौरान होने वाली मौतों के आंकड़े भयावह होते जा रहे हैं। राजधानी लखनऊ भी इससे अछूती नहीं है। सिर्फ लखनऊ में प्रतिदिन 5-6 सडक़ दुर्घटनाएं होती हैं। दुर्घटना होने की सबसे बड़ी वजह ड्राइवर की लापरवाही होती है। एक सर्वे के मुताबिक 60 फीसदी से ज्यादा सडक़ हादसों में ड्राइवर की गलती होती है। ज्यादातर हादसे ओवर स्पीड, लालबत्ती की अनदेखी, गाड़ी चलाते हुए मोबाइल पर बात करना और नशे में गाड़ी चलाने के कारण होते हैं। परिवहन व राजमार्ग मंत्रायल के आंकड़ों के मुताबिक 80 फीसदी से अधिक हादसे चालक की गलती से होते हैं। क्योंकि इनके लिये सख्त नियम नहीं है। विदेशों में नियम सख्त है और सबसे बड़ी बात है कि वहां ट्रैफिक की छोटी गलतियों पर भी जुर्माने की राशि बड़ी होती है। इसलिए यहां ट्रैफिक वॉयलेशन की घटनाएं कम होती हैं।
शराब पीकर वाहन चलाना, हेलमेट नहीं पहनना और सीट बेल्ट नहीं बांधना ही पूरी दुनिया में साल दर साल बढ़ते सडक़ हादसों की तीन प्रमुख वजहें हैं। ऐसे हादसे ज्यादातर नेशनल और स्टेट हाइवे पर होते हैं। भारत में भी दुर्घटनाओंं की ये सबसे बड़ी वजह तो है ही यातायात नियमों का पालन न होना भी बड़ा कारण है। सडक़ दुर्घटनाओं पर संयुक्त राष्टï्र ने भी चिंता जतायी थी और उम्मीद जतायी है कि वर्ष 2020 तक हादसों में 50 फीसदी तक की कमी आएगी।

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