जाको राखे साइयां…

सुधीश पचौरी

प्रियंका के नाम की पैरवी करने का श्रेय मीडिया ने प्रशांत किशोर को दिया। खबर तो जरा-सी थी। लेकिन चैनलों ने प्रिंयका के कुछ पुराने स्टाक शॉटों से पूरे दिन अपना काम चलाया! भाजपा प्रवक्ता कहते रहे कि वंशवाद के दिन गए। लेकिन वंशवादी प्रियंका के मैदान में आने में अपना भविष्य देखते रहे। ‘आप पार्टी और उसके नेताओं को इस सप्ताह सबसे अधिक नकारात्मक कवरेज मिला। आप के नेता आशीष खेतान पर ‘भावना आहत करने के आरोप में एक एफआईआर की खबर रही।

Captureचार दिन तक लगता रहा कि बांग्लादेश अपने ही देश का एक हिस्सा है। जहां से अंग्रेजी के सारे चैनल दिन-रात आतंकवादी हमले को कवर करते रहे। एक के लिए वह ग्राउंड जीरो था। दूसरे के लिए ढाका से लाइव था। तीसरे के लिए वह रेस्तरां था। जहां आतंकी हमला हुआ। लेकिन ढाका ने कवरेज को मुंबई के छब्बीस ग्यारह के कवरेज जैसा नहीं बनने दिया। बांग्लादेश के अपने चैनलों ने कवरेज में खुद इस कदर संयम बरता कि आतंकवादियों के चेहरे अगले दिन ही दिखाए। सेना का मुकाम पर पहुंचना। बख्तरबंद गाडिय़ों का लगाया जाना और मोटरबोट से सैनिकों का आना-जाना दिखाया जाता रहा। संवेदनशील सूचना पर इतना कंट्रोल रखा कि मारे गए जनों की लाशों तक को नहीं दिखाया। हमने जितना देखा। इसी तरह देखा। लेकिन हमारे चैनल देर तक दहाड़ते रहे कि बांग्लादेश की सरकार आइएसआइएस का हाथ होने से इनकार कर रही है। जैसे कि उनको पक्का पता हो कि आइएसआइएस ने खुद उनको बताया है कि उसका हाथ है! दूसरे के देश में जाकर ऐसी हीरोपंथी नहीं झाडऩी चाहिए! बांग्लादेश ने इस संकट के कवरेज को बेहद संयम से प्रसारित कराया। उनके प्रवक्ता जल्द ही हमलावरों के एलीट प्रोफाइल पर जोर देते रहे कि ये प्रेरित हो सकते हैं। आइएसआइएस के सदस्य नहीं हैं। ढाका में पकड़े एक आतंकवादी के मानते ही कि उसने जाकिर नायक से प्रेरणा ली है। जाकिर नायक का नाम सुर्खियों में आ गया और तभी से चैनलों ने जाकिर नायक की पिछाई की और ज्यों-ज्यों हमारे मीडिया ने नायक की खोज- खबर ली। तो मालूम होने लगा कि यह शख्स शुद्ध घृणा बेचने वाला है। एबीपी ने इनके जो वीडियो प्रसारित किए उनमें यह शख्स खुलेआम गैर-इस्लामी धर्मों और संस्कृति पर ऐसी घृणास्पद टिप्पणियां करता दिखता, जो एकदम आग लगाने वाली लगतीं हैं। लेकिन यहां भी दिग्विजय जी की एक पुरानी फंसट एक बार फिर कांग्रेस को घेरे में ले आई। सन दो हजार बारह का उनका उवाच भी एबीपी ने दिखा दिया। जिसमें वे नायक की एक सभा में बोलने गए और जाकिर नायक को शांति का दूत बताया। जब दिग्विजय को याद दिलाया गया तो वे बोले कि तब बोला था अब कहता हूं कि आतंकवाद के बारे में सरकार उनकी जांच करे! क्या जाकिर नायक आतंकवादी संदेश देते हैं। इस विषय पर सब चैनलों में दो दिन तीखी बहसें छाई रहीं। एक तीखी बहस एबीपी पर रही। जिसमें तारिक फतह ने बताया कि जाकिर नायक इस्लाम को छोड़ दूसरे सब धर्मों को नीचा बताते हैं। यह एक प्रकार से धर्मद्वेष पैदा करने वाला फासिस्टि विचार है। जब मंत्री रिजिजू ने कहा कि सरकार निगरानी रख रही है। तो एक ने कहा कि अब तक छोड़ा क्यों हुआ है। लेकिन हमारे चैनल छोडऩे वाले नहीं। वे जाकिर को इतना दिखाएंगे कि उसे न जानने वाला भी जान जाए कि यह शख्स किस तरह के विचार रखता है! खल तत्त्व अक्सर हमारे मीडिया से इसी तरह फ्री का प्रचार पाते हैं। सप्ताह की सबसे बड़ी कहानी केन्द्रीय मत्रिमंडल के विस्तार और झटकेदार बदलाव की रही। एक शपथार्थी राज्यमंत्री अपना नाम लेना ही भूल गए, तो राष्ट्रपति ने याद दिलाया कि अपना नाम पढि़ए! मंत्रालय की अदला-बदली की खबरें रात के दस बजे के बाद फूंटी सबसे अधिक चौंकाने वाली खबर मानव संसाधन और विकास मंत्रालय में बदलाव की रही। नए मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर होंगे। खबर ब्रेक होते ही चैनलों में हंगामा हो गया। चैनल बदल-बदल कर लाइनें लगाते वे कभी कहते कि मानव संसाधन मंत्रालय स्मृति इरानी से छिना कभी कहते कि उनसे छीना गया। कभी मंत्रालय से शंटेड आउट कहते। कभी शिफ्टेड कहते। इंडिया टुडे और एनडीटीवी की बहसें स्मृति के मंत्रालय परिवर्तन को लेकर कुछ ज्यादा ही मेहरबान रहीं। एक बातचीत में सबसे तेजाबी टिप्पणी इंडिया टुडे पर रामचंद्र गुहा की रही कि स्मृति में अज्ञान (इग्नोरेंस) और अंहकार (एरोगेंस) का मारक मिश्रण था! लेकिन आगे यह भी जोड़ा कि स्मृति एकदम सेल्फमेड नेता हैं। अगर अगले चुनाव में वे राहुल को हरा देती हैं। तो यह वंशवाद पर आम आदमी की जीत कहलाएगी। एनडीटीवी में जब निधि ने पूछा कि यूपी के चुनाव में स्मृति को बड़ी भूमिका दी जा सकती है। तो सिद्धार्थ भाटिया ने कहा कि वे चुनाव अभियान चला सकती हैं। लेकिन वे जमीनी नेता नहीं हैं। उनका अपना कोई जनाधर नहीं है। इसलिए वे ज्यादा कुछ नहीं कर सकतीं। एक बार फिर कांग्रेस की ओर से प्रियंका वाड्रा का नाम यूपी के चुनाव अभियान के लिए उछाल कर बड़ी खबर बनाई गई। प्रियंका के नाम की पैरवी करने का श्रेय मीडिया ने प्रशांत किशोर को दिया। खबर तो जरा-सी थी। लेकिन चैनलों ने प्रिंयका के कुछ पुराने स्टाक शॉटों से पूरे दिन अपना काम चलाया! भाजपा प्रवक्ता कहते रहे कि वंशवाद के दिन गए। लेकिन वंशवादी प्रियंका के मैदान में आने में अपना भविष्य देखते रहे। ‘आपÓ पार्टी और उसके नेताओं को इस सप्ताह सबसे अधिक नकारात्मक कवरेज मिला। आप के नेता आशीष खेतान पर ‘भावना आहत करनेÓ् के आरोप में एक एफआईआर की खबर रही। तो दूसरे नेता यादव पर पवित्र ग्रंथ के अपमान के लिए और दंगा भड़काने के आरोप को लेकर एफआईआर की खबर छाई रही। इसके बाद केजरीवाल के सचिव राजेंद्र कुमार के अलावा चार अन्य अफसरों को सीबीआई द्वारा अचानक गिरफ्तार करने की खबर ‘आपÓ को एकदम रक्षात्मक बनाती रही। इस बार केजरीवाल की जगह आप नेता मनीष सिसोदिया ने मोर्चा संभाला और क्रोघ भरे स्वर में बोले कि यह सरकार को ठप्प करने की साजिश है। अगर राजेंद्र अपराधी है तो सजा दीजिए। लेकिन दिल्ली सरकार को काम करने दीजिए! इन दिनों आप के प्रति मीडिया की कोई हमदर्दी नहीं दिखती। वह बर्बर दृश्य आंखों में खुभ गया है। जिसमें एक मेडिकल छात्र ने एक निरीह पिल्ली को तीन मंजिल पर छत की मुंडेर से बेदर्दी से फेंका तो दर्शकों को गुस्सा आया। जो ट्वीटों में दिखा। एक एनजीओ ने उसका उपचार कराया और छात्रा पर केस किया तो एक बार फिर यह कहावत सच दिखी कि ‘जाको राखे साइयां मारि सके ना कोय!

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