जस्टिस संजय मिश्रा यूपी के लोकायुक्त: सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

अपने ही द्वारा नियुक्ति किए गए जस्टिस वीरेन्द्र  का नाम खारिज किया सुप्रीम कोर्ट ने

-4पीएम न्यूज़ नेटवर्क

1लखनऊ । सुप्रीम कोर्ट ने आज बड़ा फैसला करते हुए जस्टिस संजय मिश्रा को यूपी का नया लोकायुक्त बना दिया है। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने ही जस्टिस वीरेन्द्र सिंह का नाम फाइनल किया था। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर करके कहा गया था कि यूपी सरकार ने तथ्यों को छुपाकर सुप्रीम कोर्ट में भेजा था, जबकि इलाहाबाद हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस वीरेन्द्र सिंह के नाम पर राजी नहीं थे। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर जस्टिस वीरेन्द्र सिंह के शपथ लेने पर रोक लगा दी गई थी। अब आज इस फैसले ने यूपी को नया लोकायुक्त दे दिया है। सीएम अखिलेश यादव ने कहा है कि वह सुप्रीम कोर्ट के आदेश का सम्मान करते हैं।
लोकायुक्त चयन को लेकर हुई इस फजीहत ने यूपी की कई संवैधानिक संस्थाओं को चर्चा में ला दिया। इलाहाबाद हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस डॉ. डीवाई चंद्रचूड़ ने राज्यपाल को खत लिखकर कह दिया था कि वह इस बैठक में जस्टिस वीरेन्द्र सिंह के नाम पर सहमत नहीं थे। सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में यह खत भी लगाया गया था।
इस पर सरकार ने सवाल खड़े किए थे कि इतना गोपनीय खत आखिर याचिकाकर्ता को कैसे मिल गया। इस बात की भी चर्चा बनी रही कि याचिकाकर्ता को प्रदेश के कई विभाग भारी आर्थिक लाभ पहुंचा रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता से यह भी पूछा कि लोकायुक्त के केस से आपका क्या लेना देना है।
आज जस्टिस वीरेन्द्र सिंह का नाम वापस लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दुर्भाग्यपूर्ण है कि एक छोटे से मामले में यूपी के संवैधानिक पदाधिकारी एक राय नहीं बना पाए। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि दु:ख की बात यह है कि अगर पहले पता चलता कि हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस वीरेन्द्र सिंह के नाम पर सहमत नहीं है तो यह हालात नहीं होते। अब माना जा रहा है कि जस्टिस संजय
मिश्रा के चयन से यह विवाद खत्म हो जाएगा।

कौन हैं जस्टिस संजय मिश्रा?
-जस्टिस संजय मिश्रा इलाहाबाद के मूल निवासी हैं। उनका जन्म 19 नवंबर
1952 में हुआ।
– इलाहाबाद हाईकोर्ट में 24 सितंबर 2004 में ज्वॉइनिंग हुई। यहां 18 नवंबर 2014 तक सर्विस दी।
– नवंबर 2014 में वह हाईकोर्ट से रिटायर हुए।
-वह बलरामपुर में एडमिनिस्ट्रेटिव जज भी रह चुके हैं।
-यूपी सरकार के पैनल में भी जस्टिस संजय मिश्रा का नाम था, लेकिन सरकार ने जस्टिस वीरेंद्र सिंह का नाम प्रपोज किया था।

 

लखनऊ में दलित वोटों के लिए भावुक हुए मोदी: माया

-4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। बसपा सुप्रीमो मायावती ने आज केन्द्र सरकार और प्रधानमंत्री पर बड़ा हमला बोला। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार दलित और मुस्लिम विरोधी है। उन्होंने कहा कि लखनऊ में आकर हैदराबाद के दलित छात्र की मौत पर भावुक बयान देकर मोदी राजनैतिक स्टंट कर रहे हैं जबकि छात्र रोहित वेमुला की मौत पर उन्होंने कोई भी प्रभावी कदम नहीं उठाया। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष पर भी हमला बोलते हुए कहा कि सुमित्रा महाजन का बयान असैंवधानिक है।
पिछले दिनों नरेन्द्र मोदी अंबेडकर विश्वविद्यालय में हैदराबाद के दलित छात्र की मौत पर बोलते-बोलते भावुक हो गए थे। इसके बाद वह अंबेडकर महासभा गए थे और उन्होंने अंबेडकर को याद किया था। बसपा जानती है कि भाजपा के स्टार प्रचारक नरेन्द्र मोदी का यह कदम अगले विधानसभा चुनाव में दलित वोटो को अपनी ओर लुभाने के लिए था। लिहाजा उन्होंने आज अपने दलित वोट बैंक को बड़ा संदेश देते हुए भाजपा और मोदी पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय और जामिया विश्वविद्यालय के अल्पसंख्यक दर्जें को छीनने को लेकर भी केन्द्र सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि यूपी में धार्मिक उन्माद फैलाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि बीजेपी मुसलमानों के लिए घातक और खतरनाक है। उन्होंने कहा कि मोदी के मंत्री बेलगाम हो गए है।
उनका आज का अधिकांश भाषण भाजपा और मोदी पर हमले को लेकर ही केन्द्रित रहा। बाद में उन्होंने यूपी सरकार पर भी हमला बोलते हुए कहा कि यूपी में गुंडों और माफियाओं का राज हो गया है। अब यह बात मुलायम सिंह भी मान रहे है, मगर अपने पुत्र मोह के कारण वह अपने बेटे का नाम नहीं ले पाए।

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