जहरीली शराब से मरते लोग

sanjay sharma editor5प्रशासन के लचर रवैये की वजह से ही नकली शराब ने कारोबार की शक्ल ले ली है। गांवों, कस्बों और शहरों में धड़ल्ले से नकली शराब बनाई जा रही है। गांवों में यह धंधा खूब फल-फूल रहा है। जहरीली शराब के कारोबारियों पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई न होने का ही नतीजा है कि खुलेआम नकली शराब की बिक्री हो रही है।

राजधानी में कल जहरीली शराब पीने से दो लोगों की मौत हो गई। जहरीली शराब से मौत की यह कोई पहली घटना नहीं है। आए दिन प्रदेश के किसी न किसी हिस्से में जहीरीली शराब पीने से मरने की खबरें आती है लेकिन इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती। कार्रवाई न होने की वजह से ही प्रदेश में शराब माफियाओं की संख्या बढ़ती जा रही है। इन पर नकेल नहीं लग रही है इसलिए जो शराब चोरी-छिपे बेची जाती थी वह अब पुलिस की नाक के नीचे बेची जा रही है। पुलिस भी मूक दर्शक बनी है। प्रदेश में नकली शराब की वजह से कई घर बर्बाद हो चुके हैं और कई बर्बाद होने के कगार पर है। आए दिन महिलाएं पुलिस से नकली शराब की बिक्री के बारे में और जहां बनायी जाती है उसके बारे में शिकायत करती है लेकिन क्या होता है बताने की जरूरत नहीं है। पुलिस के न सुनने पर ही वह खुद कोई ठोस कदम उठाने को विवश होती हैं।
प्रशासन के लचर रवैये की वजह से ही नकली शराब ने कारोबार की शक्ल ले ली है। गांवों, कस्बों और शहरों में धड़ल्ले से नकली शराब बनाई जा रही है। जहरीली शराब के कारोबारियों पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई न होने का ही नतीजा है कि खुलेआम नकली शराब की बिक्री हो रही है। शराब माफिया पहले छुपाकर गांवो में जहरीली शराब बेचते थे, लेकिन अब खुलेआम सरकारी ठेकों पर जहरीली शराब बेचकर जहां लोगों को मौत के मुंह में ढकेल रहे हैं, वहीं सरकार को भी करोडों रुपए का चुना लगा रहे हैं। नकली शराब की आसानी से उपलब्धता का ही नतीजा है कि निम्न तबके के तो छोटे-छोटे बच्चे भी नशे की लत के शिकार हो रहे हैं। छोटे-छोटे बच्चे नशे की लत के शिकार हो रहे है तो अंदाजा लगाया जा सकता है कि आने वाले समय में क्या हालत होगी। दो वर्ष पहले आजमगढ़ जनपद के मुबारकपुर इलाके में एक बड़े हादसे में जहरीली शराब पीने से 47 लोगों की मौत हो गई थी। इस मामले में कार्रवाई क्या हुई किसी को नहीं मालूम। जहरीली शराब के कारोबारी लोगों को मौत का सामान बेचकर रातों-रात करोड़पति हो रहे हैं और आबकारी विभाग और पुलिस की भूमिका संदिग्ध होती जा रही है। आबकारी विभाग ईमानदारी से काम करता तो यह धंधा कारोबार की शक्ल न लिया होता। नकली शराब पर प्रतिबंध लगाने में पुलिस और आबकारी विभाग नाकाम साबित हो रहे है। यह भी कहा जा सकता है कि पुलिस और आबकारी विभाग के संरक्षण में यह शराब माफिया अपने पांव पसार रहे हैं। ये लोग थोड़े भी सक्रिय हो जाएं तो इस तरह से खुलेआम मौत का सामान न मिले।

Pin It