जल स्रोत के पुराने अभिलेख तलाशने में जुटे अधिकारी

  • डीएम ने नगर निगम और राजस्व विभाग से मांगे 64 साल पुराने अभिलेख
  • जल स्रोतों के संबंध में जून के पहले सप्ताह में होगी समीक्षा बैठक

Capture4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। जिलाधिकारी राज शेखर ने लखनऊ में जल संकट को गंभीरता से लेकर जल स्रोतों का पता लगाने का निर्णय लिया है। इस संबंध में नगर निगम और राजस्व विभाग से पानी के सभी स्रोतों का विवरण मांगा है। इसके साथ ही करीब 64 साल पुराने अभिलेखों में दर्ज जल स्रोतों से संबंधित जानकारी इकट्ठा कर प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
जिलाधिकारी ने कहा कि लखनऊ अपनी गौरवशाली संस्कृति, स्मारकों, ऐतिहासिक धरोहरों और बहु आयामी कला संस्कृति के लिए पूरे विश्व में विख्यात है। जबकि पिछले कुछ वर्षों में बढ़ते शहरीकरण की वजह से भू जल स्तर लगातार गिरता जा रहा है। इससे पीने के पानी का संकट होने लगा है। आम जनता की तरफ से पीने के पानी की मांग लगातार बढ़ रही है। इसलिए भविष्य में पेयजल की समस्या कोई विकराल रूप न ले। इसके लिए समय रहते पानी की बरबादी को रोकना जरूरी है। ऐसे में जिले में वर्षों पुराने जितने भी नैसर्गिक जलस्रोत थे और उन्हें शहरीकरण के कारण अतिक्रमण में पाट दिया गया या जल स्रोत सूख गये हैं, उनका पता लगाया जायेगा। इसके बाद जल स्रोतों को पुनर्जीवित किया जायेगा। इसके लिए नगर निगम और राजस्व विभाग अन्तिम अबन्दोबस्त अभिलेख के साथ-साथ फसली वर्ष सन् 1359 के मूल अभिलेखों का परीक्षण कर सभी पुराने जल स्रोतों का विवरण तैयार करवाया जायेगा।
इसमें नदी, तालाब, कुआं, झील, पोखर एवं अन्य जलस्रेातों का गाटा क्षेत्रवार विवरण 15 मई 2016 तक सूचीबद्ध करने को कहा गया है। उन्होंने अपने आदेश में आगे कहा है कि 15 मई से 30 मई तक नगर निगम के जोनल अधिकारी और राजस्व विभाग के नायब तहसीलदार अभिलेखों में सूचीबद्ध सभी जलस्रेातों का सत्यापन करते हुए फोटोग्राफी व वीडियोग्राफी करें और जलस्रेातों की वर्तमान स्थिति के बारे में पूरा विवरण तैयार कर चार्ट बनायें। इसको 30 मई 2016 तक प्रस्तुत करने के लिए कहा गया है।

Pin It