जल्द उठेगा रहस्य से पर्दा

नेता जी की मौत कई दसकों से पहेली बनी हुई है। नेताजी के परिजनों के अलावा पूरा देश जानना चाहता है कि आखिर नेताजी की मौत कब, कहां और कैसे हुई। पिछले दिनों जब कोलकाता की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने नेताजी से जुड़ी 64 गोपनीय फाइलों को सार्वजनिक किया था तो सभी ने उसकी सराहना की थी।

sanjay sharma editor5प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस से संबंधित फाइलों को सार्वजनिक करने की घोषणा की है। यह अच्छी पहल है। देश की जनता लंबे समय से नेताजी की मौत के रहस्य से पर्दा उठाने की मांग करती आ रही है। अब जब प्रधानमंत्री ने इस रहस्य से पर्दा उठाने की बात कही तो निश्चित ही लोगों की जिज्ञासा शांत होगी। केन्द्र सरकार अगले साल 23 जनवरी (नेताजी की जयंती ) को नेताजी से संबंधित फाइलों को सार्वजनिक करना शुरू करेगी। प्रधानमंत्री ने यह घोषणा नेताजी के परिजनों से मुलाकात के बाद की। नेताजी के परिजनों ने प्रधानमंत्री से नेताजी से जुड़ी गोपनीय फाइलों को सार्वजनिक करने की मांग की है। नेताजी के परिजन लंबे समय से गोपनीय फाइलें को सार्वजनिक करने की मांग करते आ रहे हैं।
नेता जी की मौत कई दसकों से पहेली बनी हुई है। नेताजी के परिजनों के अलावा पूरा देश जानना चाहता है कि आखिर नेताजी की मौत कब, कहां और कैसे हुई। पिछले दिनों जब पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने नेताजी से जुड़ी 64 गोपनीय फाइलों को सार्वजनिक किया था तो सभी ने उसकी सराहना की थी। उसके बाद से ही केन्द्र सरकार पर गोपनीय दस्तावेज सार्वजनिक करने का दबाव बढ़ गया है। नेताजी के परिजन चंद्र कुमार बोस का कहना है कि उनका मुख्य उद्देश्य भारत सरकार के पास रखे गोपनीय दस्तावेजों को सार्वजनिक कराना है। जब तक हम नेजा जी से जुड़े अपने देश में रखे गोपनीय दस्तावेज सार्वजनिक नहीं करते तब तक अन्य देशों से ऐसा करने का अनुरोध नहीं कर सकते।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ट्विटर पर बताया कि अगले वर्ष 23 जनवरी से नेताजी सुभाष चंद्र बोस से संबंधित गोपनीय फाइलों को सार्वजनिक करने की प्रक्रिया शुरू होगी। केंद्र सरकार की ओर से विदेश की सरकारों से भी उनके पास उपलब्ध नेताजी से संबंधित गोपनीय फाइलों को सार्वजनिक करने का अनुरोध किया जायेगा। ऐसा पहला अनुरोध रूस से दिसंबर महीने में किया जायेगा। पीएम ने कहा कि इतिहास को छुपाने की कोई जरूरत नहीं है। जो देश अपने इतिहास को भुला देते हैं, उनमें इतिहास बनाने की क्षमता नहीं रह जाती। यह एक दम सच है। इस रहस्य को छोड़ भी दिया जाए, तो इतने पुराने दस्तावेजों को सार्वजनिक किया जाना इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि इससे इतिहास को समझने में मदद मिलती है। यह स्वाभाविक है कि हम अपने राष्टï्रीय नायकों का सम्मान करें, खासकर आजादी के आंदोलन के नेताओं का। नेता जी की मौत से संबंधित फाइलें सार्वजनिक न किए जाने से यह रहस्य गहराता जा रहा है। लोगों के दिमाग में कई तरह की भ्रांतियां हैं। इस रहस्य से पर्दा उठता है तो निश्चित ही लोगों के समक्ष एक सही तस्वीर आएगी और लोगों की शंका का समाधान भी होगा।

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