जांच मशीन को बदने की टेंडर व्यवस्था ठप

केजीएमयू में

केजीएमयू के प्रशासनिक अधिकारियों को नहीं है जानकारी
केवल जांच की फीस बढ़ाने पर जोर दे रहा केजीएमयू

Capture रोहित सिंह
लखनऊ। केजीएमयू के रेडियोलॉजी विभाग में लगी दशकों पुरानी जांच मशीनों को बदलने का टेंडर निकाला गया था लेकिन वर्तमान में टेंडर व्यवस्था पूरी तरह से ठप पड़ी है। टेंडर के बारे में केजीएमयू के प्रशासनिक अधिकारियों को ही जानकारी नहीं है। ऐसे में टेंडर में गड़बड़ी की आश्ंाका जताई जा रही है। सूत्रों के मुताबिक केजीएमयू प्रशासन ने पुरानी कंपनियों के दबाव के चलते टेंडर रद्द कर दिया है। कुछ प्रॉइवेट कंपनियों के पास करीब दो दशकों से जांच मशीनों के टेंडर हैं, जिससे जांच मशीनें जर्जर हो चुकी हैं। इन मशीनों में गड़बड़ी की अक्सर शिकायतें आती रहती हैं। ऐसे में केजीएमयू की ओर से मशीनों को बदलने के लिए दिसंबर 2014 में मशीनों को बदलने के लिए टेंडर निकाले गये थे। करीब 6 महीने बीत गये, अभी तक टेंडर प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई। अब तो केजीएमयू के प्रशासनिक अधिकारियों को ही नहीं पता कि टेंडर व्यवस्था में क्या चल रहा है।
केजीएमयू में अधिकतर मरीजों की सामने जंाच नहीं हो पाती कारण चिकित्सा विश्वविद्यालय के रेडियोलॉजी विभाग में लगी जांच मशीनें अक्सर खराब रहती हैं। दरअसल रेडियोलॉजी विभाग में लगी मशीनें दशकों पुरानी हो गई हैं जिससे उनके खराब होने का सिलसिला लगा रहता है। केजीएमयू की अेार से इन मशीनों को बदलने के लिए दिसंबर 2014 में टेंडर निकाले गये थे लेकिन किसी कारणवश अभी तक टेंडर प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई है। मशीनों को बदलने के लिए टेंडर प्रक्रिया भले ही न पूरी हो पाई हो लेकिन केजीएमयू की ओर से जांचों की फीस बढ़ाने का निर्णय लिया गया है। ऐसे में केजीएमयू प्रशासन की ओर से मरीजों को जांच की बेहतरीन सुविधा देने के बजाय उन पर फीस बढ़ाकर अतिरिक्त दबाव डाला जा रहा है, जबकि रेडियोलॉजी विभाग में जांच मशीनें जर्जर पड़ी हुई है।
राजधानी स्थित किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय में रेडियोलॉजी विभाग में पीपीपी माडल पर सिटी जांच मशीनों के बदलने की टेंडर प्रक्रिया दिसंबर 2014 में शुरू हुई थी। टेंडर प्रक्रिया शुरू होते ही इसमें भारी गड़बड़ी के आरोप लगने लगे थे। सूत्रों के मुताबिक मामला राजभवन तक पहुंच गया था। बता दें केजीएमयू में दशक से भी पुरानी, सीटी, एमआरआई, एक्स-रे समेत कई अन्य जंाच मशीनें न केवल जर्जर हो चुकी हैं बल्कि तकनीक के मामले में भी पुरानी हो चुकीं हैं। सीटी, अल्ट्रासाउण्ड समेत अन्य मशीनों के खराब होने की शिकायत आम हो गईं हैं। नवीनीकरण और सेवा विस्तार के तहत वर्षों से व्यवस्था संचालित हो रही है। उक्त व्यवस्था को बदलने के लिए केजीएमयू प्रशासन के निर्देश पर वेलफेयर सोसाइटी द्वारा दिसंबर 2014 में पीपीपी माडल पर निजी कंपनियों से टेंडर आंमत्रित कर लिये, टेंडर के लिफ ाफे अभी खुले भी नहीं थे कि टेंडर निकालने वाली वेलफेयर सोसाइटी के अधिकारों पर ही प्रश्न चिन्ह लगने लगे। सूत्रों के मुताबिक मामले की शिकायत राजभवन में हुई और राजभवन में कुलपति को तलब भी किया, आनन फ ानन में केजीएमयू ने जबाव भी राजभवन को भेज दिया था लेकिन इस बात की किसी अधिकारी ने पुष्टि नहीं की गई है।

मैनेज हो गया है मामला

दिसंबर 2014 में केजीएमयू प्रशासन की ओर से मशीनों को बदलने के लिए टेंडर निकाले गये थे। शुरूआत में तो टेंडर प्रक्रिया में केजीएमयू की ओर से खूब ध्यान दिया गया Captureलेकिन इस समय केजीएमयू के अधिकारी टेंडर के मामले में कुछ बोलने के लिए तैयार नहीं है।

इस समय टेंडर प्रक्रिया में क्या चल रहा है , इसकी कोई जानकारी नहीं है। पुरानी कंपनियों की ओर से जांच मशीनें संचालित की जा रही है। टेंडर प्रक्रिया में आगे कुछ होता है तो मीडिया को सूचित किया जायेगा।
– डॉ. वेद, डिप्टी सीएमएस, केजीएमयू

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