जातिवार टिकट देने की घोषणा करना बसपा को पड़ सकता है महंगा

भाजपा उपाध्यक्ष ने चुनाव आयोग से शिकायत कर की कार्रवाई की मांग

capture4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। राजधानी में पार्टी मुख्यालय पर पत्रकार वार्ता के दौरान जातिवार टिकट देने की घोषणा करना बसपा को महंगा पड़ सकता है। भाजपा ने इसकी शिकायत चुनाव आयोग से करते हुए बसपा के खिलाफ कार्रवाई किए जाने की मांग की है। वहीं प्रेस कांफ्रेंस में कही गई बातों से संबंधित सबूत भी पेश किए हैं।
बसपा सुप्रीमो मायावती ने पार्टी के प्रदेश मुख्यालय पर बुलाई गई पत्रकार वार्ता में विधानसभा चुनाव के लिए जातिवार टिकट दिए जाने की घोषणा की थी। यही नहीं उन्होंने विधानसभा चुनाव के मद्देनजर किस जाति के कितने लोगों को टिकट लेने का निर्णय लिया है, यह भी खुलकर बताया था जबकि उच्चतम न्यायालय ने जाति और धर्म के आधार पर राजनीति करने पर रोक लगा दी है। प्रदेश में चुनाव के लिए आचार संहिता लगने के तुरंत बाद बसपा ने अपने सभी प्रत्याशियों की सूची भी जारी कर दी है। इसलिए बसपा सुप्रीमो की घोषणा को भाजपा ने पूर्व में जहां उच्चतम न्यायालय का अपमान करार दिया, वहीं जातिगत आधार पर प्रत्याशियों की सूची जारी करने संबंधी मामले को आचार संहिता का उल्लंघन बताया है। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष जेपीएस राठौर और चुनाव आयोग से संबंधित कार्यों को देख रहे उच्च न्यायालय के अधिवक्ता कुलदीप पति त्रिपाठी ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी को पत्र लिखा है, जिसमें बसपा सुप्रीमो मायावती की तरफ से जाति व धर्म आधारित टिकट दिए जाने की घोषणा को आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन बताया है और इस मामले से संबंधित प्रमाण उपलब्ध कराते हुए शिकायत दर्ज कराई है। आयोग ने मामले को संज्ञान में लेकर बसपा के विरूद्ध कार्रवाई करने की भी मांग की है।

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