जहरीली शराब से 34 मौतें भी नहीं हिला सकीं भवनाथ का सिंहासन

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  • 200 से ज्यादा मौतें प्रदेश भर में भवनाथ के कार्यकाल में
  • छोटे कर्मचारी निलंबित,बेतहाशा दौलत के मालिक आबकारी आयुक्त भवनाथ का रुतबा बरकरार

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। प्रदेश भर में जहरीली शराब की भट्ठियां धधक रही हैं। पुलिस, प्रशासन और आबकारी विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से ग्रामीण क्षेत्रों में अवैध शराब का कारोबार फैला हुआ है। जहरीली शराब पीकर प्रदेश में 200 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। 1621 जहरीली शराब के कारोबारी गिरफ्तार किए जा चुके हैं। इस मामले में 1588 लोगों पर केस दर्ज किया जा चुका है। लेकिन जहरीली शराब के अवैध कारोबार से करोड़ों की कमाई करने वाले अकूत सम्पत्ति के मालिक आबकारी आयुक्त भवनाथ सिंह का रुतबा कायम है। उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसलिए प्रदेश में व्यापक स्तर पर फैले जहरीली शराब के अवैध कारोबार पर लगाम लगा पाना मुश्किल लग रहा है।
उत्तर प्रदेश के एटा और फर्रूखाबाद में जहरीली शराब पीने की वजह से अबतक 34 लोगों की मौत हो चुकी है। इसमें कई बच्चे अनाथ हो गए, महिलाओं का सुहाग उजड़ गया। परिवार की रोजी-रोटी का इंतजाम करने वाला नहीं रहा। परिवार के लोग भूखों मरने की कगार पर हैं। इसके अलावा हादसे में 40 से अधिक लोगों की हालत अभी भी गंभीर बनी हुई है। इन लोगों का सैफई मेडिकल कालेज और क्षेत्र के अन्य कई अस्पतालों में इलाज चल रहा है। हादसे में मरने वालों की संख्या और अधिक बढऩे की आशंका जताई जा रही है। प्रदेश भर में जहरीली शराब से होने वाली मौतों का मुद्दा छाया हुआ है। भाजपा, बसपा, कांग्रेस और जदयू समेत कई अन्य राजनीतिक पार्टियां एटा और फर्रूखाबाद में जहरीली शराब से होने वाली मौतों को मुद्दा बनाकर सपा सरकार को घेरने में जुट गई है। हर पार्टी अपनी-अपनी तरफ से जांच कमेटी गठित कर घटना की रिपोर्ट तैयार करने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग कर रही है। सूबे के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने जहरीली शराब से होने वाली मौतों को गंभीरता से लेकर एटा के जिला आबकारी अधिकारी बीके सिंह और उप जिलाधिकारी संजीव कुमार समेत पांच लोगों को सस्पेंड कर दिया लेकिन जहरीली शराब के कारोबार को फलने-फूलने का मौका देने वाले उच्चाधिकारी आबकारी आयुक्त के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई।

पिछली घटनाओं से भी नहीं लिया सबक
दरअसल प्रदेश में जहरीली शराब से होने वाली मौतों की घटनाएं पहले भी हो चुकी हैं। प्रदेश की राजधानी स्थित मलिहाबाद में क्रिकेट मैच जीतने का जश्न मना रहे लोगों ने जमकर देशी शराब पी। इसके बाद 15 लोगों की हालत बिगडऩे लगी। इस घटना में आधा दर्जन लोगों की जहरीली शराब पीने से मौत हो गई थी। इसके अलावा उन्नाव के हसनगंज में जहरीली शराब पीने से 40 से अधिक लोग मर चुके हैं। आजमगढ़ के मुबारकपुर में जहरीली शराब पीने से 44 लोगों की मौत हो चुकी है। मलिहाबाद, उन्नाव और आजमगढ़ में जहरीली शराब की घटना सामने आने के बाद शराब की अवैध फैक्ट्रियां बंद करवाई गईं। लेकिन समय बीतने के बाद ही पुलिस, प्रशासन और आबकारी विभाग के अधिकारी सुस्त पड़ते गये। इन अधिकारियों की मिलीभगत से प्रदेश में जहरीली शराब का अवैध कारोबार फल-फूल रहा है। जो प्रदेश में जहरीली शराब बिकने और उसको पीने की वजह से होने वाली मौतों के आंकड़ों में बढ़ोत्तरी का कारण बन रहा है।

शराब के कारोबार में अफसरों का सिंडिकेट
शराब के अवैध कारोबार में अफसरों का बड़ा सिंडिकेट काम करता है। इस सिंडिकेट के प्रभाव का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि आबकारी विभाग ने वर्ष 2014-15 में प्रदेश में लगभग कुल 8,600 जगहों पर छापेमारी की लेकिन अवैध और जहरीली शराब के कारोबार को रोकने में सफलता नहीं मिल पाई। आजमगढ़, मलिहाबाद, उन्नाव, एटा और फर्रूखाबाद में जहरीली शराब के प्रकरण में छोटे अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई तो हुई लेकिन आबकारी आयुक्त समेत कई अन्य उच्चाधिकारियों को बचा लिया गया। गौरतलब है कि मलिहाबाद प्रकरण के बाद आबकारी आयुक्त अनिल गर्ग समेत 10 अन्य अधिकारियों पर सरकार का शिकंजा कसा लेकिन वह मात्र दिखावा साबित हुआ। सरकार ने शराब से होने वाली मौतों के जिम्मेदार अनिल गर्ग को कुछ ही महीनों बाद महत्वपूर्ण पदों पर तैनाती दी। इसलिए उच्चाधिकारियों को बचाने और छोटे लोगों के खिलाफ कार्रवाई करके प्रदेश सरकार भी सवालों के घेरे में फंसती चली जा रही है।

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