जर्जर इमारतें: खतरे में लोगों की जान और नोटिस भेजने तक सिमटा नगर निगम

जर्जर इमारतें: खतरे में लोगों की जान और नोटिस भेजने तक सिमटा नगर निगम

178 से अधिक भवन चिन्हित
2000 से ज्यादा लोग रह रहे हैं इन भवनों में

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। नगर निगम ने मानसून की दस्तक से ठीक पहले शहर में जर्जर इमारतों की सूची तैयार करवाई है। इसके बाद इन इमारतों के मालिकों को नोटिस जारी कर रहा है। इनमें से बहुत सी इमारतें सरकारी हैं जो बीते कई दशकों की बनी हुई है और वे इमारतें कभी भी ढह सकती हैं। हालांकि नगर निगम ने कई बार इन इमारतों की देखरेख करने वालों को नोटिस भी भेजा लेकिन किसी ने भवन को खाली नहीं किया।
बताया यह भी जा रहा है कि शहर में अधिकतर बिल्डिंग रसूखदारों की है, जिन पर सरकार के अफसरों व नेताओं का हाथ है। इसी वजह से इन जर्जर इमारतों को नगर निगम आज तक खाली नहीं करा पाया। इसके अलावा इन जर्जर भवनों के बारे में डीएम ने भी संज्ञान लिया और कठोर कार्रवाई के लिए आदेश जारी किए। परन्तु स्थिति आज भी जस की तस बनी हुई है। पिछले साल 232 जर्जर भवनों में से जिला प्रशासन सिर्फ गिने चुने को ही दुरुस्त करवा पाया था। नगर निगम के इंजीनियरिंग सेक्शन के अफसर के मुताबिक पिछले साल जारी सूची में 90 फीसदी में कोई काम नहीं कराया गया। सिर्फ नोटिस जारी कर खानापूर्ति कर ली गई थी। इस बार भी यही प्रक्रिया अपनार्ई जा रही है जबकि निगम द्वारा चिह्नित जर्जर भवनों में 2000 से ज्यादा लोग रह रहे हैं। इसमें सबसे ज्यादा लोग नजरबाग, लालकुआं, मौलवीगंज, यदुनाथ सान्याल वॉर्ड, यहियागंज वॉर्ड में रह रहे हैं। नगर निगम के सूत्र बताते हैं कि इन इलाकों की इमारतें 60 फीसदी से ज्यादा जर्जर हैं और कभी भी धराशायी हो सकती है।

2020 में अब तक 178 इमारतें हुईं जर्जर
2018 में सूची में 111 जर्जर भवन जोड़े गए थे। 2019 में नगर निगम ने सभी आठ जोनों में 232 भवन जर्जर की श्रेणी में रखे थे। जबकि जांच के दौरान वर्ष 2018- 2019 में 121 भवन जर्जर बताए गए थे। इनकी संख्या जुलाई 2020 में 178 है। बताया जा रहा है कि लॉकडाउन के कारण काम बंद था। ऐसे में जर्जर इमारतों में और इजाफा होने की संभावना है ।

ये इलाके हिट लिस्ट में

नजरबाग, लालकुआं, मौलवीगंज, यदुनाथ सान्याल वॉर्ड, यहियागंज, हुसैनाबाद, रकाबगंज, मोतीनगर, राजेंद्रनगर, निशातगंज, चौक, कश्मीरी मोहल्ला, अशरफाबाद, सआदतगंज सहित कई इलाके नगर निगम की हिट लिस्ट में है। बताया जाता है कि यहां सबसे ज्यादा भवन जर्जर हैं।

यह है प्रक्रिया

नगर निगम सर्वे कर जर्जर भवनों की सूची तैयार करता है और उन्हें नोटिस जारी कर मकान खाली करने का समय देता है। यह सूची जिला प्रशासन को सौंपी जाती है। जिला प्रशासन इन भवनों में रहने वालों को मरम्मत का मौका देता है, जिनमें मरम्मत की संभावना नहीं होती है, उन पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई होती है।

जोनवाइज जर्जर भवन

जोन एक में 60, जोन दो में 45, जोन तीन में 11, जोन चार में 8, जोन छह में 54 भवन जर्जर हैं।

पिछले साल की सूची जिला प्रशासन को दी गई थी। कार्रवाई उन्हें ही करनी है। इस वर्ष की सूची भी उन्हें जल्द सौंप दी जाएगी।
इंद्रमणि त्रिपाठी, नगर आयुक्त

https://www.youtube.com/watch?v=xNvheYPcGYg

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