जाम बना आम, प्रशासन नाकाम

  • Captureस्कूलों के बाहर खड़े बेतरतीब वाहन बन रहे जाम का कारण
  • चौराहों पर पुलिसकर्मियों की ढिलाई से उत्पन्न हो रही समस्या

 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। राजधानी में जाम की समस्या सुरसा के मुंह की तरह बढ़ती जा रही है। इस समस्या से निजात पाने की प्रशासन और पुलिस की सारी कोशिशें बेकार साबित हो रही हैं। सडक़ों पर वाहनों की लंबी कतारें, उसमें फंसे लोग और चौराहे पर भीड़ को नियंत्रित करने में हांफते पुलिस कर्मियों का दृश्य आम बात हो गई है। जबकि मण्डलायुक्त, जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक यातायात ने जनता को जाम से मुक्ति दिलाने की अनेकों योजनाएं बनाई हैं। इन पर लाखों रुपये खर्च भी हो चुके हैं। इसके बावजूद जाम पर प्रभावी नियंत्रण नहीं लग पा रहा है। जिसका खामियाजा जनता को भुगतना पड़ रहा है।
मण्डलायुक्त महेश कुमार गुप्ता ने लखनऊ की यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के मकसद से करीब दो महीने पूर्व प्रशासन, पुलिस, परिवहन और नगर निगम के अधिकारियों के साथ बैठक की थी। इसमें जनता को जाम से निजात दिलाने का खाका तैयार किया गया था, जिसमें किन-किन चौराहों पर और कितनी देर के लिए सबसे अधिक जाम लगता है, इसकी जानकारी हासिल करने और उसके हिसाब से यातायात को नियंत्रित करने का काम यातायात पुलिस को करना था। इसके साथ ही सीसीटीवी कैमरे और हेल्पलाइन नंबर की मदद से शहर में लगने वाले जाम की सूचना मिलते ही पुलिस को फौरन जाम हटवाने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इसी प्रकार सडक़ों के किनारे फैले अतिक्रमण को हटवाने और अवैध रूप से पार्क होने वाली गाडिय़ों का चालान करवाने की जिम्मेदारी भी संयुक्त रूप से नगर निगम और यातायात पुलिस को सौंपी गई थी। जिस चौकी इंचार्ज के क्षेत्र में सडक़ों के किनारे अतिक्रमण हटाने के बाद दोबारा अतिक्रमण होने का मामला सामने आये, उसके खिलाफ कार्रवाई होनी थी लेकिन हकीकत में कुछ भी नहीं हुआ।

एम्बुलेंस को भी नहीं मिलता रास्ता

शहर में लगने वाले जाम के चलते अक्सर मरीजों को ले जाने वाली एम्बुलेंस के फंसने की घटनाएं भी होती रहती हैं। एम्बुलेंस से अस्पताल जाने वाले मरीजों की हालत सबसे दयनीय होती है, उन्हें तत्काल इलाज की दरकार होती है लेकिन जाम में फंसने की वजह से समय से इलाज नहीं मिल पाता है। इस कारण अनेकों मरीज जाम में एम्बुलेंस फंसे होने और समय से इलाज नहीं मिलने के कारण अपनी जान गवां चुके हैं। इन सबके बावजूद पुलिस और प्रशासन के अधिकारी गंभीर नहीं हैं। आम जनता में भी सिविक सेन्स की कमी है, जिसकी वजह से लोगों को जाम से जूझना पड़ता है। ऐसे में पुलिस, प्रशासन, नगर निगम और आम जनता को अपने-अपने कर्तव्यों के प्रति ईमानदारी बरतनी होगी, तभी समस्या से निजात मिल पायेगी, नहीं तो जाम की समस्या जस की तस बनी रहेगी।
जाम के लिए मशहूर चौराहे
जिले में हजरतगंज, लालबाग, कैसरबाग, अमीनाबाद, चारबाग, आलमबाग, नहरिया चौराहा, स्कूटर इंडिया चौराहा, बुद्धेश्वर चौराहा, एवरेडी चौराहा स्थित बालाजी मंदिर के पास, दुबग्गा मण्डी चौराहा, तेलीबाग चौराहा, पॉलीटेक्निक चौराहा, महानगर चौराहा, आईटी चौराहा, कपूरथला चौराहा, अलीगंज, मुंशी पुलिया, गोमतीनगर के पत्रकारपुरम्, हुसडिय़ा चौराहा और सीतापुर रोड स्थित इंजीनियरिंग कॉलेज के पास रोजाना जाम लगता है। इस कारण सडक़ों पर वाहनों की लंबी कतार खड़ी दिखती है। इसके बारे में प्रशासनिक और पुलिस विभाग के अधिकारियों को आम जनता और सीसीटीवी कैमरों की मदद से जानकारी मिलती है लेकिन उच्चाधिकारियों का आदेश मिलने के बाद ही पुलिस की टीम सक्रिय होती है। अमूमन तो इन चौराहों के आस-पास किसी न किसी दुकान के अंदर या बाहर कुर्सी लगाकर पुलिस वाले आराम फरमाते मिल जाते हैं। जबकि चौराहों पर पुलिसकर्मियों की सक्रियता कम दिखती है।
छुट्टी के समय लगने वाला जाम
जिले के सभी नामचीन स्कूलों के बाहर लगने वाले जाम की वजह से रोजाना हजारों लोगों को समस्या होती है। इसमें सबसे अधिक प्रभावित हजरतगंज क्षेत्र है। जहां सैण्ट फ्रांसिस, ला-मार्टीनियर, सैण्ट कैथेड्रल, लोरेटो कान्वेंट स्कूल के बाहर रोजाना जाम लगता है। इसमें बच्चों को स्कूल छोडऩे आने वाली गाडिय़ां सडक़ों पर पार्क की जाती हैं, जिनकी वजह से सारा रास्ता जाम हो जाता है। इसमें नीली और लाल बत्ती लगी गाडिय़ां भी होती हैं। रोड के बीचो-बीच वाहन खड़ा देखकर भी कोई पुलिसकर्मी ड्राइवर से कुछ कहने और उसके खिलाफ कार्रवाई करने की हिम्मत नहीं जुटा पाता। इसमें स्कूल प्रशासन की तरफ से भी कोई सहयोग नहीं मिलता है, जबकि प्रशासनिक अधिकारियों के साथ बैठक में सभी स्कूल प्रबंधकों को सडक़ों पर वाहनों की पार्किंग पर रोक लगवाने और स्कूल में पढऩे वाले बच्चों और उनके परिजनों से यातायात नियमों का पालन करवाने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी लेकिन दो-चार दिनों की मुस्तैदी और जागरूकता का दिखावा करने के बाद दोबारा मामला जस का तस हो गया। आजकल सभी प्रमुख स्कूलों की छुट्टी के समय सडक़ों पर खड़े बेतरतीब वाहनों की लंबी कतारें देखी जा सकती हैं। जबकि प्रशासन ने जाम से निजात पाने की खातिर सभी स्कूलों की छुट्टी से समय में 10 से 20 मिनट का अंतर करवा दिया है। इसके बावजूद स्कूलों की छुट्टी के दौरान शहर में चारों तरफ जाम की स्थिति उत्पन्न हो जाती है।
डिवाइडर लगवाने का प्रयोग भी फेल
शहर को जाम से मुक्ति दिलवाने और सडक़ों के बीचो-बीच अस्थायी डिवाइडर लगवाने का प्रयोग भी सफल नहीं हो पा रहा है। हजरतगंज, निशातगंज, पत्रकारपुरम, नाका, लालबाग और चारबाग समेत कई क्षेत्रों में अस्थायी डिवाइडर लगवाया गया है। इसके बावजूद लोग लाइन में चलने की बजाय दो डिवाइडरों के बीच से निकल जाते हैं। इसमें बहुत से अस्थायी डिवाइडर टूट भी जाते हैं। इस कारण अनेकों दुर्घटनाएं भी होती हैं लेकिन ऐसा करने वालों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होती है। इस कारण भी सडक़ों पर जाम लगता है।

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