जलाकर मारी गई लडक़ी के परिजनों को सीएम के निर्देश पर दिया गया चेक बाउंस

ये है अफसरों का नाकारापन

प्रतापगढ़ में दबंगों द्वारा जलाकर मारी गई पीडि़ता को अनुदान के रूप में दिया गया चेक हुआ वापस

पीडि़त परिवार आक्रोशित न्याय की गुहार लेकर पहुंचे राजधानी

Capture 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। राज्य के प्रशासनिक अफसरों की तरफ से हो रही लगातार लापरवाही सरकार पर भारी पड़ रही है। प्रतापगढ़ के ज्योति हत्याकांड में यह सच एक बार फिर सामने आया है, जिससे सरकार की साख प्रभावित हो रही है। दरअसल देहात और गरीब परिवार की लडक़ी ज्योति विश्वकर्र्मा अपना कैरियर बनाने की कोशिश में थी, पर उसके सपने पूरे हो पाते, उसके पहले ही दबंगों ने उसे जला दिया और 8 दिन इलाहाबाद के स्वरूप रानी अस्पताल में मौत से लड़ती हुई ज्योति आखिरकार 3 अक्टूबर को तडक़े ढाई बजे जिंदगी की जंग हार गयी। फिर शुरू हुआ उसे इंसाफ दिलाने की जद्दोजहद और जब मामले ने तूल पकड़ा और इसकी आंच सत्ता के गलियारे तक पहुंची तो ज्योति के परिजनों को पंाच लाख की सहायता चेक के रूप में दी गयी। पर यहां भी बड़ी प्रशासनिक चूक हुई। चेक में इतनी खामियां थी कि महीना भर बैंक का चक्कर काटते-काटते अंत में बैंक ने चेक ही वापस कर दिया। विपक्षी दल पहले से ही सरकार पर एक जाति विशेष के लोगों पर ज्यादा तवज्जो देने का आरोप लगाते रहे हैं और अब पिछड़ी जाति की इस लडक़ी के परिजनों को दिये गये पांच लाख रूपये की मदद भी अधर में है। इस तरह अफसरों की लापरवाही ने एक बार फिर विपक्ष को सरकार की खिंचार्ई का मौका दे दिया है।
अब इस मामले में प्रशासनिक लापरवाही और मुआवजे में भेदभाव को लेकर अखिल भारतीय विश्वकर्मा विकास परिषद ने सरकार व प्रशासन पर हमला बोलते हुए मुआवजे को लेकर सवाल खड़ा किया है। परिषद के प्रदेश महामंत्री दीपक शर्मा ने बताया कि ज्योति की मौत के बाद गुस्साये लोगों ने जब इंसाफ की मांग को लेकर आंदोलन किया तो पीडि़त के परिजनों को 5 लाख का चेक दिया गया। पर अफसर जिस तरह इस हत्याकांड के आरोपियों का बचाव करने से बाज नहीं आ रहे हैं, ठीक उसी तरह वह मुआवजें का चेक देने में भी लापरवाही से नहीं चूके। परिषद का कहना है कि घटना में तत्कालीन पुलिस वालों की संलिप्तता है। अब तक उन पर कोई कार्रवाई नहीं की गयी और अब चेक वापस होने की घटना ने लोगों का आक्रोश बढ़ा दिया है सरकार ज्योति के परिजनों को सम्मानजनक आर्थिक सहयोग प्रदान करे। बता दें कि 25 सितम्बर को प्रतापगढ़ के जेठवारा थानान्तर्गत श्रीपुर गांव में कुछ दबंगों ने ज्योति विश्वकर्मा को जिन्दा जला दिया था।
डीएम लखनऊ में हैं। मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। इस बारे में संबंधित अफसरों से बात करने के बाद ही कुछ बता पाऊंगा।
-महेन्द्र कुमार सिंहसीडीओ, प्रतापगढ़

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