जलवायु समझौते को मंजूरी और विकास

“क्या देश ने कार्बन उत्सर्जित करने वाले ऊर्जा स्रोतों का विकल्प विकसित कर लिया है? सवाल यह भी है कि पेरिस जलवायु समझौते पर भारत ने विकसित देशों पर यह दवाब क्यों नहीं बनाया कि चूंकि वे सबसे अधिक कार्बन उत्सर्जन कर रहे है तो अधिकतम नियंत्रण लगाने की जिम्मेदारी भी उनकी है या केवल मोदी सरकार ने अति उत्साह में समझौते को मंजूरी दे दी है?”

sanjay sharma editor5भारत ने ऐतिहासिक पेरिस जलवायु समझौते को मंजूरी दे दी। भारतीय प्रतिनिधि सैयद अकबरुद्दीन ने राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी द्वारा हस्ताक्षरित अनुमोदन दस्तावेज संयुक्त राष्ट्र को सौंप दिए। इसी के साथ समझौते को मंजूरी देने वाला भारत 62वां राष्ट्र हो गया है। भारत के इस कदम की अमेरिकी राष्टपति बराक ओबामा व फ्रांस के राष्टï्रपति फ्रास्वां ओलांद ने सराहना की है। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव वान की मून ने भी भारत को धन्यवाद दिया है। चीन और अमेरिका के बाद भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कार्बन उत्सर्जित करने वाला देश है। वैश्विक कार्बन उत्सर्जन में चीन-अमेरिका की भागीदारी 40 और भारत की भागीदारी 4.1 फीसदी है। बड़ा सवाल यह है कि क्या यह कदम भारत जैसे विकासशील देश के विकास को बाधित नहीं करेगा? क्या देश ने कार्बन उत्सर्जित करने वाले ऊर्जा स्रोतों का विकल्प विकसित कर लिया है? सवाल यह भी है कि पेरिस जलवायु समझौते पर भारत ने विकसित देशों पर यह दवाब क्यों नहीं बनाया कि चूंकि वे सबसे अधिक कार्बन उत्सर्जन कर रहे हैं तो अधिकतम नियंत्रण लगाने की जिम्मेदारी भी उनकी है या केवल मोदी सरकार ने अति उत्साह में समझौते को मंजूरी दे दी है? सच तो यह है कि भारत के इस कदम से अन्य विकासशील देशों पर भी विकसित राष्टï्र दबाव बनाएंगे, जिससे उनका विकास प्रभावित हो सकता है। पिछले साल इस समझौते पर पेरिस में 191 देशों में सहमति बनी थी। भारत से पहले 61 देश मंजूरी दे चुके हैं। आशंका जताई गई है कि ग्लोबल वार्मिंग से जलवायु में बड़ा परिवर्तन हो सकता है। इससे मानव जाति को बाढ़, सूखा व जंगलों में आगजनी जैसी आपदाओं का सामना करना पड़ सकता है। समझौते को अमलीजामा पहनाने के लिए भारत को कार्बन उत्सर्जन में काफी कटौती करनी होगी। भारत के कुल कार्बन उत्सर्जन का दस फीसदी परिवहन साधनों से होता है, जिसमें हर साल बढ़ोतरी हो रही है। इस पर नियंत्रण लगाने के लिए सरकार को अधिक से अधिक सार्वजनिक वाहनों के प्रयोग को प्रोत्साहित और निजी वाहनों के प्रयोग को कम करना होगा। फिलहाल यह काम बेहद कठिन है। इसके अलावा गरीब परिवारों द्वारा खाना बनाने में प्रयुक्त किए जा रहे ईंधन से भी काफी कार्बन उत्सर्जित होता है। इसके लिए सरकार को वैकल्पिक ईंधन सर्व सुलभ कराना होगा। वायु और सौर ऊर्जा के विकल्प पर जोर देना होगा। कुल मिलाकर यदि सरकार ने वैकल्पिक ऊर्जा का विकास किए बिना समझौते को किया तो यह भारत के विकास के लिए बाधक ही होगा।

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